हिंद महासागर में जिबूती बेस के जरिये ताकत बढ़ा रहे चीन को भारत ने करारा जवाब दिया है. भारत ने सेशल्स के साथ करार किया है कि वह एजम्प्शन आइलैंड में नेवल बेस बनाएगा. इससे भारत को हिंद महासागर क्षेत्र में युद्ध नीतिक लाभ मिलेगा.
सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सेशल्स के राष्ट्रपति डैनी फॉर के बीच बातचीत के बाद दोनों देशों के बीच यह सहमति बनी. नेवल बेस को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हम एक-दूसरे के अधिकारों का ध्यान रखते हुए एजम्प्शन आइलैंड परियोजना पर काम करेंगे.
उन्होंने कहा कि भारत और सेशल्स प्रमुख सामरिक सहयोगी हैं. इसलिए भारत ने सेशल्स को रक्षा क्षमता बढ़ाने के लिए करोड़ डॉलर (लगभग 680 करोड़ रुपये) कर्ज देने का भी ऐलान किया है.
बता दें कि दोनों देशों के बीच 2015 में समझौता हुआ था कि वे संयुक्त रूप से इस द्वीप को सुरक्षा के लिए इस्तेमाल करेंगे. लेकिन इस समझौते पर बात तब बिगड़ी जब सेशल्स में विपक्ष के विरोध के चलते इस पर काम आगे नहीं बढ़ाया.
उस वक्त कहा गया कि चीन के दबाव के चलते सेशल्स ने यह कदम उठाया है. लेकिन भारत ने सेशल्स के राष्ट्रपति डैनी फॉर को भारत बुलाकर हारी बाजी को पलटा और नेवल बेस बनाने के लिए समझौता किया.
जानकारों की माने तो सेशल्स को एजम्प्शन आइलैंड में नेवल बेस बनाने के लिए तैयार करना मोदी सरकार की बड़ी कूटनीतिक कामयाबी मानी जा रही है. क्योंकि कुछ ही दिन पहले डैनी फॉर ने कह दिया था कि जब वह भारत जाएंगे तो पीएम मोदी के साथ एजम्प्शन आइलैंड परियोजना पर कोई बात नहीं करेंगे.
उस वक्त फॉर ने कहा था कि इस इलाके में हमारा अपना सैन्य अड्डा होना बहुत जरूरी है. हम अगले साल अपने पैसे से खुद सैन्य अड्डे का निर्माण करेंगे. उस समय इसे भारत की हार और चीन की जीत के रूप में देखा गया था. लेकिन, भारतीय कूटनीतिज्ञों ने हारी बाजी को पलटकर चीन की चिंता बढ़ा दी है.
इस समझौते से भारत को कई फायदे होंगे. हिंद महासागर में जहां भारत का दबदबा बढ़ेगा वहीं आयात-निर्यात एक सेफ जोन होगा. इसके अलावा टूरिज्म, फिशरीज और एग्री बिजनेस बढ़ाने में भारत को मदद मिलेगी. वर्तमान में सेशल्स में यूरोपियन और मिडल ईस्ट के देशों का दबदबा है, लेकिन भारत से हुए समझौते भारतीय व्यापारियों को पैर जमाने में मदद करेगा.