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PFI के विवादों की हिस्ट्री, ताजा एक्शन की इनसाइड स्टोरी और इसके पॉलिटिकल विंग SDPI की कहानी, जानें सबकुछ

पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के खिलाफ बड़ा ऑपरेशन चलाते हुए जांच एजेंसी NIA ने गुरुवार को 15 राज्यों में ताबड़तोड़ छापेमारी की. इस दौरान PFI से जुड़े 106 लोगों को गिरफ्तार भी किया गया. अधिकारियों का कहना है कि छापेमारी के दौरान आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस और धारदार हथियार भी बरामद किए गए हैं.

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PFI से जुड़े 100 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है. (फोटो-PTI) PFI से जुड़े 100 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है. (फोटो-PTI)

नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने गुरुवार को पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के खिलाफ बड़ा एक्शन लिया. देशभर में 15 राज्यों में 93 लोकेशन पर NIA ने PFI से जुड़े लोगों के यहां छापा मारा. इस छापेमारी के दौरान NIA ने PFI से जुड़े 106 लोगों को गिरफ्तार भी किया. गिरफ्तार होने वालों में PFI से राष्ट्रीय अध्यक्ष ओएमए सलाम भी हैं. 

PFI के खिलाफ NIA का ये सबसे बड़ा एक्शन गुरुवार तड़के 3:30 बजे से शुरू हुआ था. इस पूरे ऑपरेशन में NIA के 300 से ज्यादा अफसर शामिल थे. 

NIA ने सबसे ज्यादा 22 लोगों को केरल से गिरफ्तार किया है. महाराष्ट्र और कर्नाटक से 20-20 लोग गिरफ्तार हुए हैं. इनके अलावा तमिलनाडु से 10, असम से 9, उत्तर प्रदेश से 8, आंध्र प्रदेश से 5, मध्य प्रदेश से 4, पुडुचेरी और दिल्ली से 3-3 और राजस्थान से 2 लोगों को गिरफ्तार किया गया है.

अधिकारियों ने न्यूज एजेंसी को बताया कि इस पूरे ऑपरेशन के दौरान कई सारे आपत्तिजनक दस्तावेज और धारदार हथियार जब्त किए गए हैं. साथ ही बड़ी संख्या में डिजिटल डिवाइस भी बरामद की गईं हैं.

क्या है PFI?

पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया यानी PFI 22 नवंबर 2006 को तीन मुस्लिम संगठनों के मिलने से बना था. इनमें केरल का नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट, कर्नाटक फोरम फॉर डिग्निटी और तमिलनाडु का मनिता नीति पसरई साथ आए. PFI खुद को गैर-लाभकारी संगठन बताता है. 

PFI में कितने सदस्य हैं, इसकी जानकारी संगठन नहीं देता है. हालांकि, दावा करता है कि 20 राज्यों में उसकी यूनिट है. शुरुआत में PFI का हेडक्वार्टर केरल के कोझिकोड में था, लेकिन बाद में इसे दिल्ली शिफ्ट कर लिया गया. ओएमए सलाम इसके अध्यक्ष हैं और ईएम अब्दुल रहीमान उपाध्यक्ष. 

PFI की अपनी यूनिफॉर्म भी है. हर साल 15 अगस्त को PFI फ्रीडम परेड का आयोजन करता है. 2013 में केरल सरकार ने इस परेड पर रोक लगा दी थी. वो इसलिए क्योंकि PFI की यूनिफॉर्म में पुलिस की वर्दी की तरह ही सितारे और एम्बलम लगे हैं.

15 राज्यों में 93 ठीकानों पर हुई थी छापेमारी. (फाइल फोटो-PTI)

विवादों से रहा है नाता

NIA ने गुरुवार को बताया कि PFI कथित रूप से कई हिंसक गतिविधियों में शामिल रहा है. कॉलेज प्रोफेसर का हाथ काटना और दूसरे धर्मों को मानने वाले संगठनों से जुड़े लोगों की निर्मम हत्याएं शामिल हैं. 

जांच एजेंसी ने बयान जारी कर बताया कि कॉलेज प्रोफेसर का हाथ काटना, किसी संगठन से जुड़े लोगों की निर्मम हत्याएं, प्रमुख लोगों और जगहों को टारगेट करने के लिए विस्फोटक लाना, इस्लामिक स्टेट का समर्थन करना और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना और लोगों के मन में आतंक फैलाने जैसी गतिविधियों में PFI का नाम कथित रूप से सामने आया है.

टेरर फंडिंग, आतंकी गतिविधियों, हथियार चलाने की ट्रेनिंग देना और प्रतिबंधित संगठनों में लोगों को शामिल करने के लिए उकसाने से जुड़े 5 केस NIA ने दर्ज किए थे. इन्हीं मामलों में NIA ने ED और पुलिस के साथ मिलकर इस पूरे ऑपरेशन को अंजाम दिया.

PFI से जुड़े 19 मामलों में NIA जांच कर रही है. गुरुवार को छापेमारी के दौरान 5 मामलों में NIA ने 45 लोगों को गिरफ्तार किया है. बाकी लोगों को ED और राज्यों की पुलिस ने गिरफ्तार किया है. PFI के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओएमए सलाम को NIA ने केरल से गिरफ्तार किया है.

NIA के एक अधिकारी ने न्यूज एजेंसी को बताया कि बीते कुछ सालों में अलग-अलग राज्यों में PFI के नेता और उससे जुड़े लोगों के खिलाफ बड़ी संख्या में आपराधिक केस दर्ज किए गए हैं.

