1984 के सिख दंगों के मामले में सज्जन कुमार को दिल्ली हाईकोर्ट ने उम्रकैद
की सजा दी है. उम्रकैद की सजा को लेकर कई जानकारियां हैं. उनमें से एक यह
कि उम्र कैद की सजा में दोषी को सिर्फ 14 साल या 20 साल जेल की सजा होती
है. यह भी कि इसमें दिन और रात के हिसाब से दिन
गिने जाते हैं. लेकिन सच यह नहीं है. आइए आपको बताते हैं कि वास्तव में
उम्रकैद की सजा पाने वाले दोषी को कब तक जेल में रहना पड़ता है.
सबसे पहले यह जानकारी दुरुस्त कर लें कि 14 साल या 20 साल जैसा कोई नियम
नहीं है. उम्रकैद का मतलब आजीवन कारावास ही होता है. उम्रकैद की सजा यानी
एक अपराधी को पूरी जिंदगी जेल में ही रहना होता है.
भारत के सु्प्रीम कोर्ट ने भी इस सजा को लेकर स्पष्टीकरण दे दिया था कि
उम्रकैद का मतलब क्या है. उम्रकैद का मतलब अपराधी को जीवनभर जेल में ही
रहना होगा. यह भी साफ़ किया कि दिन-रात को दो अलग अलग दिन के रूप में नहीं,
बल्कि एक दिन के रूप में ही गिना जाएगा.
अब सवाल यह है कि आखिर उम्रकैद के लिए 14 साल की बात क्यों कही जाती है.
दरअसल, इसकी एक वजह है. ऐसा क्रिमिनल प्रोसिजर कोड के एक प्रोविजन की वजह
से है जिसमें 14 साल की लिमिट का जिक्र किया जाता है.
इस प्रोविजन के अनुसार जब अपराधी 14 साल की सजा काट लेता है तो उसके
व्यवहार के आधार पर उसके केस को सेंटेंस रिव्यू कमिटी के पास भेजा जाता है.
वहीं इस मामले में राज्य सरकार ही इसकी सजा में कमी कर सकती है. हालांकि
कई ऐसे केस होते हैं, जिनमें यह सजा कम नहीं हो पाती
है.
कहा जाता है कि कुछ राज्य सरकारों की ओर से बिना गाइडलाइंस फॉलो किए कई
लोगों की सजा माफ कर दी गई, जिसकी वजह से लोग उम्र कैद को 14 साल की सजा
समझने लग गए.