
दिल्ली की नई सांस्कृतिक पहचान गढ़ने के उद्देश्य से मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम में शुक्रवार को तीन दिवसीय 'दिल्ली शब्दोत्सव' का भव्य आगाज हुआ. दीप प्रज्ज्वलन और वैदिक मंत्रोचार के साथ शुरू हुए इस उत्सव के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि यह समय भारत के 'बौद्धिक और सांस्कृतिक पुनर्जागरण' का है.
उन्होंने आधुनिकता और जड़ों के जुड़ाव पर जोर देते हुए इसे डिजिटल युग और वैदिक काल का अद्भुत समागम बताया. मुख्यमंत्री ने कहा कि वैदिक काल से डिजिटल युग तक का यह संगम दिल्ली में पहले कभी नहीं दिखा.
दिल्ली के संस्कृति और पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा कि दिल्ली की संस्कृति में घर कर रही देशविरोधी और धर्मविरोधी मानसिकता को रोकने के लिए यह शब्दोत्सव एक 'वैचारिक सर्जिकल स्ट्राइक' है.

उन्होंने युवाओं (Gen-Z) को असली सनातनी बताते हुए दिल्ली को देश की सांस्कृतिक राजधानी के रूप में पुनर्जीवित करने का संकल्प दोहराया. RSS के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने शब्दों की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नई पीढ़ी को भ्रमित करने वाले शब्दों को सही अर्थों में प्रस्तुत करना जरूरी है. उन्होंने कहा कि भले ही हम AI के युग में हों, लेकिन तकनीक को संस्कृति से जोड़ना अनिवार्य है.

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वहीं केंद्रीय राज्यमंत्री हर्ष मल्होत्रा ने नई शिक्षा नीति को चाणक्य की दूरदर्शिता से प्रेरित बताया. उन्होंने कहा कि आचार्य चाणक्य ने जिस प्रकार छात्रों को बहुआयामी रूप से तैयार किया था वही काम प्रधानमंत्री ने शिक्षा नीति में आमूलचूल बदलाव करके किया है.

युवाओं के लिए ओपन माइक और किताबों का संसार इस उत्सव में न केवल दस महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन हुआ, बल्कि 'ओपन माइक' के जरिए युवाओं को अपनी बात लोकतांत्रिक ढंग से रखने का मंच मिला.
कार्यक्रम संयोजक हर्षवर्धन त्रिपाठी ने साफ किया कि यह उत्सव किसी 'आयातित विचार' का नहीं, बल्कि भगवान राम, कृष्ण और शिव की भारतीयता का उत्सव है, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जाया जाएगा.