दिल्ली में अवैध निर्माण से जुड़ी हुई तमाम याचिकाओं का दिल्ली हाईकोर्ट ने यह कहकर निपटारा कर दिया है कि इस काम के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाई गई स्पेशल टास्क फोर्स अब आगे काम करेगी.
दिल्ली हाईकोर्ट में अवैध निर्माण से जुड़ी हुई करीब 20 जनहित याचिकाओं का निपटारा करते हुए कहा कि ज्यादातर याचिकाएं एमसीडी के मास्टर प्लान के बावजूद अवैध तरीके से हो रहे निर्माण को लेकर हैं. ज्यादातर जगहों पर मास्टर प्लान का उल्लंघन करके दिल्ली में जगह-जगह निर्माण किए गए हैं.
हाईकोर्ट ने याचिकाओं का निपटारा करते हुए कहा 25 अप्रैल 2018 को स्पेशल टास्क फोर्स बना दिया गया है, जिसमें 15 सदस्यों को जगह दी गई है. ऐसे स्पेशल टास्क फोर्स का काम बिल्डिंग बाई लॉज़ का जहां-जहां उल्लंघन हो रहा है, और दिल्ली के 2021 के मास्टर प्लान की अनदेखी हो रही है, वहां वहां कार्रवाई करना है.
हाईकोर्ट ने माना कि अवैध निर्माण और अतिक्रमण की समस्या बेहद गंभीर है. लेकिन स्पेशल टास्क फोर्स दिल्ली में सार्वजनिक जगहों,पार्कों, सड़कों और फुटपाथ पर अवैध निर्माण और अतिक्रमण की शिकायतों पर गंभीरता से काम करेगी.
डीडीए की तरफ से भी हाल ही में एक्शन प्लान तैयार किया गया है, जिसमें इस बात की मॉनिटरिंग की जाएगी कि दिल्ली में जगह-जगह मास्टर प्लान का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ किस तरह की कड़ी कार्रवाई की जाए. दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले की आखिरी सुनवाई के दौरान कहा कि तमाम याचिकाओं के लिए एक्शन प्लान और स्पेशल टास्क फोर्स दोनों बना दिए गए हैं. जो इन याचिकाओं में दी गई शिकायतों के निपटारे के लिए पर्याप्त हैं.
कोर्ट ने याचिकाओं के निपटारे के दौरान कहा कि याचिकाकर्ताओं को अपनी शिकायतों की सुनवाई के लिए अब स्पेशल टास्क फोर्स में जाना ज्यादा बेहतर होगा. क्योंकि कोर्ट से ज्यादा अवैध निर्माण और अतिक्रमण की इन समस्याओं पर टास्क फोर्स ज्यादा सटीक काम कर पाएगा. हालांकि कोर्ट ने इस मामले में जांच एजेंसी सीबीआई को निर्देश दिया है पहले से चल रहे मामलों की वो जल्द से जल्द जांच पूरा करें.