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लाइफस्टाइल

बचपन से रहना चाहते हैं अव्वल तो काम आएंगे आपके डॉग-कैट, जानें कैसे

बचपन से रहना चाहते हैं अव्वल तो काम आएंगे आपके डॉग-कैट, जानें कैसे
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प्रतियोगिता के दौर में आज हर युवा खुद को दूसरों से बेहतर साबित करने की दौड़ में लगा हुआ है. जिसकी वजह से तनाव ने उनके मस्तिष्क को घेर लिया है. छात्र आज के समय में अपनी कक्षा, परीक्षा जैसी कई चीजों को लेकर हर समय एक दबाव महसूस करते रहते हैं. लेकिन हाल ही में हुई एक रिसर्च ने अब इस तनाव को दूर भगाने का रास्ता निकाल लिया है. आइए जानते हैं आखिर क्या है यह रास्ता.
(Pixabay Images)
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शोधकर्ताओं ने हाल ही में एक शोध में इस बात का पता लगाया है कि कुत्ते या बिल्ली पालने से विद्यार्थियों को तनाव से राहत देने वाले शारीरिक लाभों के साथ-साथ उनके मूड में सुधार लाया जा सकता है. जर्नल एईआरए ओपन में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक, कई विश्वविद्यालयों ने 'पेट योर स्ट्रेस अवे' कार्यक्रम चलाया है, जहां विद्यार्थी आकर कुत्ते और बिल्लियों से बात कर सकते हैं, उनके साथ खेल सकते हैं.
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वाशिंगटन स्टेट यूनिवर्सिटी में एसोसिएट प्रोफेसर पेट्रीसिया पेंड्री ने कहा, "सिर्फ दस मिनट से महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है. हमारे अध्ययन में जिन विद्यार्थियों ने कुत्ते और बिल्लियों संग समय बिताया उनमें कॉर्टिसोल हॉरमोन में उल्लेखनीय कमी पाई गई. यह तनाव पैदा करने वाला एक प्रमुख हॉरमोन है."
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इस अध्ययन में 249 कॉलेज विद्यार्थियों को शामिल किया गया जिन्हें चार समूहों में बांट दिया गया. इनमें से पहले समूह को कुत्ते और बिल्लियों संग दस मिनट का समय बिताने को दिया गया.
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परीक्षण में पाया गया कि जिन विद्यार्थियों ने जानवरों संग वक्त बिताया, इस मुलाकात के बाद उनके लार में कॉर्टिसोल बहुत कम पाया गया. पेंड्री का कहना है कि हम बस यह देखना चाहते थे कि इस तरह के कार्यकलाप से तनाव में कमी आती है या नहीं और इससे तनाव में कमी आई. यह काफी रोमांचक है क्योंकि हो सकता है कि स्ट्रेस हॉरमोन में कमी वक्त के साथ शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को महत्वपूर्ण लाभ पहुंचाए.
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