उत्तरकाशी की दिवंगत पर्वतारोही सविता कंसवाल को मरणोपरांत तेनजिंग नोर्गे नेशनल एडवेंचर अवार्ड से नवाजा गया. राष्ट्रपति भवन में आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने स्व. सविता के पिता राधेश्याम कंसवाल को अवार्ड सौंपा.
अवार्ड ग्रहण करने के लिए सविता की मां कमलेश्वरी देवी भी गईं थीं. उनके पिता और माता की आंखों में आंसू भर गए थे और समारोह में बैठा हर शख्स काफी इमोशनल हो गया था. इस कड़ी में खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने भी अपने एक्स पर एक वीडियो शेयर किया. जो काफी वायरल हो रहा है और उसे काफी पसंद कर रहे हैं.
दिवंगत पर्वतारोही सविता कंसवाल को मरणोपरांत तेनज़िंग नॉर्गे पुरस्कार
सविता 16 दिनों के अंदर माउंट एवरेस्ट और माउंट मकालू पर चढ़ने वाली पहली भारतीय पहली बनीं थी. पर्वतारोहण में एक दशक लंबे करियर के साथ, उन्होंने कर्तव्य की पंक्ति में अदम्य साहस, दृढ़ संकल्प और सहनशक्ति का प्रदर्शन किया और वीरता प्रदर्शित की. लेकिन 4 अक्टूबर 2022 का दिन उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के लिए मायूस करने वाला रहा.
पिता ने लिया बेटी का मरणोपरांत पुरस्कार
जिस चोटी को फतह करने के लिए नेहरू पर्वतरोहन का 42 सदस्यों का एक दल निकला था, उसी चोटी पर आए हिमस्खलन (एवलांच) में 29 पर्वता रोही दब गए थे जिसमें 29 लोगों की मौत हो गई थी कुछ को रेस्क्यू कर लिया गया था लेकिन पर्वतारोही और ट्रेनर सविता कंसवाल की मौत हो गई थी.
Heartwarming Moment of the Day
— Anurag Thakur (@ianuragthakur) January 9, 2024
A deeply emotional and pride-filled moment as Shri Radhe Shyam Kanswal ji accepts the Tenzing Norgay National Adventure Award 2022 in Land Adventure on behalf of his late daughter, Savita Kanswal.
Savita became the 1st Indian woman to scale Mt.… pic.twitter.com/6JTlsDfSsP
सविता ने पहले विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट फतह कर प्रदेश का नाम रोशन किया था. इसके 15 दिन के भीतर सविता ने माउंट मकालू, 8463 मीटर पर भी सफल आरोहण किया था. इसके साथ ही माउंट ल्होत्से चोटी पर तिरंगा लहराने वाली सविता देश की दूसरी महिला पर्वतारोही बनी थीं. सविता ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट, 8848 मीटर पर तिरंगा फहराया था.
16 दिनों में मांउट एवरेस्ट और माउंट मकालू फतह करने वाली पहली भारतीय महिला थीं
सविता उत्तरकाशी जिले के लोंथरू गांव की रहने वाली थी. जो एक गरीब घर की बेटी थी, सविता अपने घर और परिजनों के लिए उम्मीद की किरण बनकर आई थी. लेकिन इस तरह बहुत छोटी उम्र में इस तरह दुनिया से चले जाने पर उनके माता पिता का सहारा छिन गया. जब बेटी को बहादुरी के लिए अवॉर्ड मिला तो सबकी आंखे एक बार फिर नम हो गईं.
सविता ने बहुत कम समय में ही पर्वतारोही के क्षेत्र देश का नाम रोशन किया था. सविता ने नेहरू पर्वतारोहण संस्थान से एडवांस और सर्च एंड रेस्क्यू कोर्स के साथ पर्वतारोहण प्रशिक्षक का कोर्स किया था. सविता नेहरू पर्वतारोहण संस्थान की एक कुशल प्रशिक्षक थी. सविता की मां ने नम आंखों से कहा कि उन्हें अपनी बेटी पर गर्व है.