जिसमें पहला प्वाइंट कहता है कि किसी नागरिक के साथ धर्म, जाति, लिंग, जन्मस्थान या मूलवंश के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता है. लेकिन सच्चाई ये है कि जातियों में ऊंच-नीच का भेद करते हुए दलितों की पिटाई, दलितों की बारात को रोका जाना, दलितों को मंदिर में न घुसने देना या फिर धर्म के नाम पर हिंदू और मुसलमानों के बीच मारपीट जैसी घटनाएं हर हफ्ते सुनने को मिल जाती है.