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Pilibhit Lok Sabha Chunav Result 2019: जीत के करीब वरुण गांधी

Lok Sabha Chunav Pilibhit Result 2019 :17वीं लोकसभा चुनाव के तहत उत्तर प्रदेश की पीलीभीत सीट पर बीजेपी नेता वरुण गांधी ने चुनाव जीत लिया है. उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी सपा प्रत्याशी हेमराज वर्मा को करीब ढाई लाख वोटों से हराया. चुनाव आयोग की वेबसाइट के अनुसार सपा प्रत्याशी हेमराज वर्मा को दो लाख 55 हजार 627 वोटों से हराया.

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Pilibhit Lok Sabha Election Result 2019
Pilibhit Lok Sabha Election Result 2019

बीजेपी नेता वरुण गांधी ने पीलीभीत सीट से चुनाव जीत लिया है उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी सपा प्रत्याशी हेमराज वर्मा को करीब ढाई लाख वोटों से हराया. चुनाव आयोग की वेबसाइट के अनुसार सपा प्रत्याशी हेमराज वर्मा को दो लाख 55 हजार 627 वोटों से हराया. यह सीट वरुण गांधी की मां मेनका गांधी ने 2014 में जीती थी. इस बार वह सुल्तानपुर से चुनाव मैदान में हैं जहां पिछले चुनाव में वरुण गांधी चुनाव जीते थे. वरुण गांधी को सात लाख से अधिक वोट मिले जबकि उनके प्रतिद्वन्दी वर्मा को करीब चार लाख 48 हजार वोट मिले.

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कब  और  कितनी  हुई  वोटिंग

पीलीभीत  सीट  पर  वोटिंग तीसरे चरण  में 23  अप्रैल  को  हुई  थी,  इस सीट पर 67.20  फीसदी लोगों ने अपने मताधिकार  का  इस्तेमाल  किया  था. इस सीट पर कुल 1759223 मतदाता हैं, जिसमें से 1182233 मतदाताओं ने अपने वोट डाले हैं.

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कौन-कौन था प्रमुख  उम्मीदवार

सामान्य वर्ग वाली इस सीट  पर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी वरुण गांधी चुनाव लड़े जिनका मुख्य मुकाबला सपा के  हेमराज वर्मा से था. इस सीट पर कुल 13 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे थे.

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2014 का चुनाव

2014 के लोकसभा चुनाव में पीलीभीत सीट पर 62.87 फीसदी वोटिंग हुई थी, जिसमें बीजेपी प्रत्याशी मेनका गांधी को 52.06 फीसदी (5,46,934) वोट मिले थे और और उनके निकटतम सपा प्रत्याशी बुद्धसेन वर्मा को  22.83 फीसदी (2,39,882)  मिले थे. इसके अलावा बसपा की अनीस अहमद को महज 18.68 फीसदी (1,96,294 ) वोट मिले थे. इस सीट पर बीजेपी की मेनका गांधी ने 3,07,052 मतों से जीत दर्ज की थी.

पीलीभीत का इतिहास

पीलीभीत लोकसभा सीट के संसदीय इतिहास की बात करें तो 1951 में लोकसभा चुनाव में भले ही कांग्रेस ने यहां से जीत हासिल की हो, लेकिन उसके बाद 1957, 1962, 1967 के चुनाव में प्रजा सोशलिस्ट पार्टी ने जीत दर्ज की थी. 1971 में कांग्रेस को फिर से यहां पर जीत मिली, लेकिन 1977 में चली सरकार विरोधी लहर में कांग्रेस की करारी हार हो गई.

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1980 और 1984 के चुनाव में कांग्रेस ने एक बार फिर यहां से बड़ी जीत हासिल की, लेकिन उसके बाद कांग्रेस यहां कभी वापसी नहीं कर सकी. संजय गांधी की मौत के बाद गांधी परिवार से अलग हुई मेनका गांधी ने 1989 में जनता दल के टिकट पर यहां से चुनाव लड़ा और जीता. लेकिन दो साल बाद 1991 में हुए चुनाव में बीजेपी ने यहां से जीत की शुरुआत की.

मेनका गांधी ने 1996 से 2004 तक लगातार चार बार यहां से चुनाव जीता, इनमें दो बार निर्दलीय और 2004 में बीजेपी के टिकट से चुनाव में जीत हासिल की थी. 2009 में उन्होंने अपने बेटे वरुण गांधी के लिए यह सीट छोड़ दी और वरुण यहां से सांसद चुने गए. लेकिन 2014 में एक बार फिर वह यहां वापस आईं और छठीं बार यहां से सांसद चुनी गईं. वह केंद्र में मंत्री भी बनीं.

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