डॉ. राजेंद्र प्रसाद देश के पहले राष्ट्रपति थे. उन्होंने 12 साल तक इस पद का कार्यभार संभाला. 26 जनवरी 1950 से लेकर 13 मई 1962 तक वे राष्ट्रपति भवन में रहे. आपको बता दें कि राजेंद्र प्रसाद बिहार से थे. वे स्वतंत्रता सेनानी भी थे. वे देश के एकमात्र राष्ट्रपति थे जो कि दो बार (1952 और 1957) राष्ट्रपति बने. वे भारतीय स्वाधीनता आंदोलन के प्रमुख नेताओं में से थे जिन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में प्रमुख भूमिका निभाई. उन्होंने भारतीय संविधान के निर्माण में भी अपना योगदान दिया था जिसकी परिणति 26 जनवरी 1950 को भारत के एक गणतंत्र के रूप में हुई थी. राष्ट्रपति होने के अतिरिक्त उन्होंने स्वाधीन भारत में केन्द्रीय मन्त्री के रूप में भी कुछ समय के लिए काम किया था. पूरे देश में अत्यन्त लोकप्रिय होने के कारण उन्हें राजेन्द्र बाबू या देशरत्न कहकर पुकारा जाता था.
डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन भारत के पहले उपराष्ट्रपति (1952-1962) और दूसरे राष्ट्रपति थे. वे भारतीय संस्कृति के संवाहक, प्रख्यात शिक्षाविद, महान दार्शनिक और एक आस्थावान हिन्दू विचारक थे. उनके इन्हीं गुणों के कारण सन् 1954 में भारत सरकार ने उन्हें सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से अलंकृत किया था. उनका जन्मदिन (५ सितम्बर) भारत में शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म दक्षिण भारत के तिरुत्तनि स्थान में हुआ था जो चेन्नई से 64 किमी उत्तर-पूर्व में है. राजनीति में आने से पूर्व उन्होंने अपने जीवन के महत्वपूर्ण 40 वर्ष शिक्षक के रूप में व्यतीत किये थे.
डॉ. जाकिर हुसैन भारत के तीसरे राष्ट्रपति थे जिनका कार्यकाल 13 मई 1967 से 3 मई 1969 तक था. डॉ. जाकिर हुसैन का जन्म 8 फरवरी, 1897 ई. में हैदराबाद, आंध्र प्रदेश के धनाढ्य पठान परिवार में हुआ था. जहां से कुछ समय बाद इनके पिता उत्तर प्रदेश में रहने आ गये थे. हुसैन केवल 23 वर्ष की अवस्था में वे 'जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय' की स्थापना दल के सदस्य बने. 1920 में उन्होंने जामिया मिलिया इस्लामिया की स्थापना में योगदान दिया और इसके उपकुलपति बने. स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात वे अलीगढ़ विश्वविद्यालय के उपकुलपति बने तथा उनकी अध्यक्षता में 'विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग' भी गठित किया गया. इसके अलावा वे भारतीय प्रेस आयोग, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, यूनेस्को, अन्तर्राष्ट्रीय शिक्षा सेवा तथा केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से भी जुड़े रहे. 1962 ई. में वे भारत के उपराष्ट्रपति बने. उन्हें वर्ष 1963 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया. 1969 में असमय देहावसान के कारण वे अपना राष्ट्रपति कार्यकाल पूरा नहीं कर सके. जिसके बाद वी.वी. गिरि कार्यवाहक राष्ट्रपति बने.
वराहगिरि वेंकट गिरी (वी.वी. गिरी) देश के चौथे राष्ट्रपति थे. गिरि एकमात्र व्यक्ति थे जो कार्यवाहक राष्ट्रपति और राष्ट्रपति दोनों बने. वे भारत रत्न से सम्मानित हो चुके थे. गिरी ने राष्ट्रपति की कुर्सी 24 अगस्त 1969 से 24 अगस्त 1974 तक संभाली. वे भारत के श्रम मंत्री और सीलोन (श्रीलंका) में उच्चायुक्त की भी भूमिका निभा चुके हैं. गिरी का जन्म ब्रह्मपुर, ओड़िशा में हुआ था.
फखरुद्दीन अली अहमद देश के पांचवे राष्ट्रपति थे. लेकिन वे ऐसे दूसरे राष्ट्रपति थे जो अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सके. वे 24 अगस्त 1974 से लेकर 11 फरवरी 1977 तक इस पद पर रहे. डॉ. जाकिर हुसैन की तरह ही उनकी पदस्थ रहते हुए ही मृत्यु हो गई थी. 1977 में हृदयगति रुक जाने से अहमद का कार्यालय में निधन हो गया था. फखरुद्दीन अली अहमद राष्ट्रपति बनने से पूर्व मंत्री थे. अहमद का जन्म 13 मई 1905 को दिल्ली में हुआ था. उनके पिता कर्नल जलनूर अली थे. उनकी मां दिल्ली के लोहारी के नवाब की बेटी थीं. गोंडा में प्रारंभिक शिक्षा के बाद वे उच्च शिक्षा के लिए 1923 में इंग्लैंड गए. 1925 में नेहरू से इंग्लैंड में मुलाकात के बाद वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हो गए. उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया. 1974 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अहमद को राष्ट्रपति पद के लिए चुना और वे भारत के दूसरे मुस्लिम राष्ट्रपति बने. इंदिरा गांधी के कहने पर उन्होंने 1975 में अपने संवैधानिक अधिकार का इस्तेमाल करते हुए देश में आंतरिक आपातकाल की घोषणा की थी.
