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फैक्ट चेक: कृषि विधेयकों के पास होते ही अडानी ग्रुप के अनाज गोदाम बनाने का दावा है गलत

इंडिया टुडे के एंटी फेक न्यूज वॉर रूम (AFWA) ने पाया कि तस्वीर के साथ किया जा रहा दावा भ्रामक है. अडानी एग्री लॉजिस्टिक्स लिमिटेड एक दशक से अधिक पुराना है और पंजाब के मोगा सहित सात शहरों में इसके अनाज गोदाम (silos) हैं.

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आजतक फैक्ट चेक

दावा
संसद से कृषि विधेयकों के पास होते ही अडानी एग्री लॉजिस्टिक्स लिमिटेड पंजाब में अनाज गोदाम की स्थापना कर रही है.
सोशल मीडिया यूजर्स
सच्चाई
अडानी एग्री पंजाब में 2007 से ही अनाज गोदाम चला रही है. यह हाल-फिलहाल में नहीं बना है.

हाल ही में संसद से पास हुए तीन कृषि विधेयकों को लेकर सरकार को कड़े विरोध का सामना करना पड़ रहा है. विपक्षी पार्टियों के अलावा देश भर के किसान इसका विरोध कर रहे हैं. इसी बीच अडानी एग्री लॉजिस्टिक्स लिमिटेड के एक बोर्ड की तस्वीर इंटरनेट पर वायरल हो रही है. दावा किया जा रहा है कि इधर किसान बिल पास हुए और उधर पंजाब के मोगा में अडानी ग्रुप ने एक अनाज गोदाम की स्थापना कर डाली.

एक ट्विटर यूजर ने इस तस्वीर के साथ ​ट्वीट किया, “बिल अभी राष्ट्रपति के पास गया है संसद में बाकी है और एडवांस में अदानी की तैयारी शुरू है। किसानों को पूरी तरह बर्बाद करके ही छोड़ेगे कांग्रेस बीजेपी वाले। राष्ट्रीय किसान मोर्चा इसका जाहिर विरोध करता है.”

इंडिया टुडे के एंटी फेक न्यूज वॉर रूम (AFWA) ने पाया कि तस्वीर के साथ किया जा रहा दावा भ्रामक है. अडानी एग्री लॉजिस्टिक्स लिमिटेड एक दशक से अधिक पुराना है और पंजाब के मोगा सहित सात शहरों में इसके अनाज गोदाम (silos) हैं.

इसी तरह का भ्रामक दावा फेसबुक पर भी कुछ लोगों ने किया है. इन फेसबुक और ट्विटर पोस्ट के आर्काइव्ड वर्जन यहां और यहां देखे जा सकते हैं.

AFWA की पड़ताल

अडानी एग्री लॉजिस्टिक्स की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, यह कंपनी भारतीय खाद्य निगम (FCI) के साथ मिलकर 2007 से ही भारत में काम कर रही है. कंपनी की ओर से पंजाब के मोगा और हरियाणा के कैथल में अनाज भंडारण केंद्रों की स्थापना की गई है.

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कंपनी के अनुसार, भारत सरकार ने महसूस किया कि पारंपरिक तरीकों से अनाज भंडारण में किसानों को काफी परेशानियां उठानी पड़ती हैं. सरकार ने अनाज भंडारण की आधुनिक सुविधा के लिए एफसीआई के साथ मिलकर साल 2000 में ग्लोबल टेंडर जारी किया था. ये टेंडर गुजरात के अडानी ग्रुप ने हासिल किया था.

साल 2007 से ही मोगा और कैथल में अडानी के इन आधुनिक अनाज गोदामों में किसान अपनी उपज पहुंचाते हैं और किसानों को उपज का भुगतान एफसीआई करता है. इन केंद्रों में अनाज को खराब होने से बचाने के लिए स्टील से बने बड़े बड़े टैंकों  (silos) में रखा जाता है. बाद में एफसीआई के निर्देशों के अनुसार ये अनाज फील्ड डिपो भेजे जाते हैं जहां से इन्हें बाजार में भेजा जाता है.

हमें हिंदी और अंग्रेजी में कई पुरानी खबरें मिलीं जिनमें अडानी एग्री लॉजिस्टिक्स का जिक्र है. इससे साबित होता है जिस अनाज गोदाम को लेकर सवाल उठाया जा रहा है, वह हाल फिलहाल में नहीं बनाया गया है.

फाइनेंशिल एक्सप्रेस’ की 18 अक्टूबर, 2018 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एफसीआई ने 2005 में मोगा और कैथल में अनाज गोदाम स्थापित करने और चलाने के लिए अडानी एग्री के साथ समझौता किया था. ये समझौता 20 साल के लिए था. रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी के ऐसे पांच और गोदाम चेन्नई, कोयंबटूर, बेंगलुरु, नवी मुंबई और हुगली में हैं.

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हमें अडानी एग्री लॉजिस्टिक पर ‘बिजनेसलाइन’ और ‘मिंट’ में भी छपी खबरें मिलीं. 2015 में छपी मिंट की रिपोर्ट में भी 2007 में अडानी एग्री साइलो की स्थापना का जिक्र है. इस तरह पड़ताल से साफ है कि अडानी एग्री लॉजिस्टिक्स की स्थापना 2007 में ही हुई थी. वायरल पोस्ट का ये दावा गलत है कि इसकी स्थापना हाल में हुई है. 

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