छत्तीसगढ़ में किडनी बेचने वाले गिरोह के सक्रिय होने की बात तब सही साबित हो गई, जब एक महिला ने किडनी निकालकर बेचने के आरोप में छह माह पूर्व दफन अपनी बेटी परवीन के शव को दोबारा पोस्टमार्टम के लिए निकलवाया. मां का आरोप है कि बेटी को मारकर मौत के मुंह में पहुंचा दिया गया.
इलाज के लिए अंबेडकर अस्पताल में भर्ती थी तो पांच दिनों में दो बार ऑपरेशन किया गया. सर्जरी किसलिए की गई, अभी तक किसी को नहीं बताया गया. उसका कहना है कि ऑपरेशन के दौरान किडनी निकाली गई. थाना कोतवाली पुलिस ने बताया कि शव का दोबारा पोस्टमार्टम होगा. जानकारी के अनुसार परवीन और शमीम का निकाह 2005 में हुआ था. शमीम पेशे से इलेक्ट्रिशियन है. उनके दो बेटे और एक बड़ी बेटी भी है.
परवीन की मां शबनम के अनुसार 30 अक्टूबर को परवीन के मकान मालिक का फोन आया कि उसकी बेटी बेहोश हो गई है. खबर मिलते ही वह परवीन के घर पहुंची और बेटी को लेकर अंबेडकर अस्पताल गई. उसके शरीर पर चोट के निशान स्पष्ट दिख रहे थे. उसे वार्ड नंबर 9 में रखा गया. उसके बाद आईसीयू में शिफ्ट किया गया.
तीन व चार नवंबर को उसका ऑपरेशन किया गया. पांच नवंबर को उसकी मौत हो गई. उसकी मां को ऑपरेशन के बारे में नहीं बताया गया. शव का जब पोस्टमार्टम करने को कहा गया तब दामाद सामने आ गया और नवाशा का वास्ता देकर खमोश रहने को कहा. परवीन इस बीच न्याय के लिए जगह-जगह भटकती रही. आखिर उसकी बात सुन ली गई.
ईदगाहभाठा कब्रिस्तान में छह माह से दफन परवीन का शव कब्रिस्तान से निकाला गया और दोबारा पोस्टमार्टम के लिए अंबेडकर लाया गया. पुलिस ने बताया कि पोस्टमार्टम के बाद ही मामले का खुलासा हो पाएगा.
गौरतलब है कि इससे पहले पश्चिम बंगाल के 24 परगना जिले से किडनी गिरोह का तार जुड़ा बताया गया था. इसमें बताया गया था कि एक साल में पं. जवाहरलाल नेहरू मेमोरियल कॉलेज में संचालित राज्य प्राधिकार कमेटी के सामने 11 ऐसे आवेदन आए, जिनमें डोनर पश्चिम बंगाल के थे. आवेदकों ने किडनी ट्रांसप्लांट के लिए भी पश्चिम बंगाल के इसी इलाके के सुपर स्पेश्यालिटी माइको हॉस्पिटल का नाम सुझाया था. हाईकोर्ट के आदेश पर कमेटी को एनओसी जारी करनी पड़ी थी. इन्हीं मामलों की सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने सीबीआई को जांच के आदेश दिए थे.