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हफीज उल हसन बने हेमंत सरकार में मंत्री, मधुपुर विधानसभा सीट पर झामुमो की नजर

मधुपुर विधानसभा सीट पर 3 अप्रैल से पहले चुनाव संपन्न कराना जरूरी है. क्योंकि इस दिन मधुपुर सीट को खाली हुए 6 महीने हो जाएंगे. माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री ने बहुत सोच समझकर हफीज उल हसन के नाम पर मुहर लगाई है. 

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सीएम हेमंत सोरेन  (फाइल फोटो)
सीएम हेमंत सोरेन (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • मधुपुर विधानसभा सीट पर 3 अप्रैल से पहले चुनाव संपन्न कराना जरूरी
  • हेमंत सोरेन सरकार में मंत्री बने अंसारी

दिवंगत पूर्व मंत्री हाजी हुसैन अंसारी के बड़े बेटे हफीज उल हसन  मंत्री बन गए हैं. उन्होंने उर्दू भाषा में शपथ ली. राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें राजभवन के बिरसा मंडप में पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई. इस मौके पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन समेत तमाम मंत्री वहीं मौजूद थे.

पिछले साल 3 अक्टूबर को रांची के मेदांता अस्पताल में इलाज के दौरान पूर्व मंत्री हाजी हुसैन अंसारी का निधन हो गया था. तब से उनकी जगह किसी को भी मंत्री नहीं बनाया गया. इस दौरान कई अन्य विधायकों के दावेदारी की चर्चा होती रही लेकिन अंतिम मुहर हफीज उल हसन के नाम पर लगी.

बता दें कि मधुपुर विधानसभा सीट पर 3 अप्रैल से पहले चुनाव संपन्न कराना जरूरी है. क्योंकि इस दिन मधुपुर सीट को खाली हुए 6 महीने हो जाएंगे. माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री ने बहुत सोच समझकर हफीज उल हसन के नाम पर मुहर लगाई है. 

इससे पहले 2014 के विधानसभा चुनाव में मधुपुर सीट पर बीजेपी के राज पलिवार की जीत हुई थी और उन्हें तत्कालीन रघुवर सरकार में मंत्री भी बनाया गया था. लेकिन 2019 में हाजी हुसैन अंसारी ने उन्हें मात दे दी थी. जाहिर सी बात है कि यह सीट झामुमो के लिए बेहद अहम है.

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झामुमो का मानना है कि पिता के निधन पर सहानुभूति के साथ-साथ हफीज उल हसन के मंत्री बनने से पार्टी के प्रति जनता का विश्वास बढ़ेगा और उपचुनाव में यह सीट निकालने में मदद मिलेगी. 

इससे पहले बिना किसी सदन का प्रतिनिधित्व करते हुए शिबू सोरेन को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई गई थी लेकिन बाद में वह तमाड़ विधानसभा उपचुनाव हार गए थे.

मधु कोड़ा के कार्यकाल में पूर्व मंत्री भानु प्रताप शाही के जेल जाने पर उनके पिता हेमेंद्र प्रताप देहाती को उनकी जगह मंत्री बनाया गया था. 

 

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