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भारत

देवी के नौ रूपों की साधना का महापर्व है नवरात्र

देवी के नौ रूपों की साधना का महापर्व है नवरात्र
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मां दुर्गा की पूजा-आराधना के महापर्व नवरात्र की शुरुआत हो चुकी है. नौ दिनों तक देवी ने नौ रूपों की पूजा की जाती है. नवरात्र को लेकर देशभर में उत्साह है. आख‍िर सबको माता की कृपा चाहिए. ऐसे में नवरात्र से जुड़ी कुछ सामान्य बातें यहां बताई जा रही हैं...
देवी के नौ रूपों की साधना का महापर्व है नवरात्र
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महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती- ये तीनों देवियां क्रमश: महादेव, विष्णु और ब्रह्मा की शक्तियों के रूप में संसार में जानी जाती हैं. इन तीन देवियों के भी तीन-तीन स्वरूप हैं. नवरात्र में दुर्गा के इन्हीं 9 रूपों की पूजा की जाती है.
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1. शैलपुत्री
शैलपुत्री मां दुर्गा का पहला रूप है. नवरात्र के पहले दिन इन्हीं की पूजा की जाती है. पर्वतराज हिमालय के यहां जन्म होने से इन्हें 'शैलपुत्री' कहा जाता है. मां शैलपुत्री भक्तों को अन्न-धन से परिपूर्ण रखती हैं. इस दिन माता को गाय का घी अर्पित करना चाहिए. इससे आरोग्य की प्राप्त‍ि होती है.
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2.ब्रह्मचारिणी
मां दुर्गा का दूसरा रूप ब्रह्मचारिणी है. नवरात्र के दूसरे दिन दुर्गा के इसी रूप की पूजा की जाती है. इनकी उपासना से संयम व वैराग्य की भावना पुष्ट होती है. इस दिन प्रसाद के तौर पर शक्कर चढ़ाने का विशेष विधान है. इससे आयु में वृद्धि होती है.
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3. चंद्रघंटा
माता का तीसरा स्वरूप चंद्रघंटा है. इनकी आराधना तृतीया को की जाती है. माता भक्तों को सभी तरह के पापों से मुक्त करती हैं. इनकी पूजा से बल में बढ़ोतरी होती है. स्वर में दिव्य अलौकिक मधुरता आती है. इस दिन गाय के दूध का प्रसाद चढ़ाने का विधान है. इससे दुखों से मुक्ति मिलती है.
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4. कुष्मांडा
माता का चौथा स्वरूप है कुष्मांडा. नवरात्र के चौथे दिन माता कुष्मांडा की आराधना की जाती है. इनकी उपासना से भक्तों को सभी सिद्धियां व निधियां मिलती हैं. लोग नीरोग होते हैं और आयु व यश में बढ़ोतरी होती है. इस दिन माता को मालपुआ का प्रसाद चढ़ाना चाहिए. इससे बुद्धि का विकास होता है.
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5. स्कंदमाता
देवी दुर्गा का पांचवां स्वरूप है स्कंदमाता. नवरात्र के पांचवें दिन स्कंदमाता की पूजा की जाती है. माता भक्तों की सभी इच्छाएं पूरी करती हैं और मोक्ष दिलाती हैं. इस दिन माता को प्रसाद के रूप में केला चढ़ाना चाहिए. इससे शरीर स्वस्थ रहता है.
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6. कात्यायनी
माता का छठा रूप है कात्यायनी. इनकी पूजा से शरीर में अद्भुत शक्ति का संचार होता है. कात्यायनी भक्तों को दुश्मनों का संहार करने में सक्षम बनाती हैं. षष्ठी को शहद चढ़ाने से आकर्षण प्राप्त होता है.
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7. कालरात्रि
देवी का सातवां रूप है कालरात्रि. सप्तमी को मां कालरात्रि की आराधना का विधान है. इनकी पूजा से सभी पापों से मुक्ति मिलती है व दुश्मनों का नाश होता है. सप्तमी को गुड़ चढ़ाने से शोक से मुक्ति मिलती है.
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8. महागौरी
देवी का आठवां रूप है महागौरी. अष्टमी के दिन माता के इसी रूप के पूजन का विधान है. महागौरी की पूजा से भक्तों के समस्त पापों का नाश होता है क्रांति बढ़ती है. सुख में वृद्धि होती है. अष्टमी को नारियल चढ़ाने से संतान की कामना रखने वालों की यह इच्छा पूरी होती है.
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9. सिद्धिदात्री
मां सिद्धिदात्री की आराधना नवरात्रि की नवमी के दिन किया जाता है. इनकी आराधना से भक्तों को हर तरह की सिद्धि व निधियों की प्राप्ति होती है. नवमी को काला तिल चढ़ाने का विधान है. इससे भक्तों को मृत्यु का भय नहीं सताता है. 
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कुल मिलाकर, महाकाली के रूप में मां दुर्गा की आराधना समस्त कष्टों और पापों से मुक्ति प्रदान कराती है. महालक्ष्मी के रूप में दुर्गा की आराधना धन, एश्वर्य और कीर्ति प्रदान कराती हैं. महासरस्वती के रूप में मां दुर्गा की आराधना भक्ति, ज्ञान, व मुक्ति प्रदान कराती है.
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दुर्गापूजा के दौरान प्रतिमाओं के जरिए यह दिखाया जाता है कि मां दुर्गा महिषासुर का वध कर रही हैं. दरअसल मनुष्य के शरीर व मन में काम, क्रोध, लोभ, मोह जैसे कई शत्रुओं का निवास है. जरूरत है अपने अंदर छ‍िपे इन शत्रुओं का नाश करने की. 
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नवरात्र में कन्याओं को देवी की तरह सजाया-संवारा जाता है. कन्याओं के पूजन के जरिए नारी शक्त‍ि के सम्मान देने का भाव होता है.
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दुर्गापूजा के दौरान इस तरह की सजावट भक्तों की रग-रग में उत्साह व स्फूर्ति भर देती है.
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दुर्गापूजा के दौरान प्रतिमाओं के आसपास तरह-तरह के भव्य पांडाल और तोरण द्वार बनाए जाते हैं, जिस पर हर कोई मुग्ध हो जाता है.
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बिजली की अनोखी सजावट हर किसी का मन मोह लेती है.
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पश्च‍िम बंगाल में इस तरह की सजावट पूजा की भव्यता में चार चांद लगा देती है.
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