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दुमका लोकसभा सीट पर 73.16% मतदान, 23 मई को आएगा फैसला

झारखंड की दुमका लोकसभा सीट से कुल 15 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं. इस लोकसभा सीट से तृणमूल कांग्रेस ने अर्जुन पुजहार, झारखंड मुक्ति मोर्चा ने शिबू सोरेन, भारतीय जनता पार्टी ने सुनील सोरेन, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया ने सेनापति मुर्मू, बहुजन समाज पार्टी ने स्टेफन बेसरा और झारखंड पीपुल्स पार्टी ने सतीश सोरेन को चुनाव मैदान में उतारा है. दुमका लोकसभा सीट पर 23 मई को वोटों की गिनती होगी और चुनाव के नतीजे घोषित किए जाएंगे.

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सांकेतिक तस्वीर (Courtesy- Getty Images)
सांकेतिक तस्वीर (Courtesy- Getty Images)

अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित झारखंड की दुमका लोकसभा सीट पर आज रविवार (19 मई) को आखिरी चरण में वोट डाले गए. दुमका लोकसभा सीट पर कुल 15 प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. यहां से तृणमूल कांग्रेस ने अर्जुन पुजहार, झारखंड मुक्ति मोर्चा ने शिबू सोरेन, भारतीय जनता पार्टी ने सुनील सोरेन, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया ने सेनापति मुर्मू, बहुजन समाज पार्टी ने स्टेफन बेसरा और झारखंड पीपुल्स पार्टी ने सतीश सोरेन को चुनाव मैदान में उतारा है. यहां वोटों की गिनती 23 मई को होगी और फिर चुनाव के नतीजे जारी किए जाएंगे.

दुमका संसदीय सीट पर जोरदार वोटिंग हुई और यहां पर 73.16 फीसदी मतदान दर्ज किया गया. वैसे झारखंड में 71.16 फीसदी मतदान दर्ज किया गया. लोकसभा चुनाव के सातवें और अंतिम चरण के तहत आज रविवार (19 मई) को 8 राज्यों (7 राज्य और 1 केंद्रशासित प्रदेश) की 59 सीटों पर मतदान कराया जा रहा है. झारखंड के दुमका संसदीय सीट पर आज ही वोट डाले जा रहे हैं. 

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राजनीतिक पृष्ठभूमि

दुमका लोकसभा सीट से झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन और बाबू लाल मरांडी सांसद रह चुके हैं. दुमका लोकसभा सीट के अन्तर्गत जामताड़ा, देवघर और दुमका जिले की 6 विधानसभा सीट आती है. साल 1989 से ही यह सीट झारखंड मुक्ति मोर्चा का गढ़ रही है और इस सीट से सात बार से शिबू सोरेन सांसद बनते आ रहे हैं. साल 2014 में प्रचंड मोदी लहर के बावजूद शिबू सोरेन अपनी सीट बचाने में कामयाब हुए थे.

1957 में इस सीट से झारखंड पार्टी के देबी सोरेन जीते थे. इसके बाद इस सीट से कांग्रेस के एस. सी. बेसरा लगातार तीन बार (1962, 1967 और 1971) में सांसद बने. 1977 में यह सीट जनता पार्टी के पास चली गई और हेमब्रह्म बटेश्वर जीतनें कामयाब हुए. 1980 के चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा के टिकट पर शिबू सोरेन पहली बार संसद पहुंचे. 1984 में यह सीट फिर कांग्रेस के पास आ गई और पृथ्वी चंद किस्कू जीते.

1989 में शिबू सोरेन ने वापसी की और लगातार तीन बार (1989, 1991 और 1996) झारखंड मुक्ति मोर्चा के टिकट पर जीते. 1998 में इस सीट से बीजेपी प्रत्याशी बाबू लाल मरांडी जीते. मरांडी 1999 का चुनाव भी जीते. 2002 में शिबू सोरेन ने दुमका में झारखंड मुक्ति मोर्चा का परचम फहराया और जीते. इसके बाद से वह लगातार (2004, 2009 और 2014) इस सीट से सांसद बन रहे हैं. वह इस सीट से सातवीं बार सांसद हैं.

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सामाजिक तानाबाना

दुमका लोकसभा सीट पर आदिवासी, अल्पसंख्यक और पिछड़े वर्ग के वोटरों का दबदबा है. इस सीट पर 40 फीसदी आदिवासी, 40 फीसदी पिछड़ी जातियां और 20 प्रतिशत मुस्लिम वोटर हैं. आदिवासी और अल्पसंख्यक वोटरों को झारखंड मुक्ति मोर्चा का परंपरागत वोटर माना जाता है. यही कारण है कि इस सीट से शिबू सोरेन लगातार जीत रहे हैं. इस सीट पर मतदाताओं की संख्या 12.47 लाख है, इसमें 6.46 लाख पुरुष और 6 लाख महिला मतदाता शामिल है.

इस लोकसभा सीट के अन्तर्गत 6 विधानसभा सीटें शिकारीपाड़ा (एसटी), जामताड़ा, दुमका (एसटी), नाला, सारठ और जामा (एसटी) आती है. 2014 के विधानसभा चुनाव के दौरान झामुमो ने चार सीटों (शिकारीपाड़ा, नाला, सारठ, जामा), बीजेपी ने एक सीट (दुमका) और कांग्रेस ने भी एक सीट पर (जामताड़ा) जीत दर्ज की थी.

2014 का जनादेश

2014 के लोकसभा चुनाव में इस सीट से शिबू सोरेन सातवीं बार जीते थे. उन्होंने बीजेपी के सुनील सोरेन को हराया था. शिबू सोरेन को करीब 3.35 लाख और सुनील सोरेन को 2.96 लाख वोट मिले थे. इससे पहले यानि 2009 के चुनाव में भी शिबू सोरेन ने बीजेपी के सुनील सोरेन को ही हराया था. इस दौरान शिबू सोरेन को करीब 2 लाख और सुनील सोरेन को करीब 1.89 लाख वोट मिले थे.

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