मिजोरम की जनता 28 नवंबर को मताधिकार का इस्तेमाल कर अपने जन प्रतिनिधियों का चुनाव करेगी. विधानसभा चुनाव में 40 सीटों के लिए 201 उम्मीदवार मैदान में हैं. अब देखना ये है कि मिजोरम में बदलाव होता है या मौजूदा सरकार को जनता एक और मौका देती है. प्रदेश की राजनीति की खबरें तो आप लगातार पढ़ते रहते होंगे, लेकिन आज आपको बताएंगे इस खूबसूरत राज्य के बारे वो बातें, जो आप शायद ही जानते होंगे...
चुनावी मौसम में मतदाताओं की बात करें तो राज्य की मतदाता सूची में शामिल 7.68 लाख वोटरों में से 3.74 लाख पुरुष और 3.93 लाख महिलाएं हैं. राज्य में सरकारी नौकरियों में भी लगभग 47 हजार महिलाएं हैं. यहां की जनसंख्या ईसाई बहुल है और यहां की कुल आबादी में 87 फीसदी हिस्सा ईसाइयों का है.
पूर्व और दक्षिण में म्यांमार और पश्चिम में बांग्लादेश के बीच स्थित होने
की वजह से भारत के पूर्वोत्तर कोने में मिजोरम अत्यधिक महत्वपूर्ण राज्य
है. मिजोरम का प्राकृतिक सौंदर्य भी काफी खास है और इस क्षेत्र में प्रकृति
की विभिन्न छटाएं देखने को मिलती है. यह क्षेत्र विभिन्न प्रजातियों के
प्राणियों और वनस्पतियों से संपन्न है.
वहीं प्रदेश का क्षेत्रफल 21,081 वर्ग किलोमीटर है और जनसंख्या करीब 11 लाख है. यहां की मुख्य भाषा मिजो और अंग्रेजी है. यह भारत का 23वां राज्य है, जो फरवरी 1987 में बना. 1972 में केंद्रशासित प्रदेश बनने से पहले तक यह असम का एक जिला था.
उसके बाद 1891 में ब्रिटिश कब्जे में जाने के बाद कुछ वर्षों तक उत्तर का लुशाई पर्वतीय क्षेत्र असम के और आधा दक्षिणी भाग बंगाल के अधीन रहा. 1898 में दोनों को मिलाकर एक जिला बना दिया गया, जिसका नाम पड़ा—लुशाई हिल्स जिला और यह असम के मुख्य आयुक्त के प्रशासन में आ गया.
1972 में पूर्वोत्तर क्षेत्र पुनर्गठन अधिनियम लागू होने पर मिजोरम केंद्रशासित प्रदेश बन गया. भारत सरकार और मिजो नेशनल फ्रंट के बीच 1986 में हुए ऐतिहासिक समझौते के बाद 20 फरवरी, 1987 को इसे पूर्ण राज्य का दर्जा दिया गया. मिजोरम की अर्थव्यवस्था, में घरेलू और सामाजिक मामलों में महिलाओं का योगदान बहुत ज्यादा है. राजनीति में भले ही यहां महिलाएं पीछे हों, लेकिन यहां दुकानों और बाजारों, होटलों, निजी व सरकारी दफ्तरों में महिलाओं की तादाद ज्यादा है.
19वीं शताब्दी में यहां ब्रिटिश मिशनरियों का प्रभाव फैला और इस समय तो अधिकांश मिजो लोग ईसाई धर्म को ही मानते हैं. मिजो भाषा की अपनी कोई लिपि नहीं है. मिशनरियों ने मिज़ो भाषा और औपचारिक शिक्षा के लिए रोमन लिपि को अपनाया. वर्तमान में यह 88.8 प्रतिशत है, जोकि पूरे देश में दूसरे स्थान पर है. वहीं यहां बीफ खाने की परंपरा है और बीफ को लेकर प्रदेश में कोई कानून नहीं है. यानी यहां बीफ खाना वैध है.
मिजोरम के 80 प्रतिशत लोग कृषि कार्यों में लगे हैं. बागवानी में यहां फल उगाए जाते हैं.संपूर्ण मिजोरम अधिसूचित पिछड़ा क्षेत्र है और इसे 'उद्योगविहीन क्षेत्र' के तहत बांटा गया है. 1989 में मिज़ोरम सरकार की औद्योगिक नीति की घोषणा के बाद पिछले दशक में यहां थोड़े से आधुनिक लघु उद्योगों की स्थापना हुई है. इनमें इलेक्ट्रॉनिक तथा सूचना प्रौद्योगिकी, बांस और इमारती लकड़ी पर आधारित उत्पाद, खाद्य तथा फलों का प्रसंस्करण, वस्त्र, हथकरघा और हस्तशिल्प शामिल हैं.
राज्य में सड़कों की कुल लंबाई 5,982.25 किलोमीटर है. राज्य में बैराबी में रेलमार्ग स्थापित किया गया है. राज्य की राजधानी आइजोल विमान सेवा से जुड़ी है. मिजोरम की तमाम गतिविधियां और त्योहार भी जंगल की कटाई कर की जाने वाली झूम खेती से ही जुड़े हैं. मिजो लोगों के विभिन्न त्योहारों में से आजकल केवल मुख्य त्योहार 'चपचार कुट', 'मिम कुट' और 'थालफवांगकुट' मनाए जाते हैं.
यहां म्यामांर की सीमा के निकट चमफाई एक सुंदर पर्यटन स्थल है. इसके साथ ही तामदिल एक प्राकृतिक झील है, जो हरियाली के बीच है. यह आइजोल से 80 किलोमीटर और पर्यटक स्थल सैतुअल से 10 किलोमीटर दूर है. वानतांग जलप्रपात मिजोरम में सबसे ऊंचा और अति सुंदर जलप्रपात है.
साल 2013 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 34 सीटों पर जीत दर्ज की
थी, जबकि मिजो नैशनल फ्रंट (एमएनएफ) के खाते में पांच और मिजोरम पीपुल्स
कॉन्फ्रेंस की झोली में एक सीट आई थी. कांग्रेस और मुख्य विपक्षी एमएनएफ ने
40-40 सीटों पर अपने प्रत्याशी खड़े किए हैं, जबकि बीजेपी 39 सीटों पर
मैदान में है.