
जम्मू-कश्मीर के बारामूला में स्थित 'डागर परिवार स्कूल' में पहला वार्षिक दिवस समारोह पूरे जोश के साथ मनाया गया. स्कूल को बारामूला में विशेष रूप से दिव्यांग बच्चों की जरूरतों को पूरा करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिसमें विभिन्न चिकित्सा स्थितियों वाले 66 बच्चे पढ़ाई करते हैं. इस मौके पर बच्चों ने परफॉर्मेंस भी दिया.
बारामूला जैसे रिमोट एरिया में दिव्यांग बच्चों के लिए चलाए जा रहे इस स्कूल को भारतीय सेना और इंद्राणी बालन फाउंडेशन की नेक पहल के रूप में देखा जा रहा है. पहले वार्षिक समारोह के मौके पर पुनीत बालन और जान्हवी धारीवाल बालन भी मौजूद रहे. दोनों ने दिव्यांग बच्चों का हौसला बढ़ाया. इस दौरान सेना के बड़े अफसर भी मौजूद रहे.
वीएसएम, जीओसी 19 इन्फैंट्री डिवीजन के मेजर जनरल अजय चांदपुरिया ने बच्चों के माता-पिता के साथ बातचीत की और स्थानीय आबादी के विकास के लिए भारतीय सेना के समर्थन की सराहना की. इस मौके पर डागर परिवार स्कूल के शिक्षकों को उनकी कड़ी मेहनत और छात्रों और स्कूल के प्रति समर्पण के लिए भी सम्मानित किया गया.

पुनीत बालन ने कहा कि हमारे देश में संगीत कला और इतिहास की विविध संस्कृति है और कश्मीरी संस्कृति इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, हमें यह देखकर खुशी होती है कि कैसे इन फरिश्तों ने अपने परफॉर्मेंस में आज देश की संपूर्ण समृद्ध संस्कृति का प्रदर्शन किया. इस दौरान सेना और स्थानीय प्रशासन के आला अफसर मौजूद थे.
गौरतलब है कि डागर परिवार स्कूल की शुरुआत भारतीय सेना और इंद्राणी बालन फाउंडेशन ने पिछले साल ही की थी. वैसे तो विशेष रूप से दिव्यांग बच्चों के लिए अक्टूबर 2017 से बारामूला डिवीजन द्वारा परिवार स्कूल चलाया जा रहा है. पुणे स्थित एनजीओ इंद्राणी बालन फाउंडेशन भी फरवरी 2021 में इस पहल का हिस्सा बन गया था.