शुक्रवार, 15 जनवरी, 2009 को नई दिल्ली में सदी के सबसे बड़े सूर्यग्रहण का मनोहर दृश्य.
ऐसा सूर्य ग्रहण करीब 747 साल पहले लगा था और 23 दिसंबर 3043 को इस तरह का सूर्य ग्रहण लगेगा.
सूर्यग्रहण की शुरुआत अफ्रीका के केन्या के पास भारतीय समय के मुताबिक सुबह 9 बजकर 35 मिनट 24 सेकेंड पर हुई. शुरू में यह आंशिक नजर आया. भारतीय समय के मुताबिक सुबह 10 बजकर 47 मिनट पर वलयाकार ग्रहण देखा जाना शुरू हुआ.
हमारी पौराणिक मान्यता के अनुसार पहला सूर्य ग्रहण उस समय हुआ था जब देवताओं और राक्षसों ने अमृत पाने के लिए समुद्र मंथन किया था. रामायण के अरण्य कांड में इस बात का उल्लेख है कि खर और दूषण को भगवान राम ने जब मौत के घाट उतारा था उस समय सूर्य ग्रहण था.
अगला लंबा सूर्यग्रहण 2114 ई. में होगा, इस ग्रहण के पूर्व 11 अगस्त 1999 को पूर्ण सूर्यग्रहण हुआ था. अगला पूर्ण सूर्यग्रहण 20 मार्च 2034 को होगा परंतु उसकी अवधि कम रहेगी तथा यह जम्मू काश्मीर के उत्तरी भाग में ही दिखाई देगा.
15 जनवरी के सूर्य ग्रहण के अलावा इस साल तीन ग्रहण और पड़ेंगे. उन्होंने कहा कि 26 जून को आंशिक चंद्र ग्रहण होगा, जिसके बाद 11 जुलाई को पूर्ण सूर्य ग्रहण पड़ेगा. हालांकि ये भारत में नहीं देखे जा सकेंगे.
इस सूर्यग्रहण के दौरान देश भर में मंदिरों के कपाट बंद रहे.
ग्रहण शुरू होने से करीब 12 घंटे पहले ही सूतक लग जाता है. माना जाता है कि सूतक में न तो कोई शुभ काम किया जाता है और ना ही मंदिरों में पूजा पाठ. सूतक लगने के साथ ही मंदिरों के कपाट बंद कर दिये जाते हैं, ताकि ग्रहण देवी देवताओं की मूर्तियों को ग्रहण के वक्त ग्रह योगों से होने वाले बुरे असर से बचाया जा सके.
लाखों लोगों ने इस सूर्य ग्रहण के नजारे को देखा और अपनी यादों तथा कैमरे में कैद भी किया.