देश में अलग-अलग समुदाय के बीच अलग-अलग मुद्दों को लेकर उठ रहे विरोध के बीच मूर्तियों के तोड़े जाने की घटनाएं बढ़ी हैं, ऐसे में तनावग्रस्त क्षेत्र में शांति बनाए रखना पुलिस के लिए चुनौती भरा साबित हो जाता है. सहारनपुर में स्थिति बिगड़ने से रोकने के लिए पुलिस ने कई तरीके अपना रखे हैं.
सबसे ज्यादा मामले बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा को तोड़े जाने के सामने आ रहे हैं
अंबेडकर की प्रतिमा को तोड़ने के मामलों से दलित समुदाय बेहद नाराज है. हाल ही में दलितों के उग्र प्रदर्शन से सरकार के होश फाख्ता हो गए थे. अकेले उत्तर प्रदेश में अंबेडकर की प्रतिमा तोड़े जाने के कई मामले सामने आ चुके हैं.
मूर्तियों पर बढ़ रहे हमले
10 अप्रैल को जातीय आरक्षण के खिलाफ बुलाए गए भारत बंद के दौरान भी अकेले पश्चिम उत्तर प्रदेश में अंबेडकर की मूर्ति तोड़े जाने की दो घटनाएं सामने आईं. बदायूं में जहां अंबेडकर के पुतले का हाथ तोड़ दिया गया, वहीं सहारनपुर में भी अंबेडकर की प्रतिमा के साथ छेड़छाड़ करने का आरोप लगा है.
पिछले कई दिनों में उत्तर प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में अंबेडकर की प्रतिमाएं तोड़ी गई लेकिन प्रशासन ने समय रहते उसे दुरुस्त कर फसाद को और बड़ा होने से रोक दिया. अंबेडकर की प्रतिमा तोडे़ जाने से दलितों की नाराजगी और उसके बाद फसाद को बढ़ने से रोकना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है.
उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक सूत्रों की माने तो मूर्ति तोड़े की कई घटनाएं जाहिर नहीं की जाती हैं और इससे पहले कि फसाद खड़ा हो, प्रशासन समय रहते ही उन मूर्तियों को उन स्थापित कर बखेड़ा खड़ा होने से बचा लेता है.
आजतक की पड़ताल में हम आपको बताएंगे कि कैसे उत्तर प्रदेश प्रशासन अंबेडकर की प्रतिमा तोड़े जाने से उठने वाले दलितों की नाराजगी और बवाल को रोकने के लिए परेशानी से जूझता हुआ कितनी जद्दोजहद कर रहा है. 10 अप्रैल को पश्चिम उत्तर प्रदेश के बदायूं में अंबेडकर की प्रतिमा तोड़े जाने का मामला सामने आया लेकिन उसे भगवा रंग से रंगे जाने को लेकर बखेड़ा खड़ा हो गया.
दलितों के विरोध के बाद प्रशासन ने अंबेडकर के पुतले की फिर से पुताई कर दी. तो वहीं सहारनपुर में भी एक कस्बे में बाबासाहेब अंबेडकर के पुतले का हाथ टूटा पाया गया तो बखेड़ा खड़ा होने से पहले ही प्रशासनिक अमला अपने दल बल के साथ पहुंचा और मूर्ति को दोबारा सही कर दिया.
पुलिस भी रहती है तैयार
पुलिसवालों ने ही मूर्ति के टूटे हाथों को जोड़कर फिर से रंगाई पुताई करके पुतले को जस का तस कर दिया. असामाजिक तत्व अंबेडकर के पुतलों को नुकसान पहुंचाकर सामाजिक सद्भाव खराब करना चाहते हैं. ऐसे तत्वों से निपटना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है. इसी चुनौती से निपटने के लिए प्रशासन ने भी रास्ता निकाल लिया है. ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए उत्तर प्रदेश के कई संवेदनशील इलाकों में पुलिस और प्रशासन ने एहतियात के तौर पर एक बड़ी तैयारी की है.
जैसे ही प्रशासन को किसी स्थान में मूर्तियां तोड़े जाने की खबर मिलती है तो पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी तुरंत ऐसी जगह पर पहुंचते हैं और पूरे इलाके को घेर लेते हैं जिसमें बाहरी लोगों का आना कुछ देर के लिए रोक दिया जाता है. मूर्तियां तोड़ या भड़काऊ नारे लिखकर सामाजिक वैमनस्य फैलाने वाले उपद्रवियों की मंशा को नाकाम कर देते हैं.
उपद्रवियों की मंशा को नाकाम करने के लिए सहारनपुर समेत कई संवेदनशील जिलों में पुलिस ने 'पोस्टर पार्टी' तैयार की है. इन थानों में पुलिस अपने साथ सीमेंट और पेंट डब्बा तैयार रखती है. सहारनपुर शहर के एसपी प्रबल प्रताप सिंह मानते हैं कि असामाजिक तत्वों द्वारा सामाजिक सद्भावना बिगाड़ने वालों की कोशिशों से निपटना पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती है और उससे लड़ने के लिए पुलिस तैयार है. किसी धार्मिक स्थल पर उपद्रव द्वारा भड़काऊ नारे या ऐसे किसी शब्द लिखे जाने के स्थिति में पुलिस की पोस्टर पार्टी उसे स्याही से ढक देती है और उपद्रव क्योंकि मंशा को नाकाम कर देता है.
वहीं, अंबेडकर जैसे महापुरुषों की प्रतिमा तोड़कर वैमनस्य फैलाने वाले असामाजिक तत्वों की मंशा नाकाम करने के लिए पुलिस भी तैयार रहती है. जहां भी पुलिस को मूर्तियां खंडित करने की खबर मिलती है फौरन पहुंचकर पुलिस खुद ही सीमेंट और जरूरी सामान का इस्तेमाल कर क्षतिग्रस्त मूर्तियों को ठीक करने की कोशिश करती है और रंगाई-पुताई कर मूर्ति को जस का तस बना दिया जाता है.
पुलिस ने मूर्तिकारों की बनाई लिस्ट
सहारनपुर के एसपी प्रबल प्रताप सिंह कहते हैं कि अगर कहीं प्रतिमा को ज्यादा नुकसान पहुंचा हो तो पुलिस फौरन इलाके के मूर्तिकारों से संपर्क साधकर तुरंत एक नई प्रतिमा का बंदोबस्त करती है और मूर्ति खंडित होने की जगह पर नई प्रतिमा स्थापित कर देती है.
सहारनपुर पुलिस ने ऐसे कई मूर्तिकारों की एक लिस्ट तैयार की है जो मूर्तियां खंडित किए जाने की घटना के दौरान प्रशासन की मदद करते हैं. यह मूर्तिकार जरूरत पड़ने पर खंडित मूर्तियों को रंग-रोगन देकर पहले जैसा बनाने की कोशिश करते हैं और अगर उपद्रवियों ने मूर्ति को ज्यादा नुकसान पहुंचाया हो तो यह फौरन नई प्रतिमा लगाकर पुरानी प्रतिमा को हटा देते हैं.