हरियाणा के हिसार में एक इमाम को मस्जिद से बाहर निकालकर बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने जबरदस्ती भारत माता की जय के नारे लगवाए और ऐसा न करने पर उसे थप्पड़ भी मारे. हरियाणा की ये घटना अकेली घटना नहीं है, जब किसी खास संगठन और विचारधारा के लोगों ने जबरदस्ती भारत माता की जय के नारे लगवाएं हों. इससे पहले मुंबई में एक मुस्लिम ऑटोरिक्शा ड्राइवर से नारा लगवाने का वीडियो वायरल हो गया था.
सवाल ये है कि जो लोग भारत माता की जय को लेकर आंदोलित हैं, उन्हें पता भी है कि भारत माता आखिर हैं कौन? दूसरा सवाल ये कि किसी से जबरन भारत माता की जय बुलवाने से आखिर कौन सा मकसद हल होता है, इससे राष्ट्रवाद मजबूत होता है या सांप्रदायिक एकता?
उक्त सवालों के परिप्रेक्ष्य में महात्मा गांधी और पंडित जवाहर लाल नेहरू के वक्तव्य और लेख महत्वपूर्ण हैं. इससे हमें भारत माता की परिभाषा और उनकी जय के नारे की सार्थकता को समझने में मदद मिलती है.
नेहरू ने बताया था, कौन हैं भारत माता?
पंडित नेहरू ने डिस्कवरी ऑफ इंडिया में स्पष्ट रूप से इस बारे में लिखा और समझाया है. एक दौरे पर पंडित नेहरू एक गांव में पहुंचे. यहां उनके स्वागत में ग्रामीणों ने भारत माता की जय के नारे लगाए. इस पर नेहरू ने ग्रामीणों से सवाल किया कि जिस भारत माता की जय का नारा लगाते हैं, क्या आप बता सकते हैं कि ये भारत माता कौन हैं. ग्रामीण कोई जवाब नहीं दे पाए. इसके बाद पंडित नेहरू ने बताया कि हमारे पहाड़, नदियां, जंगल, जमीन, वन संपदा, खनिज... ही भारत माता हैं.
उन्होंने कहा कि अगर आप भारत माता की जय के नारे लगाते हैं, तो आप हमारे प्राकृतिक संसाधनों की जय करते हैं. नेहरू का कहना है कि हिन्दुस्तान एक खूबसूरत महिला नहीं है. नंगे और भूखे किसान ही हिन्दुस्तान या भारत हैं. वे न तो खूबसूरत हैं, न देखने में अच्छे हैं, क्योंकि गरीबी अच्छी चीज नहीं है. वह बुरी चीज है. इसलिए जब आप 'भारत माता की जय' कहते हैं, तो याद रखिए कि भारत क्या है, और भारत के लोग निहायत बुरी हालत में हैं- चाहे वे किसान हों, मजदूर हों, खुदरा माल बेचने वाले दुकानदार हों, और चाहे हमारे कुछ नौजवान हों. यही हिंदुस्तान है. भारत माता की जय का नारा लगाना इनकी ही जय का नारा लगाना है.
हजारों हिंदुओं ने लगाया अल्लाह हू अकबर का नारा
8 सितंबर 1920 को यंग इंडिया में लिखे एक लेख में महात्मा गांधी ने देश के लोगों के बीच एकता को मजबूत बनाने के लिए तीन नारे लगाने की अपील की थी. ये थे- अल्लाह हो अकबर, भारत माता की जय और हिंदू-मुसलमान की जय. गांधी ने कहा था कि इन तीन नारों को क्रमबद्ध तरीके से लगाने में किसी को समस्या नहीं होनी चाहिए. हालांकि यंग इंडिया के एक-दूसरे पत्र में महात्मा गांधी ने लिखा है कि किसी पर भी कोई नारा थोपा नहीं जाना चाहिए.
सामाजिक एकता पर था महात्मा गांधी का जोर
गांधी लिखते हैं कि अल्लाह हो अकबर का नारा लगाने में किसी को परेशानी नहीं होनी चाहिए क्योंकि इसका मतलब है कि ईश्वर महान है. गांधी की अपील पर स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान हजारों हिंदुओं ने वंदे मातरम् और अल्लाह हो अकबर का नारा एक साथ लगाया. गांधी का यह भी कहना था कि बिना हिंदू मुसलमान की जय का नारा लगाए भारत माता की जय का नारा अधूरा है. यानी अगर आप भारत माता की जय का नारा लगाते हैं, तो आपको हिंदू मुसलमान की जय का नारा भी लगाना चाहिए. महात्मा गांधी ने हमेशा विचारों की बहुलता और सामाजिक एकता पर जोर दिया न कि किसी एक नारे पर उनका जोर था.
हिसार में जो कुछ हुआ, उससे न तो सामाजिक एकता मजबूत होती है, न ही किसी की राष्ट्रभक्ति साबित होती है.