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पढ़ें: आतंक के शिकार परिवारों की आंसुओं में डूबी कहानी

बाबा बर्फानी के जयकारे के साथ 2 जुलाई को वलसाड से अमरनाथ के लिए निकला था श्रद्धालुओं का जत्था. सख्त सुरक्षा इंतजाम के बीच यात्रा संपन्न हुई लेकिन सैर सपाटे का कार्यक्रम बाकी था. सफर के उत्साह में श्रद्धालुओं ने श्रीनगर घूमने का प्लान बना लिया. तब किसे पता था कि ये छोटी सी चूक आतंकियों के नापाक इरादों का शिकार बन जाएगी.

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आंसुओं में डूबा देश
आंसुओं में डूबा देश

बाबा बर्फानी के जयकारे के साथ 2 जुलाई को वलसाड से अमरनाथ के लिए निकला था श्रद्धालुओं का जत्था. सख्त सुरक्षा इंतजाम के बीच यात्रा संपन्न हुई लेकिन सैर सपाटे का कार्यक्रम बाकी था. सफर के उत्साह में श्रद्धालुओं ने श्रीनगर घूमने का प्लान बना लिया. तब किसे पता था कि ये छोटी सी चूक आतंकियों के नापाक इरादों का शिकार बन जाएगी.

वलसाड की लक्ष्मीबेन

वलसाड की रहने वाली लक्ष्मीबेन पटेल के परिवार के लिए यकीन करना मुश्किल है कि अब वो इस दुनिया में नहीं हैं. आतंकी हमले की खबर के बाद से परिवार परेशान था लेकिन अब मौत की खबर ने उनका हौसला तोड़ दिया है.

5 जुलाई को ही लक्ष्मीबेन के पोते का जन्मदिन था और उसकी दादी से बात भी हुई थी. लक्ष्मीबेन पटेल के बेटे सुरेश पटेल का कहना है कि उनकी मां को अमरनाथ यात्रा करने की बड़ी तमन्ना थी. दर्शन के बाद अब परिवार को उनके लौटने का इंतजार था.

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नवसारी की चंपाबेन

अमरनाथ यात्रियों पर हुए आतंकी हमले की खबर से नवसारी का एक परिवार भी सदमे में है. श्रीनगर से कटरा के लिए निकली जिस बस पर आतंकियों ने गोलियां बरसाईं उसी में गणदेवी शहर की चंपाबेन प्रजापति भी थीं. चंपाबेन अपने भाई-भाभी और परिवार के 10 लोगों के साथ अमरनाथ के दर्शन को गई थीं. आतंकियों की फायरिंग में एक गोली उनके सिर में लग गई. टीवी पर आतंकी हमले की खबर देखने के बाद से परिवार परेशान हो उठा. लेकिन कहीं से कोई पक्की खबर नहीं मिल पा रही थी. देर रात करीब 1:30 बजे गणदेवी पुलिस ने परिवार को ये दुखद सूचना दी.

दहानू की निर्मला बेन

अमरनाथ यात्रा के लिए श्रद्धालुओं का जत्था वलसाड से हर साल बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए जाता है. किसे पता था कि इस बार आतंकियों के निशाने पर उनकी गाड़ी आ जाएगी. इस बस पर आतंकी हमले के बाद खून के छींटे हजारों किलोमीटर दूर महाराष्ट्र के एक घर तक भी पहुंचे.

निर्मलाबेन ठाकुर का परिवार समझ नहीं पा रहा कि एक दिन पहले उनकी दुनिया में इतना बड़ा भूचाल कैसे आ गया. किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाली निर्मला ठाकुर महाराष्ट्र के दहानू में 30 साल से रह रही थीं. 55 साल की निर्मला बेन चाहती थीं कि वो चार धाम के साथ अमरनाथ जाकर बाबा बर्फानी के दर्शन करें. 

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इस बार वलसाड के रिश्तेदारों और परिचितों के साथ यात्रा का संयोग बना. निर्मला बेन ठाकुर पहली बार अमरनाथ यात्रा करने गई थीं. बाबा बर्फानी के दर्शन करके वो बेहद खुश थीं. लेकिन उनके परिवार के लिए ये निर्मला बेन की आखिरी यात्रा बन गई.

दमन के रतिलाल पटेल

अमरनाथ यात्रा से लौट रही बस पर बरसी गोलियों के जख्म पूरे देश को खून के आंसू रुला रहे हैं. दमन के रहने वाले रतिलाल पटेल ओर उनकी पत्नी हंसा पटेल भी उसी बस में सवार थे. आतंकियों की फायरिंग में रतिलाल पटेल की मौत हो चुकी है और पत्नी घायल है.

 

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