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HDIL के फायदे के लिए फर्जी खातों के जरिए RBI से कैसे छुपाया गया सच?

थॉमस ने राकेश और सारंग वधावन को कई मौकों पर कर्ज सीधे ट्रेजरी चेस्ट से जारी किए. इसके लिए तत्काल कोई एंट्री भी दर्ज नहीं की गई. कर्ज पहले ही जारी कर दिए गए जारी कर दिए गए और उनके लिए आवेदन बाद में आए.

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PMC बैंक घोटाला
PMC बैंक घोटाला

  • निजी बैंक की तरह PMC का इस्तेमाल कर रहे थे अभियुक्त राकेश और सारंग
  • EOW की चार्जशीट में खुलासा, 2011 में HDIL की ग्रुप कंपनियों के 44 बैंक खाते

देश के 6 राज्यों में 16 लाख खाताधारकों वाले महाराष्ट्र एंड पंजाब कोऑपरेटिव (PMC) बैंक को HDIL के प्रमोटर राकेश वधावन और सारंग वधावन निजी बैंक की तरह इस्तेमाल कर रहे थे. ये सब बैंक के शीर्ष अधिकारियों के साथ साठगांठ से हो रहा था. बैंक के तत्कालीन चेयरमैन वरायम सिंह और राकेश वधावन एक ही कालेज में साथ पढ़े. सत्तर के दशक से ही दोनों ने साथ काम करना शुरू किया.

वहीं पीएमसी बैंक के पूर्व प्रबंध निदेशक जॉय थॉमस ने अपने करियर की शुरुआत पीएमसी बैंक के साथ ही की. थॉमस का HDIL को लेकर खास झुकाव रहा. ये झुकाव इसलिए रहा क्योंकि थॉमस का मानना था कि जब बैंक के बैठ जाने का ख़तरा था तो HDIL ने बैंक की मदद की थी.

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EOW ने किए रिकॉर्ड के खुलासे

थॉमस ने राकेश और सारंग वधावन को कई मौकों पर कर्ज सीधे ट्रेजरी चेस्ट से जारी किए. इसके लिए तत्काल कोई एंट्री भी दर्ज नहीं की गई. कर्ज पहले ही जारी कर दिए गए जारी कर दिए गए और उनके लिए आवेदन बाद में आए. EOW ने ऐसे रिकॉर्ड पाए जिनमें कर्ज और ओवरड्राफ्ट सुविधा के लिए जो सिक्योरिटी ली गई वो दिए गए कर्ज से 50 फीसदी से भी कम थी.

EOW की चार्जशीट के मुताबिक 2011 में HDIL की ग्रुप कंपनियों के 44 बैंक खाते थे. उनकी ओर से कई कर्जों पर डिफॉल्ट करना शुरू हुआ लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. ये इसलिए हुआ क्योंकि बैंक अधिकारी खुद ही मदद कर रहे थे. EOW जांच में पाया गया कि किस तरह कर्ज NPAs में बदल गए. लेकिन इन्हें एडवांस मास्टर इंडेंट और ऑफसाइट सर्विलेंस (OSS) स्टेटमेंट्स की आड़ लेकर फर्जीवाड़े के जरिए आरबीआई से वर्ष 2014 से छुपाया जाता रहा.

चार्जशीट के मुताबिक पीएमसी बैंक के क्रेडिट डिपार्टमेंट की एक अधिकारी ने बताया कि आरबीआई को अनिवार्य रूप से दी जाने वाली ओएसएस स्टेटमेंट्स के लिए अतिरिक्त फर्जी खाते बनाए गए और जोड़े गए. ये इसलिए किया गया जिससे कि HDIL और ग्रुप कंपनियों के ऊपर लंबित मोटी रकम के बकायों को छुपाया जा सके. अधिकारी के मुताबिक ये खाते बैंक के शीर्ष अधिकारियों के कहने पर बनाए गए, जिनमे थॉमस भी शामिल थे. EOW ने 21, 049 फर्जी खातों की सत्यापित प्रतियां ज़ब्त की हैं.

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कैसे बनाए जाते थे फर्जी खाते?

पीएमसी बैंक अधिकारी थॉमस के आदेश पर संबंधित वित्त वर्ष में खोले/बंद किए गए चालू खातों की लिस्ट तैयार की जाती और इन्हें कोर बैंकिंग सिस्टम (सीबीएस) से निकाला जात. इसमें खाताधारी का नाम, खाते का नंबर, खाता खोलने की तारीख जैसी जानकारियां होतीं.

फिर असल नंबर को फर्जी खाता नंबर से बदल दिया जाता जो कभी कोर बैंकिंग सिस्टम में नहीं आता. इन्हें ऐसे दिखाया जाता कि ओवरड्राफ्ट वाली रकम फिक्स्ड डिपाजिट के आधार पर जारी की गई और ये बैंक की एक स्कीम के तहत किया गया. इसके बाद HDIL ग्रुप की कंपनियों की बकाया रकम (जो आरबीआई से छुपा कर रखी जाती) को इन नए फर्जी खातों में बांट कर दिखा दिया जाता.  

फर्जी खातों की जानकारी

मार्च 2015 : 2500 खाते बनाए गए :  33840553829.41 रुपये

मार्च 2016: 12500 खाते बनाए गए: 37950769564.16 रुपये

मार्च 2017: 17469 खाते बनाए गए: 44045227779.56 रुपये

Mrach 2018 : 21049 खाते बनाए गए: 50200518722.98 रुपये

अधिकतर खाते वो बनाए गए जो निष्क्रिय (डॉरमेंट) थे और जिनमें कोई ओवरड्राफ्ट पेंडिंग नहीं थी और बैलेंस शून्य था. HDIL का बकाया इनमें बांट दिया गया,

EOW चार्जशीट में कहा गया है कि बैंक के इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड्स से कई बार एंट्री हटाई गई और बदली गईं. ED मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल की भी चांज कर रही है. जांच में पाया गया कि पीएमसी से दिए गए कर्जों को अन्य वित्तीय संस्थानों के कर्ज चुकाने में किया गया.

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