'पगली दीदी'...जी हां, यह नाम सुनने में भले आपको अटपटा लगे, लेकिन ये ऐसा नाम है, जिसने इन दिनों सुरक्षा एजेंसियों की नींद उडा़ रखी है.
'पगली दीदी' वो नाम है, जिसे समझना भी सबके बूते के बाहर है. दरअसल सुरक्षा बलों ने इस नाम को पहली बार फोन इंटरसेप्ट करने के दौरान सुना था, लेकिन 'पगली दीदी' का असर पहली बार तब देखा गया, जब सोमवार को औरंगाबाद के बरंडा में ब्लास्ट में सीआरपीएफ के 3 जवान शहीद हो गए.
सीआरपीएफ के खुफिया विंग ने 'पगली दीदी' के इस नाम को डिकोड किया. दरअसल ये नाम नक्सलियों ने उस बम को दिया है, जिससे वे इन दिनों दहशत फैलाने में जुटे हैं. 'पगली दीदी' नाम से नक्सली उस ऑपरेशन को अंजाम दे रहे हैं, जिसमेें उनके निशाने पर ये चुनाव है.
'पगली दीदी' का मतलब है- Unpredictable Lady यानी वो आईडी, जिसे सुरक्षाबल समझ ही ना पाएं. यह गैर पारंपरिक तरीके से बनाया गया वो बम है, जो ठीक उल्टे तरीके से काम करता है.
सोमवार को बिहार के औरंगाबाद मैं आईडी ब्लास्ट में सीआरपीएफ के तीन जवान शहीद हो गए. जिस तरीके से बम मिलने के बाद उसे डिफ्यूज करते वक्त ये ब्लास्ट हुआ और तीन लोग मारे गए, उसने पगली दीदी के नाम से दहशत फैला दी.
फिलहाल सुरक्षा एजेंसियों ने इसे डिकोड कर लिया है. आजतक से खास बातचीत में सीआरपीएफ के डीआइजी ने कहा कि नक्सली इस बम के सहारे सुरक्षा बलों को चकमा देने में जुटे हैं.
सीआरपीएफ के डीआईजी चिरंजीवी प्रसाद ने कहा, 'चुनाव को देखते हुए जितनी तैयारी प्रशासन ने की है, उतनी ही तैयारी माओवादियों ने भी कर रखी है, तभी तो औरंगाबाद में जगह-जगह लैंड माइन लगा रखी हैघ्. गांववालों के मुताबिक इतनी लैंडमाइन के बावजूद यहां बम निरोधक दस्ता नहीं है, जिससे मौतें हो रही हैं.'
इसी 'पगली दीदी' के बहाने ही माओवादियों ने चुनाव में तबाही मचाने की योजना बना रखी है. ऐसे में सुरक्षा के लिहाज से अगले 48 घंटे सबसे अहम होने वाले हैं.