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विदर्भ: महिला किसानों की खुदकुशी का नहीं दिखता रिकॉर्ड

23 साल पहले पति की मौत के बाद भी रुखमाबाई राठोड़ ने हार नहीं मानीं. उन्होंने पूरे परिवार का भार अपने कंधों पर उठा लिया. छह एकड़ के खेत में अकेले काम शुरू कर दिया. वह अशिक्षित थीं, लेकिन इरादे मजबूत थे.

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23 साल पहले पति की मौत के बाद भी रुखमाबाई राठौड़ ने हार नहीं मानीं. उन्होंने पूरे परिवार का भार अपने कंधों पर उठा लिया. छह एकड़ के खेत में अकेले काम शुरू कर दिया. वह अशिक्षित थीं, लेकिन इरादे मजबूत थे.

बच्चों की परवरिश के साथ ही खेतीबाड़ी भी अच्छी होने लगी. लेकिन इस साल तीन लाख रुपये के कर्ज के बोझ ने उन्हें तोड़ दिया; और उन्होंने भी विदर्भ के पुरुष किसानों की तरह खुदकुशी कर ली.

उनका नाम 'किसान खुदकुशी' लिस्ट में दर्ज कर लिया गया, क्योंकि खेती उनके नाम थी. अब उनका परिवार सरकारी मुआवजा पाने का हकदार है.

देश में सबसे अधिक किसानों की खुदकुशी के मामले विदर्भ में सामने आते हैं. इसमें पुरुषों के साथ महिलाओं की संख्या भी कम नहीं है. लेकिन बहुत कम महिलाएं रुखमाबाई की तरह खुशकिस्मत होती हैं. बहुत कम महिला किसानों की खुदकुशी का रिकॉर्ड होता है.

विदर्भ जन आंदोलन समिति के कार्यकर्ता किशोर तिवारी के मुताबिक, 'महिला किसानों की खुदकुशी के मामलों को सरकारी या मीडिया रिकॉर्ड में जगह नहीं मिल पाती. क्योंकि अधिकतर महिलाएं या तो भूमिहीन होती हैं या फिर जमीन उनके नाम नहीं होती है.'

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो द्वारा महाराष्ट्र में महिला किसानों की खुदकुशी के 126 मामले दर्ज हैं. वहीं, पुरुष किसानों के 3020 मामले दर्ज हो चुके हैं. महिला किसानों की खुदकुशी के अधिकतर मामलों को दहेज हत्या या दुर्घटना के रूप में दर्ज कर दिया जाता है.
 
2011 की जनगणना के मुताबिक, महाराष्ट्र में पति की मौत के बाद 16.46 लाख महिलाएं घर की जिम्मेदारी संभालती हैं। पुरुष किसानों की खुदकुशी के बढ़ते मामले उनकी विधवाओं पर दोहरी जिम्मेदारी का बोझ डाल रहे हैं. उन्हें एक तरफ घर संभालना होता है, तो दूसरी ओर खेतीबाड़ी भी करनी पड़ती है.

मजबूत इरादों वाली महिला थीं रुखमाबाई
विदर्भ के अकोला के कजादेश्वर गांव की रहने वाली रुखमाबाई मजबूत इरादों वाली महिला थीं. उनके जेठ बाबू लाल बताते हैं कि वह भले ही पढ़ी-लिखी नहीं थीं, लेकिन समझदार थीं.

पति की मौत के बाद हमें लगा कि वह परिस्थिति को नहीं संभाल पाएंगी, लेकिन उन्होंने हमें गलत साबित कर दिया. बिना किसी की मदद के उन्होंने अपने तीन बच्चों की शादी की.

23 साल तक जिम्मेदारियां निभाते हुए, इस साल मार्च में हिम्मत हार गईं. खेती के लिए तीन लाख रुपये के कर्ज की वजह से उन्होंने कीटनाशक पीकर खुदकुशी कर लीं.

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