नीलम संजीव रेड्डी भारत के छठवें राष्ट्रपति थे. उनका कार्यकाल 25 जुलाई 1977 से 25 जुलाई 1982 तक रहा. आंध्र प्रदेश के किसान परिवार में जन्मे नीलम संजीव रेड्डी की छवि कवि, अनुभवी राजनेता एवं कुशल प्रशासक के रूप में थी. 1977 के आम चुनाव में जब इंदिरा गांधी की पराजय हुई, उस समय नव-गठित राजनीतिक दल जनता पार्टी ने इनको राष्ट्रपति पद का प्रत्याशी बनाया. वे भारत के पहले गैर कांग्रेसी राष्ट्रपति थे. वे अक्टूबर 1956 में आंध्र प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री बने और दुसरी बार फिर 1962 से 1964 तक यह पद संभाला. उन्होंने 1959 से 1962 तक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में भी काम किया.
ज्ञानी जैल सिंह भारत के सातवें राष्ट्रपति थे. उनका कार्यकाल 25 जुलाई 1982 से 25 जुलाई 1987 तक रहा. सिख धर्म के विद्वान पंजाब के मुख्यमंत्री रह चुके ज्ञानी जैल सिंह अपनी दृढ़ इच्छा शक्ति, सत्यनिष्ठा के राजनीतिक कठिन रास्तों को पार करते हुए 1982 में भारत के गौरवमयी राष्ट्रपति के पद पर आसीन हुए. 1987 तक के अपने कार्यकाल के दौरान इन्हें 'ब्लूस्टार आपरेशन' एवं इंदिरा गांधी की हत्या जैसी दुर्भाग्यपूर्ण परिस्थितियों से गुजरना पड़ा. मार्च 1972 में उन्होंने पंजाब के मुख्यमंत्री का पद संभाला था. 1980 में वे केंद्रीय गृह मंत्री भी बने.
रामास्वामी वेंकटरमण भारत के आठवें राष्ट्रपति थे. वे 25 जुलाई 1987 से 25 जुलाई 1992 तक इस पद पर रहे. राष्ट्रपति बनने के पहले वे 4 सालों तक भारत के उपराष्ट्रपति भी रहे. वेंकटरमण 1942 में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम आन्दोलन के दौरान जेल भी गए. जेल से छुटने के बाद वे कांग्रेस पार्टी के सांसद रहे. इसके अलावा वे भारत के वित्त एवं औद्योगिक मंत्री और रक्षा मंत्री भी रहे. वेंकटरमन का जन्म 4 दिसंबर 1910 को तमिलनाडु में तंजौर के निकट पट्टुकोट्टय में हुआ था.
डॉ. शंकरदयाल शर्मा भारत के नवें राष्ट्रपति थे. इनका कार्यकाल 25 जुलाई 1992 से 25 जुलाई 1997 तक रहा. राष्ट्रपति बनने से पूर्व वे भारत के आठवें उपराष्ट्रपति भी थे. शर्मा मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री और भारत के संचार मंत्री रह चुके थे. इसके अलावा वे आंध्र प्रदेश, पंजाब और महाराष्ट्र के राज्यपाल भी थे.
के. आर. नारायणन भारत के दसवें राष्ट्रपति थे. इनका कार्यकाल 25 जुलाई 1997 से 25 जुलाई 2002 तक रहा. केरल में जन्मे नारायणन का पूरा नाम कोच्चेरी रामण नारायणन था. इन्होंने त्रावणकोर विश्वविद्यालय से अंग्रेजी में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त करने के बाद लंदन स्कूल ऑफ इकोनोमिक्स में अर्थशास्त्र का अध्ययन किया. नारायणन की गिनती भारत के कुशल राजनीतिज्ञों में की जाती है. उनका कार्यकाल भारत की राजनीति में गुजरने वाली विभिन्न अस्थिर परिस्थितियों के कारण अत्यंत पेचीदा रहा. नारायणन चीन, तुर्की, थाईलैंड और संयुक्त राज्य अमेरिका में भारत के राजदूत रह चुके थे. उन्होंने विज्ञान और कानून में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की थी. वे जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय के कुलपति भी रह चुके हैं.
