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आतंकियों के निशाने पर SPOs, जानें पुलिस में क्या है इनका रोल

जम्मू और कश्मीर में एसपीओ की हत्या का सिलसिला जारी है. पुलिसकर्मियों की सहायता में लगा यह दस्ता घाटी में आतंकियों का सबसे आसान निशाना बनता जा रहा है, खासकर दक्षिण कश्मीर में. 

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फोटो एएनआई से
फोटो एएनआई से

जम्‍मू और कश्‍मीर के शोपियां में शुक्रवार को आतंकियों ने तीन पुलिसकर्मियों की हत्‍या कर दी. इस घटना के बाद पुलिस के चार स्पेशल पुलिस ऑफिसर्स (एसपीओ) ने अपने पद से इस्‍तीफा दे दिया. इस्तीफा देने वालों में कॉन्‍स्‍टेबल मोहम्‍मद इरशाद बाबा, उमर बशीर सहित अन्‍य दो एसपीओ के नाम हैं.

घटना शुक्रवार सुबह की है जिसमें हिज्बुल आतंकियों ने तीन पुलिसकर्मियों और एक पुलिसकर्मी के भाई को अगवा कर लिया था. इनमें से तीन पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी गई, जबकि पुलिसकर्मी के भाई को चेता कर छोड़ दिया. इस घटना के बाद एसपीओ अचानक सुर्खियों में आ गए हैं.

एसपीओ का गठन और काम

जम्मू और कश्मीर की पुलिस ने साल 1994-95 में एसपीओ दस्ता बनाया था. इस दस्ते का नाम एसपीओ या स्पेशल पुलिस ऑफिसर्स रखा गया. इन विशेष अधिकारियों के मानदेय को लेकर अक्सर सुर्खियां बनती रही हैं. एसपीओ भी मानते हैं कि इतनी कम सैलरी में उनका गुजारा मुश्किल है.

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शुरू में इन्हें 1500 रुपए प्रति महीना वेतन दिया जाता था. फिर इसे बढ़ाकर 3000 रुपए कर दिया गया. फिलहाल यह मानदेय छह हजार प्रति महीना है. जम्मू और कश्मीर में इस वक्त 31 हजार 474 एसपीओ काम कर रहे हैं.

मुखबीरी के कारण हमले?

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट यह भी बताती है कि तकरीबन 200 से 300 एसपीओ और पुलिस कांस्टेबल ऐसे हैं जो आतंकी संगठनों के लिए मुखबीर का काम करते हैं. हालांकि एसपीओ की नियुक्ति दहशतगर्दों के खिलाफ चलाए जाने वाले अभियानों के लिए होती है.

आतंकियों की मुखबीरी में एसपीओ की भूमिका तब पुष्ट होती नजर आई जब शोपियां के पूर्व एसएसपी शैलेंद्र मिश्रा के पीएसओ औरंगजेब और जावेद अहमद डार की आतंकियों ने हत्या कर दी.    

जम्मू-कश्मीर में एसपीओ दस्ता बनने के बाद से अब तक करीब पांच सौ एसपीओ चरमपंथी हमलों या चरमपंथियों के खिलाफ चलाए गए ऑपरेशंस में मारे गए हैं. एसपीओ को दूसरे कामों में भी लगाया जाता है.

आतंकी हमले में मारे गए एसपीओ का असर अन्य एसपीओ पर भी देखा जा रहा है. दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले में पिछले महीने लगभग एक दर्जन एसपीओ इस्तीफा दे चुके हैं. इस साल कम से कम 33 पुलिसकर्मी जिनमें 7 एसपीओ शामिल हैं, आतंकी हमलों में मारे जा चुके हैं. पिछले एक दशक में हत्या का यह सबसे बड़ा आंकड़ा है.

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कहां कितने एसपीओ

आंकड़े बताते हैं कि जम्मू और कश्मीर में 31, 474 एसपीओ तैनात हैं. बीते दो साल में 10,758 एसपीओ की नियुक्ति की गई है जिनमें 8992 कश्मीर जोन में तो 1,457 को जम्मू संभाग में लगाया गया है.

डीएनए की एक रिपोर्ट बताती है कि सबसे ज्यादा 1,392 एसपीओ कुपवाड़ा में लगाए गए हैं. इसके बाद 1,377 एसपीओ के साथ बारामुला दूसरे स्थान पर है. तीसरे स्थान पर श्रीनगर जिला है जहां 1,275 एसपीओ तैनात हैं. पिछले दो साल में दक्षिण कश्मीर के जिले अनंतनाग, कुलगाम, शोपियां और पुलवामा में 2,556 एसपीओ की तैनाती की गई है.  

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