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फैज अहमद फैज के बहाने संजय राउत का BJP पर निशाना, दिलाई अटल की याद

संजय राउत ने कहा है कि ये किस्सा 1977-78 का है. अटल बिहारी वाजपेयी विदेश मंत्री थे. वाजपेयी जी पाकिस्तान दौरे पर गए थे. उन्हें इस्लामाबाद में फैज से मिलना था. लेकिन पाक सरकार और भारत का उच्चायोग उन्हें इसकी अनुमति नहीं दे रहा था. बावजूद इसके वाजपेयी प्रोटोकॉल का बंधन तोड़कर उनसे मिलने गए.

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शिवसेना सांसद संजय राउत (फोटो-पीटीआई)
शिवसेना सांसद संजय राउत (फोटो-पीटीआई)

  • फैज की तारीफ में शिवसेना का सामना
  • 'फैज को सीमाओं में बांधा नहीं जा सकता'
  • जब फैज से मिलकर रोए अटल बिहारी

शिवसेना के मुखपत्र सामना में फैज अहमद फैज की तारीफ की गई है. शिवसेना के संपादकीय में लिखा गया है कि फैज अहमद पाकिस्तानी हुक्मरान के शत्रु सिद्ध हुए, लेकिन हिन्दुस्तान में भी बीजेपी ने उन्हें देशद्रोही ठहरा किया है. फैज ने जीते जी पाकिस्तानी हुक्मरान के सिंहासन को झकझोर दिया था, वे फांसी चढ़ते-चढ़ते बचे थे, हिन्दुस्तान में उनकी कविताओं को सूली पर चढ़ाने का धंधा चल रहा है.

फैज जैसे कवि सीमा में नहीं बंधते

सामना में लिखा गया है कि फैज जैसे कवि को देश की सीमाओं और धर्म की पाबंदियों में जकड़कर नहीं रखा जा सकता है. सामना के संपादक संजय राउत ने लिखा है कि आईआईटी कानपुर में फैज के गीत 'हम देखेंगे' की जांच करने के लिए जांच समिति गठन करना बेवकूफी भरा और हास्यास्पद है. शिवसेना ने कहा है कि देश का एक वर्ग अभिव्यक्ति पर रोक लगाकर तालिबानी संस्कृति के बीज डाल रहा है. ऐसे लोगों को भगवत् गीता भी समझ में नहीं आई थी.

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फैज से मिलकर रो पड़े थे वाजपेयी

संजय राउत ने लिखा है कि फैज के गीत का अर्थ समझने के बजाय बीजेपी के समर्थक उनका विरोध कर रहे हैं. इन्हीं फैज से मिलकर एक बार वाजपेयी की आंखों में आंसू आ गए थे. सामना में इस घटना का जिक्र भी किया गया है.

संजय राउत ने कहा है कि ये किस्सा 1977-78 का है. अटल बिहारी वाजपेयी विदेश मंत्री थे. वाजपेयी जी पाकिस्तान दौरे पर गए थे. उन्हें इस्लामाबाद में फैज से मिलना था. लेकिन पाक सरकार और भारत का उच्चायोग उन्हें इसकी अनुमति नहीं दे रहा था. बावजूद इसके वाजपेयी प्रोटोकॉल का बंधन तोड़कर उनसे मिलने गए. संजय राउत लिखते हैं, "वाजपेयी और फैज की विचारधारा दो ध्रुवीय थी, फिर भी दोनों मिले. एक दूसरे के गले मिले...अटल ने फैज का हाथ अपने हाथ में लेकर कहा- मैं सिर्फ एक शेर सुनने के लिए आपसे मिलना चाहता था. फैज ने पूछा- कौन सा शेर. अटल जी ने वो शेर सुनाया-

मकाम फैज कोई राह में

जचा ही नहीं

जो-कू-ए-चार से निकले

तो सू-ए-दार चले."

संजय राउत कहते हैं कि अटल जी के मुंह से अपना शेर सुनकर फैज भावुक हो गए. उन्होंने पूरी गजल अटल जी को सुनाई. इसके बाद अटल बिहारी वाजपेयी ने उन्हें भारत आने का न्योता दिया. 1981 में फैज भारत आए यहां अटल जी ने उनसे मुलाकात की.  

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संजय राउत ने कहा कि जिस 'लाजिम है...' पंक्ति पर हिंदुस्तान में घमासान मचा है वो गजल फैज ने 1979 में लिखी थी. फैज तब पाकिस्तान के मोटो गुमरी जेल में बंद थे. फैज के खिलाफ जो आरोप पत्र दाखिल किया गया था उसके मुताबिक ऐसा लगता था कि फैज को मौत की सजा दी जाएगी लेकिन फैज पर आरोप सिद्ध नहीं हुआ और वे छूट गए.

दीपिका से भी सहानुभूति

शिवसेना ने कहा है कि पाकिस्तान के हुक्मारानों ने फैज को जीते जी जेल में डाल दिया. हमारे यहां उन्हें कब्र से निकालकर हिन्दू विरोधी करार देकर फांसी पर लटकाएंगे. सामना के संपादकीय में अभिनेत्री दीपिका पादुकोण का भी जिक्र है. संजय राउत ने लिखा है कि दीपिका ने छात्रों से मूक संवेदना व्यक्त की, इसलिए दीपिका हिन्दुस्तान की क्रांति की शत्रु बन गई. भविष्य में उनका रास्ता मुश्किलों से भरा जाएगा. उनके विज्ञापनों पर रोक लगाई जा रही है.

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