ED क्यों शामिल हुई इस ऑपरेशन में?

प्रवर्तन निदेशालय (ED) PFI की फंडिंग की जांच कर रहा है. नागरिकता संशोधन कानून और दिल्ली दंगों में भी PFI का लिंक सामने आया था. 

जनवरी 2020 में ED ने जांच के बाद दावा किया था कि 4 दिसंबर 2019 से 6 जनवरी 2020 के बीच PFI के बैंक अकाउंट्स में 1.04 करोड़ रुपये आए थे. इसी दौरान PFI ने अपने खातों से 1.34 करोड़ रुपये निकाले थे. 6 जनवरी के बाद CAA के खिलाफ प्रदर्शन और तेज हो गए थे.

ED ने PFI और उसके नेताओं के खिलाफ लखऊन की PMLA कोर्ट में दो चार्जशीट दाखिल की थी. पिछले साल फरवरी में पहली चार्जशीट में ED ने दावा किया था कि PFI और उसकी स्टूडेंट विंग कैम्पस फ्रंट ऑफ इंडिया (CFI) हाथरस गैंगरेप केस के बाद सांप्रदायिक दंगे भड़काने की साजिश रच रही थी.

इसी साल दूसरी चार्जशीट में ED ने दावा किया था कि संयुक्त अरब अमीरात में स्थित एक होटल PFI के लिए मनी लॉन्ड्रिंग के रूप में काम कर रहा था. 

अधिकारियों के मुताबिक, पिछली जांचों के दौरान NIA ने PFI से जुड़े 45 लोगों को दोषी साबित किया है, जबकि 355 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दायर की है.

PFI पर हिंसक गतिविधियों में शामिल होने के आरोप हैं. (फाइल फोटो-PTI)

खुद को लोकतांत्रिक संगठन बताता है PFI

PFI के कार्यकर्ताओं पर आतंकी संगठनों से कनेक्शन से लेकर हत्याओं तक के आरोप लगते रहे हैं. हालांकि, PFI का कहना है कि उनका संगठन कानूनी और लोकतांत्रिक तरीके से काम करता है. 

2012 में केरल सरकार ने हाईकोर्ट में बताया था कि हत्या के 27 मामलों में PFI का सीधा-सीधा कनेक्शन है. इनमें से ज्यादातर मामले RSS और CPM के कार्यकर्ताओं की हत्या से जुड़े थे.

2010 में PFI पर आतंकी संगठन SIMI से कनेक्शन के आरोप भी लगे थे. इसकी वजह ये थी कि उस समय PFI के अध्यक्ष अब्दुल रहमान थे, जो SIMI के राष्ट्रीय सचिव रहे थे. जबकि, PFI के राज्य सचिव अब्दुल हमीद कभी SIMI के सचिव रहे थे. हालांकि, PFI इन आरोपों को खारिज करता रहता है. 

जुलाई 2012 में केरल के कन्नूर में एक स्टूडेंट सचिन गोपाल और चेंगन्नूर में ABVP के नेता विशाल पर चाकू से हमला हुआ था. बाद में दोनों की मौत हो गई थी. इस हमले का आरोप PFI पर लगा था. उसी साल केरल सरकार ने हाईकोर्ट में ये भी बताया था कि PFI और कुछ नहीं, बल्कि प्रतिबंधित संगठन स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (SIMI) का ही नया रूप है.

इसी साल 26 जुलाई को कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिले में बीजेपी युवा मोर्चा के जिला सचिव प्रवीण नेत्तारू की हत्या कर दी गई थी. जांच में सामने आया था कि प्रवीण ने उदयपुर के कन्हैयालाल के समर्थन में एक पोस्ट शेयर किया था. इस हत्याकांड के सिलसिले में NIA ने सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) के नेता रियाज फरंगीपेट के यहां छापा मारा था. SDPI, PFI की ही पॉलिटिकल विंग है. 

कर्नाटक के मंगलुरु में स्थित SDPI के दफ्तर पर भी छापा मारा गया था. (फाइल फोटो-PTI)

ये SDPI क्या है?

21 जून 2009 को PFI ने अपनी पॉलिटिकल विंग SDPI को शुरू किया था. अप्रैल 2010 में चुनाव आयोग में इस पार्टी को रजिस्टर कराया गया था. एमके फैजी इसके राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं.

देशभर में SDPI ने CAA के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया था और इस कानून की प्रतियां भी जलाई थीं. उस समय केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने कहा था कि लोगों को बांटने के लिए SDPI एंटी-सीएए प्रदर्शनों का इस्तेमाल कर रही है.

दिसंबर 2016 में SDPI ने कई राज्यों में अयोध्या में दोबारा उसी जगह पर बाबरी मस्जिद बनाने की मांग को लेकर कैंपेन चलाया था. इतना ही नहीं, कई मामलों में SDPI और PFI से जुड़े लोग दोषी साबित हो चुके हैं. 

2014 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने 6 राज्यों में 29 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किए थे. हालांकि, वो एक भी सीट नहीं जीत सकी थी. 2019 के चुनाव में पार्टी ने 15 सीटों पर उम्मीदवार उतारे और इस बार भी एक भी सीट नहीं जीत सकी. इसके अलावा तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक के विधानसभा चुनावों में भी पार्टी ने उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन एक भी जीत नहीं सका. 

 

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