scorecardresearch
 

गुड़गांव: गरीबों के प्लॉट बाबुओं को दिए गए, अब बेचकर कमा रहे मोटा मुनाफा

वे प्लॉट गरीबी रेखा से नीचे जिंदगी गुजार रहे लोगों के लिए थे. लेकिन उन्हें सरकारी कर्मचारियों और बैंककर्मियों को आवंटित किया गया और वे इन्हें प्रॉपर्टी डीलरों को बेचकर मोटा मुनाफा कमा रहे हैं.

वे प्लॉट गरीबी रेखा से नीचे जिंदगी गुजार रहे लोगों के लिए थे. लेकिन उन्हें सरकारी कर्मचारियों और बैंककर्मियों को आवंटित किया गया और वे इन्हें प्रॉपर्टी डीलरों को बेचकर मोटा मुनाफा कमा रहे हैं. हर किसी को घर मुहैया कराने का वादा बरसों से हवा में है, पर गरीब अब भी झुग्गियों में रह रहे हैं.

यह कहानी दिल्ली से ज्यादा दूर की नहीं है. हरियाणा के फारुखनगर में एक गांव है मुबारिकपुर. हरियाणा सरकार की 7 साल पुरानी महात्मा गांधी ग्रामीण बस्ती योजना के तहत यहां 100 स्क्वायर यार्ड के रेजिडेंशियल प्लॉट बीपीएल परिवारों को दिए जाने थे. यह जगह कुंडली-मानेसर-पलवल एक्सप्रेसवे से एक किलोमीटर की दूरी पर है. लेकिन अलग-अलग आरटीआई के जवाब में पता चला है कि ये प्लॉट एमसीडी के पुराने कर्मचारियों और पब्लिक सेक्टर के बैंककर्मियों को आवंटित कर दिए गए . अंग्रेजी अखबार 'द टाइम्स ऑफ इंडिया' ने यह खबर दी है.

4 लाख से ज्यादा सैलरी वालों को भी मिले मकान!
आरटीआई एक्टिविस्ट सुधीर यादव के मुताबिक, जिन लोगों को प्लॉट आवंटित किए गए उनमें कई लोग 4 लाख रुपये सालाना से ज्यादा सैलरी वाले हैं. सुधीर को इस गोरखधंधे के बारे में स्थानीय ग्रामीणों ने बताया था, जिसके बाद उन्होंने अलग-अलग विभागों में आरटीआई डालकर सच्चाई पता की.

हरियाणा सरकार की इस योजना के तहत गांवों में रह रहे करीब 7 लाख बीपीएल परिवारों को रेजिडेंशियल प्लॉट दिए जाने थे. ग्राम पंचायतों को यह जिम्मेदारी दी गई थी. अखबार में छपे आंकड़ों के मुताबिक 2011 में 94 और 2014 में 21 प्लॉट आवंटित किए गए. सुधीर का कहना है कि नियमों के मुताबिक ये लाभार्थी प्लॉट पाने के पात्र नहीं थे.

चार साल में दोगुने हुए दाम!
गुड़गांव के निर्वाणा में रहने वाले एक 33 वर्षीय शख्स ने नाम न छापने की शर्त पर बताया , 'मैंने गांव के एक प्रॉपर्टी डीलर से 2011 में 10 लाख रुपए में प्लॉट खरीदा था. आज मेरे पास 22 लाख का ऑफर है.'

सुधीर का कहना है कि मामला यहां तक ही नहीं है. प्लॉट आवंटन में इतना ज्यादा गड़बड़झाला हुआ कि 2011 में जिन्हें प्लॉट दिए गए उनमें से कुछ को 2014 में दोबारा प्लॉट आवंटित कर दिया गया. सुधीर ने एडिशनल डिप्टी कमिश्नर विनय प्रताप को सभी दस्तावेज और शिकायत भेज दी है. अब उन्हें कार्रवाई का इंतजार है.

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें