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US विदेश मंत्री ने एस जयशंकर से की बात, इन अहम मुद्दों पर हुई चर्चा

माइक पोम्पियो और एस जयशंकर ने इंडो पैसिफिक रीजन के साथ ही दुनिया में शांति, समृद्धि और सुरक्षा के लिए भारत और अमेरिका के संबंधों की मजबूती पर जोर दिया.

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विदेश मंत्री एस जयशंकर और माइक पोम्पियो (फाइल फोटोः पीटीआई)
विदेश मंत्री एस जयशंकर और माइक पोम्पियो (फाइल फोटोः पीटीआई)

  • साल के अंत में मंत्री स्तरीय वार्ता पर बनी सहमति
  • दोनों नेताओं ने संबंधों की मजबूती पर दिया जोर

अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने गुरुवार को विदेश मंत्री एस जयशंकर से फोन पर बात की. अमेरिकी विदेश मंत्रालय के मुताबिक दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच हुई इस वार्ता में द्विपक्षीय संबंधों और बहुपक्षीय सहयोग पर चर्चा हुई. अमेरिकी विदेश मंत्रालय के मुताबिक दोनों नेताओं ने इस साल के अंत तक मंत्री स्तर की वार्ता के लिए सहमति व्यक्त की. मंत्री स्तर की इस वार्ता में दोनों देशों के दो-दो मंत्री शामिल होंगे.

अमेरिकी विदेश मंत्रालय की ओर से बताया गया है कि दोनों नेताओं के बीच अफगानिस्तान में शांति प्रक्रिया का समर्थन करने और अन्य अंतरराष्ट्रीय मुद्दों के साथ ही कोरोना महामारी का मुकाबला करने, हाल ही में क्षेत्र को अस्थिर करने वाले मुद्दों पर भी चर्चा हुई. माइक पोम्पियो और एस जयशंकर ने इंडो पैसिफिक रीजन के साथ ही दुनिया में शांति, समृद्धि और सुरक्षा के लिए भारत और अमेरिका के संबंधों की मजबूती पर जोर दिया. दोनों देशों के विदेश मंत्रियों ने क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों को लेकर आपसी सहयोग जारी रखने पर भी सहमति जताई.

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वहीं, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) एचआर मैकमास्टर ने अफगानिस्तान के कार्यकारी विदेश मंत्री हनीफ अतमर से बात की. इस दौरान दोनों लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद जैसे पाकिस्तानी आतंकी संगठनों के अलकायदा, आईएस और क्षेत्र के अन्य आतंकी समूहों से संबंधों को लेकर चर्चा हुई. अफगानिस्तान के कार्यकारी विदेश मंत्री ने मैकमास्टर से कहा कि मानवाधिकारों के बगैर शांति फेल है.

गौरतलब है कि दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच हुई इस बातचीत से ठीक एक दिन पहले ही संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कश्मीर को लेकर अनौपचारिक चर्चा हुई थी. चीन की ओर से कहा गया था कि भारत ने जम्मू कश्मीर के दर्जे में बदलाव का एकतरफा फैसला ले लिया, जो अवैध है. अमेरिका ने इस चर्चा को बगैर किसी नतीजे के खत्म करने को कहा था. इस विषय पर चीन पूरी तरह से अलग-थलग पड़ गया और चर्चा बेनतीजा रही थी.

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