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चार बार सफल समाधि, पांचवीं बार में चली गई जान

महासमुंद जिले के रहने वाला 30 वर्षीय युवक चमन दास जोशी पिछले पांच साल से जमीन के अंदर समाधि ले रहा था. पहले साल उसने 24 घंटे समाधि ली. वहीं दूसरे साल 48 घंटे, तीसरे साल 72 घंटे, चौथे साल 96 घंटे की समाधि ली थी.

समाधि के दौरान मौत (प्रतीकात्मक तस्वीर) समाधि के दौरान मौत (प्रतीकात्मक तस्वीर)

  • पांचवीं बार समाधि के दौरान चली गई चमन दास की जान
  • हर साल दिसंबर में गुरु घसीदास जयंती पर लेता था समाधि

छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में समाधि की साधना ने एक युवक की जान ले ली. महासमुंद जिले के रहने वाला 30 वर्षीय युवक चमन दास जोशी पिछले पांच साल से जमीन के अंदर समाधि ले रहा था. पहले साल उसने 24 घंटे समाधि ली. वहीं दूसरे साल 48 घंटे, तीसरे साल 72 घंटे, चौथे साल 96 घंटे की समाधि ली. हालांकि चार बार समाधि लेने के दौरान वह बेहोशी की हालत में गड्ढे से जिंदा बच निकला इस बार यानी पांचवीं बार 108 घंटे की समाधि लेने के लिए वह चार फुट गहरे गड्ढे में बैठा गया और वापस जिंदा नहीं लौट सका.

चार दिन बाद समाधि स्थल से निकाला बाहर

दरअसल, 16 दिसंबर की सुबह आठ बजे उसने समाधि ली और चार दिन बाद यानी 20 दिसंबर की शाम को जब उसे समाधि स्थल से बाहर निकाला गया तो शरीर अकड़ गया था और सांसें थम गई थीं. उसे जिला अस्पताल महासमुंद लाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया.

पांचवीं बार 108 घंटे की ली थी समाधि

यह घटना छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के पटेवा थाना क्षेत्र के पचरी ग्राम की है. जहां चमन दास जोशी रहता था. परिजनों के अनुसार मृतक चमन दास जोशी सतनामी समाज के संत गुरु घासीदास का अनुयायी था. वह पिछले पांच साल से 18 दिसंबर गुरु घसीदास जयंती के दो दिन पहले 16 दिसंबर से जमीन के अंदर समाधि लेता था. इस बार भी उसने 16 दिसंबर को 108 घंटे के लिए समाधि ली थी.

क्या है पूरा मामला

समाधि लेने से पहले परिजनों और गांव के लोगों ने समाधि के लिए जमीन में चार फिट गड्ढा खोदा फिर चमन दास जोशी के साथ पहले उस गड्ढे की परिक्रमा की. इसके बाद चमन दास जोशी उस गड्ढे में समाधि लेने के लिए बैठ गया और गड्ढे को लकड़ी के तख्तों से ढका गया. लकड़ी के ऊपर कपड़ा डालकर मिट्टी से पूरे गड्ढे को ढक दिया गया. 20 दिसंबर को जब उसे समाधि स्थल से बाहर निकाला तो उसकी मौत हो चुकी थी. आनन-फानन में उसे अस्पताल लाया गया. जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया.

इस घटना पर पुलिस ने क्या कहा?

महासमुंद के जिला अस्पताल के सिविल सर्जन ने बताया कि उपवास रहने की वजह से उसके शरीर में खून की कमी हो गई थी. साथ ही समाधि लेने से उसे ऑक्सीज़न सही रूप से नहीं मिल पाई, जिससे उसका शरीर नीला पड़ गया और उसकी मौत हो गई. वहीं इस मामले पर थाना प्रभारी का कहना है कि समाधि लेने की जानकारी मिलने पर पुलिसबल के साथ वह मौके पर गए थे. पुलिस के पहुंचने तक चमन दास जोशी समाधि में बैठ चुका था. पुलिस ने परिजनों को समझाया कि ऐसा समाधि लेना खतरनाक हो सकता है, इसे बाहर निकाला जाए लेकिन परिवार के लोगों ने उनकी बात मानने से इंकार करते हुए कहा कि इससे पहले भी समाधि ले चुका है. लेकिन 20 दिसंबर को जब उसे समाधि से निकाला गया तो इसकी मौत हो चुकी थी.

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