ए. पी. जे. अब्दुल कलाम भारत के ग्यारहवें राष्ट्रपति थे. इनका कार्यकाल 25 जुलाई 2002 से 25 जुलाई 2007 तक रहा. इनका पूरा नाम अबुल पकिर जैनुलाअबदीन अब्दुल कलाम था. इनको मिसाइल मैन और जनता के राष्ट्रपति के नाम से भी जाना जाता है. इन्होंने मुख्य रूप से एक वैज्ञानिक और विज्ञान के व्यवस्थापक के रूप में चार दशकों तक रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) संभाला व भारत के नागरिक अंतरिक्ष कार्यक्रम और सैन्य मिसाइल के विकास के प्रयासों में भी शामिल रहे. इन्हें बैलेस्टिक मिसाइल और प्रक्षेपण यान प्रौद्योगिकी के विकास के कार्यों के लिए भारत में मिसाइल मैन के रूप में जाना जाने लगा. इन्होंने 1974 में भारत द्वारा पहले मूल परमाणु परीक्षण के बाद से दूसरी बार 1998 में भारत के पोखरान-द्वितीय परमाणु परीक्षण में एक निर्णायक, संगठनात्मक, तकनीकी और राजनैतिक भूमिका निभाई. कलाम को सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और विपक्षी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस दोनों का समर्थन प्राप्त था. इन्होंने भारत रत्न, भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान सहित कई प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त किये.
प्रतिभा देवीसिंह पाटिल भारत की 12वीं राष्ट्रपति रहीं. इसके साथ ही वे स्वतन्त्र भारत के इतिहास में पहली महिला राष्ट्रपति भी थीं. उनका कार्यकाल 25 जुलाई 2007 से 25 जुलाई 2012 तक रहा. राष्ट्रपति चुनाव में प्रतिभा पाटिल ने अपने प्रतिद्वंदी भैरोंसिंह शेखावत को तीन लाख से ज्यादा मतों से हराया था. प्रतिभा पाटिल को 6,38,116 मूल्य के मत मिले, जबकि भैरोंसिंह शेखावत को 3,31,306 मत मिले थे. महाराष्ट्र के जलगांव जिले में जन्मी प्रतिभा के पिता का नाम श्री नारायणराव पाटिल था. साड़ी और बड़ी सी बिंदी लगाने वाली यह साधारण पहनावे वाली महिला राजनीति में आने से पहले सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में कार्य कर रही थी. वे टेबल टेनिस की अच्छी खिलाड़ी थीं तथा उन्होंने कई अन्तर्विद्यालयी प्रतियोगिताओं में विजय प्राप्त की. 1962 में वे एम जे कॉलेज में कॉलेज क्वीन चुनी गईं. उनका विवाह शिक्षाविद देवीसिंह रणसिंह शेखावत के साथ 7 जुलाई, 1965 को हुआ था. शेखावत के पूर्वज राजस्थान के सीकर जिले के थे और बाद में जलगांव महाराष्ट्र जाकर बस गये थे.
प्रणब मुखर्जी भारत के 13वें राष्ट्रपति हैं. उनका कार्यकाल 25 जुलाई 2012 से 25 जुलाई 2017 तक है. इनके कार्यकाल के खत्म होते ही रामनाथ कोविंद राष्ट्रपति की कुर्सी संभाल लेंगे. प्रणब मुखर्जी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे हैं. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन ने उन्हें अपना उम्मीदवार घोषित किया. सीधे मुकाबले में उन्होंने अपने प्रतिपक्षी प्रत्याशी पी.ए. संगमा को हराया था. मुखर्जी का जन्म पश्चिम बंगाल के वीरभूम जिले में किरनाहर शहर के निकट स्थित मिराती गांव के एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था. मुखर्जी का संसदीय करियर करीब पांच दशक पुराना है जो 1969 में कांग्रेस पार्टी के राज्यसभा सदस्य के रूप में (उच्च सदन) से शुरू हुआ था. वे 1975, 1981, 1993 और 1999 में फिर से चुने गये थे. 1973 में वे औद्योगिक विकास विभाग के केंद्रीय उप मन्त्री के रूप में मन्त्रिमण्डल में शामिल हुए थे. वे सन 1982 से 1984 तक कई कैबिनेट पदों के लिए चुने जाते रहे और और सन् 1984 में भारत के वित्त मंत्री बने. उन्होंने राव के मंत्रिमंडल में 1995 से 1996 तक पहली बार विदेश मन्त्री के रूप में कार्य किया. 1997 में उन्हें उत्कृष्ट सांसद चुना गया.
राष्ट्रपति चुनाव में एनडीए उम्मीदवार रामनाथ कोविंद की जीत हुई है. कोविंद को यूपीए उम्मीदवार मीरा कुमार से करीब दोगुने वोट मिले हैं. वैसे तो कोविंद की जीत शुरू से ही पक्की मानी जा रही थी, लेकिन अब ये तय हो गया है कि कोविंद ही देश के 14वें राष्ट्रपति होंगे. रामनाथ कोविंद 25 जुलाई 2017 को पद एवं गोपनीयता की शपथ लेंगे. चुनाव में उनको कुल वोट 10,98903 में से 702044 मिले हैं जबकि मीरा कुमार को 367314 वोट मिले. राष्ट्रपति बनने के लिए कोविंद को 5,52,243 वोट चाहिए थे. रामनाथ कोविंद 2015 से राष्ट्रपति उम्मीदवार चुने जाने तक बिहार के राज्यपाल का पद संभाल रहे थे. कोविंद 1994 से 2006 तक लगातार सांसद रहे. कोविंद संघ और बीजेपी से जुड़े रहे हैं.