साहित्य आजतक 2019 के दूसरे दिन 'कितना जरूरी है बाजार' विषय पर चर्चा करते हुए मशहूर लेखक भालचंद्र जोशी ने कहा कि आजकल का लेखक मंडी में खड़ा है, और वहां विचार की कोई कद्र नहीं है. मंडी में बाजारवाद हावी है और ऐसे में लेखक के सामने बाजार के हिसाब से लिखने की मजबूरी होती है. दूसरी ओर बाजारवाद के दौर में लेखक के रूप में करियर शुरू करने के मामले पर उर्मिला शिरीष ने कहा कि आज के दौर में यह कहना मुश्किल है कि करियर किस मोड़ पर जाएगा. हिंदी का लेखक जब लिखता है उसे इस बात की चिंता होती है कि वह इससे अपना जीवन चला पाएगा. वीडियो देखें.