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कोरोनाः बिहार पहुंचे 50 हजार प्रवासी, आइसोलेशन कैंप में रहने को तैयार नहीं

बिहार सरकार ने बाहर से आने वालों को 14 दिन तक बॉर्डर पर बने कैंप में रखने का फैसला किया था, लेकिन प्रवासियों के भारी हंगामे की वजह से ये फैसला वापस लेना पड़ा. इसके बाद नीतीश सरकार ने इनके लिए गांव के आसपास स्थित स्कूल में इन्हें आइसोलेट रखने का भी प्रयास किया, लेकिन इन्हें तो अपनों से मिलने की जल्दी थी.

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दिल्ली और अन्य शहरों से गांव पहुंचे लोग (फाइल फोटोः PTI)
दिल्ली और अन्य शहरों से गांव पहुंचे लोग (फाइल फोटोः PTI)

  • क्या होंगे हालात, अगले 10 दिन में चल जाएगा पता
  • गांव में बेरोकटोक घूम, मिलजुल रहे गांव पहुंचे लोग

कोरोना वायरस को लेकर पूरे देश में लागू लॉकडाउन के बीच बिहार में सोमवार को 50 हजार प्रवासी अपने-अपने गांव पहुंच गए. चैती छठ का अवसर है, ऐसे में परदेस से आने वाले लोगों को देखकर रिश्तेदार खुश हो जाते हैं. लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ. गांव के लोग बाहर से आने वालों को शंका की नजर से देख रहे हैं. अपनों को देख कर कभी लोग अपनी बांहे फैला कर स्वागत करते थे, वो दृश्य आज दिखाई नहीं दे रहा.

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बिहार सरकार ने बाहर से आने वालों को 14 दिन तक बॉर्डर पर बने कैंप में रखने का फैसला किया था, लेकिन प्रवासियों के भारी हंगामे की वजह से ये फैसला वापस लेना पड़ा. इसके बाद नीतीश सरकार ने इनके लिए गांव के आसपास स्थित स्कूल में इन्हें आइसोलेट रखने का भी प्रयास किया, लेकिन इन्हें तो अपनों से मिलने की जल्दी थी. प्रवासी वहां रहने को भी तैयार नहीं हुए. कुछ गांवों के जागरूक युवकों ने इस फैसले पर अमल जरूर करवाया है, लेकिन उनकी संख्या काफी कम है.

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अब गांव पहुंचे यह लोग बेरोकटोक इधर-उधर घूम रहे हैं. जागरूक लोग प्रशासन और मीडिया को इसकी जानकारी भी दे रहे हैं, लेकिन इसका कोई असर नहीं है. सरकार के बनाए आइसोलेशन सेंटर खाली पड़े हैं और जो परदेसी आए हैं, वो ये भूल रहे हैं कि इतनी भीड़ और इतना लंबा सफर तय करने के बाद कहीं वो अपने साथ कोरोना वायरस तो लेकर नहीं आ गए हैं.

लॉकडाउन का ऐलान करते समय और इसके बाद भी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह अपील की थी कि जो जहां है, वहीं रहे. लेकिन इसका पालन न तो दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने किया और ना ही यूपी की सरकार ने. अब बिहार भी उसी श्रेणी में आ गया है. प्रदेश में स्वास्थ्य से जुड़े संसाधनों की कमी है. ऐसे में प्रदेश के लिए भी कोरोना से लड़ने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग का रास्ता बचा था, लेकिन प्रवासियों की बड़ी तादाद में घर वापसी से यह भी समाप्त होता नजर आ रहा है.

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प्रदेश सरकार के मंत्री संजय झा का कहना है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस गंभीर स्थिति से निपटने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन कुछ राज्य सरकारों की गैर जिम्मेदाराना हरकत से आज बिहार मुसीबत में है. उन्होंने कहा कि अब इतनी संख्या में लोगों की जांच करवाना भी मुश्किल कार्य है, फिर भी सरकार कोशिश कर रही है. नीतीश के मंत्री ने कहा कि अगले 10 दिन बिहार के लिए काफी महत्वपूर्ण हैं. गौरतलब है कि प्रदेश में इसी साल चुनाव होने हैं, ऐसे में नीतीश कुमार जनता को नाराज करना नहीं चाहते.

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