केंद्र सरकार ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) से विस्थापित होकर भारत के
विभिन्न राज्यों में आकर बसे 5300 परिवारों को राहत पहुंचाई है. अब इन
परिवारों को केंद्र की ओर से साढ़े 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी.
ये वो परिवार हैं जिनका नाम विस्थापितों की भी सूची में
शामिल नहीं था.
1947, 1965 और 1971 के दौरान पाक अधिकृत कश्मीर से आकर जम्मू-कश्मीर में बसे लोगों को पीओके विस्थापितों की श्रेणी में रखा गया है लेकिन उसमें इन 5300 परिवारों का नाम शामिल नहीं था. अब मोदी सरकार इन परिवारों को भी विस्थापितों की सूची में शामिल कर आर्थिक मदद देगी.
अक्टूबर 1948 में जब पाकिस्तान की मदद से कबाइलियों ने हमला किया और कश्मीर का भारत में विलय हुआ तो पुंछ, मुजफ्फराबाद और मीरपुर (वर्तमान में पाक अधिकृत कश्मीर) से तमाम कश्मीरी अपना घर छोड़कर जम्मू-कश्मीर के अन्य जिलों में बस गए. लेकिन इनमें से 5300 परिवार ऐसे थे जो जम्मू-कश्मीर में नहीं बसकर भारत के दूसरे प्रांतों में चले गए और कुछ समय बाद वे फिर से जम्मू-कश्मीर लौटे. इनमें से ज्यादातर लोग हिंदू समुदाय के हैं.
2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विस्थापितों के लिए जो 5.5 लाख रुपए की सहायता राशि देने का ऐलान किया था, उसमें ये 5300 परिवार शामिल नहीं हो पाए थे. वे जम्मू-कश्मीर से बाहर के प्रांतों में रह रहे थे इसलिए उनका नाम विस्थापितों की सूची में नहीं था. अब सरकार इन परिवारों को भी पुनर्वास के लिए आर्थिक मदद मुहैया कराएगी.
इन्हें जम्मू-कश्मीर का स्थायी निवासी नहीं माना जाता है. इसके अलावा, इन्हें राज्य में संपत्ति खरीदने और राज्य की नौकरियों के लिए आवेदन करने का अधिकार भी हासिल नहीं है. हालांकि, इन्हें सांसद चुनने का अधिकार है.
बता दें कि जम्मू-कश्मीर सरकार और वहां की विधानसभा को स्थायी निवासी की
परिभाषा तय करने का अधिकार हासिल है. इसका मतलब है कि राज्य सरकार को ये तय
करने का अधिकार है कि वह आजादी के वक्त दूसरी जगहों से आए शरणार्थियों और
अन्य भारतीय नागरिकों को जम्मू-कश्मीर में किस तरह की सहूलियतें व अधिकार दे या
नहीं दे.