पुणे पोर्श कार हादसे को लेकर कोर्ट में सुनवाई हुई. इस दौरान पुलिस ने नाबालिग आरोपी के पिता विशाल अग्रवाल की हिरासत बढ़ाए जाने की मांग की. पुलिस ने कहा कि हमें नाबालिग आरोपी द्वारा कोज़ी बार में जिस अकाउंट से पेमेंट किया गया था, उसके बारे में जानकारी हासिल करना है. पुलिस ने कोर्ट में कहा कि आरोपी विशाल अग्रवाल के खिलाफ धोखाधड़ी की धारा 420 जोड़ी गई है. लग्जरी पोर्श कार ब्रह्मा लीजर के नाम पर खरीदी गई थी, इस मामले में ज्यादा जानकारी एकत्र करना है. इतना ही नहीं, पुलिस ने सीसीटीवी से छेड़छाड़ का संदेह भी जताया है. लिहाजा विशाल अग्रवाल की हिरासत बढ़ाई जाए. बता दें कि पुणे सेशन कोर्ट ने विशाल को 24 मई तक पुलिस हिरासत में भेजा था. अब पुलिस ने 7 दिन की हिरासत और बढ़ाने की मांग की.
कोर्ट में पुलिस ने कहा कि गंगाराम ड्राइवर है, वह मामले में मुख्य गवाह है और अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए उससे पूछताछ करने की जरूरत है, साथ ही बार के लाइसेंस और अन्य डॉक्यूमेंट्स की भी पड़ताल करना है. पुलिस ने कोर्ट में ये भी तर्क दिया कि नाबालिग आरोपी के मोबाइल फोन की जांच की गई, लेकिन अभी साइबर एनालिसिस किया जाना बाकी है.
कोर्ट में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि नाबालिग आरोपी के खिलाफ सिर्फ किशोर न्याय अधिनियम की धारा 77 के तहत मामला दर्ज किया गया है, इससे ज्यादा कुछ नहीं. नाबालिग के साथ एक ड्राइवर भी था. बचाव पक्ष के वकील का कहना है कि नाबालिग आरोपी के खिलाफ कोई मामला ही नहीं है, सिर्फ मीडिया ट्रायल चल रहा है. नाबालिग आरोपी के मौलिक अधिकारों की रक्षा की जानी चाहिए.
बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि नाबालिग आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी के लिए आईपीसी की धारा 420 जोड़ दी है, जिसमें कहा गया है कि नाबालिग आरोपी ने धोखाधड़ी की है और यातायात विभाग को धोखा दिया है, क्योंकि उसने पंजीकरण के लिए 1758 रुपये का भुगतान नहीं किया था. सवाल ये है कि जब xyz राशि की कार खरीदी गई है तो वह पंजीकरण के लिए उक्त राशि का भुगतान क्यों नहीं करेगा. बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि मीडिया में हंगामा हो रहा है, इसका मतलब ये नहीं है कि आरोपी को उसके मौलिक अधिकार नहीं मिलने चाहिए.