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एजुकेशन

8 साल की उम्र में बनी बालिका वधू, अब बनने जा रही है डॉक्टर

8 साल की उम्र में बनी बालिका वधू, अब बनने जा रही है डॉक्टर
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रूपा ने बताया कि परिवार मूलरूप से जयपुर जिले के चौमू क्षेत्र के करेरी गांव में रहता है. गांव के ही सरकारी स्कूल में पढ़ती थी. तीसरी क्लास में थी तब बड़ी बहन रूकमा देवी की शादी हुई. उसी के साथ मेरी भी शादी कर दी गई. तब तक मुझे शादी का अर्थ भी सही से पता नहीं था. गुड्डे-गुड्डियों से खेलने की उम्र में ही शादी के बंधन में बंध गई. हम दोनों बहनों की दोनों भाइयों से शादी हुई थी. पति शंकरलाल की भी उम्र तब 12 साल की ही थी. 7वीं क्लास में पढ़ते थे. मेरा गौना 10वीं क्लास में हुआ. गांव में 8वीं तक सरकारी स्कूल था तो इसमें ही पढ़ी. इसके बाद पास के गांव के प्राइवेट स्कूल में एडमिशन लिया और वहीं से 10वीं तक की पढ़ाई की. 10वीं की परीक्षा दी और गौना हो गया. जब रिजल्ट आया तब ससुराल में थी. पता चला कि 84 प्रतिशत अंक आए हैं. ससुराल में आस-पास की महिलाओं ने घरवालों से कहा कि बच्ची पढ़ने वाली है तो इसे पढ़ाओ. पति शंकरलाल व जीजा जी बाबूलाल यादव ने इस बात को स्वीकारा और मेरा एडमिशन गांव से करीब 6 किलोमीटर दूर प्राइवेट स्कूल में आगे की पढ़ाई के लिए करवा दिया.

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10वीं में अच्छे अंक आए, पढ़ाई के दौरान ही मेरे सगे चाचा भीमाराम यादव की हृदयाघात से मौत हो गई. उन्हें पूरी तरह से उपचार भी नहीं मिल सका. इसके बाद ही मैंने बॉयोलॉजी लेकर डॉक्टर बनने का संकल्प लिया. ससुराल चली गई, वहां भी प्राइवेट स्कूल में एडमिशन हो गया, लेकिन 11वीं की पढ़ाई के दौरान बहुत कम स्कूल जा पाती थी. घर के कामकाज में भी पूरा हाथ बंटाती थी. गांव से तीन किलोमीटर स्टेशन तक जाना होता था, वहां से बस से 3 किलोमीटर दूर ही स्कूल जाती थी. 11वीं में भी 81 प्रतिशत अंक आए. 12वीं की परीक्षा दी और 84 प्रतिशत अंक आए.

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पारिवारिक स्थिति पीहर और ससुराल दोनों जगह की ठीक नहीं है. इसी वर्ष मैंने बीएससी प्रथम वर्ष के साथ एआईपीएमटी की परीक्षा भी दी. इसमें मेरे 415 नम्बर आए और करीब 23000 रैंक आई. मैंने पति को आगे पढ़ने के लिए बोला. उन्होंने बड़े भाई और मेरे जीजा से चर्चा की. जीजा ने पूरी जिम्मेदारी लेते हुए मेरी पढ़ाई करवाने की बात कही. उन्होंने कहा कि जमीन बेचनी पड़े तो बेच देंगे, लेकिन तुम पढ़ो. मुझे कोटा भेजा, एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट में एडमिशन करवाया. कोटा में पढ़ने आई तो यहां का माहौल बहुत सकारात्मक था शिक्षक बहुत मदद करते थे.

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8 साल की उम्र में बनी बालिका वधू, अब बनने जा रही है डॉक्टर
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रूपा ने कहा कि कोटा में रहकर एक साल मेहनत करके मैं मेरे लक्ष्य के बहुत करीब पहुंच गई. मैंने गत वर्ष नीट में 506 अंक प्राप्त किए, मैं अपने लक्ष्य से थोड़ी सी दूर रह गई. अगले साल फिर से कोचिंग करने में परिवार की आर्थिक परिस्थितियां आडे आ रही थी. परिवार असमंजस में था कि कोचिंग करवाएं या नहीं, ऐसे में एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट ने हाथ थामा, मुझे पढ़ाई के लिए प्रेरित किया. संस्थान द्वारा मेरी 75 प्रतिशत फीस माफ कर दी गई. सालभर दिन-रात मेहनत की. इस वर्ष 603 अंक प्राप्त किए. नीट रैंक 2283 है. अगर मैं कोटा नहीं आती तो शायद आज बीएससी करके घर के कामकाज कर रही होती. मैं आज जहां तक भी पहुंची हूं, इसमें ससुराल का बहुत बड़ा योगदान रहा है. इतना साथ नहीं मिलता तो शायद आगे नहीं बढ़ पाती. पहले साल जब मेरा सलेक्शन नहीं हुआ तो गांव वालों की तरफ से खुसर-फुसर होने लगी. क्यों पढ़ा रहे हो, क्या करोगे पढ़ाकर, घर की बहू है काम करवाओ, इस तरह की बातें आने लगी. यही नहीं मेरे कोटा में पढ़ाई के दौरान ससुराल वालों ने खर्चों की पूर्ति के लिए उधार पैसे लिए. लेकिन मुझे किसी ने नहीं बताया.

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ऐसे तानों के तनाव और विपरीत हालातों के बावजूद पति व जीजा जी और मजबूत हो गए और बोले लोगों को कहने दो, तुम तो अपना पढ़ो. दोबारा मुझे कोटा भेजा और पढ़वाने की बात कही. मैं भी प्रोत्साहित हुई और ज्यादा से ज्यादा पढ़ने की कोशिश की. मेरी फीस तो संस्था ने माफ कर दी थी, लेकिन कोटा में रहने व अन्य खर्च उठाने के लिए पति और जीजा जी टेम्पो चलाने का अतिरिक्त काम शुरू कर दिया. रोजाना 8 से 9 घंटे सेल्फ स्टडी करती थी.

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रूपा ने बताया पीहर में पिता मालीराम यादव किसान हैं. 13 बीघा जमीन है और पांचवी तक पढ़े हैं. मां रमसी देवी यादव निरक्षर हैं. हम पांच भाई-बहन हैं और मैं सबसे छोटी हूं. जीजा जी और पति टेम्पो चलाकर घर का काम चलाते हैं. पति शंकरलाल ने बीए किया हुआ है और खेती करते हैं.

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रुपा ने बताया कि दो साल कोटा में कोचिंग के दौरान जब भी कभी घर जाती थी तो घर का सारा काम करती थी. अभी भी सुबह-शाम का खाना बनाने के साथ-साथ झाड़ू और पोछा लगाती हूं. इसके साथ ही खेत में बाजरा बोया था तो इन दिनों खरपतवार हटाने का काम चल रहा है. यह सारा काम भी करती हूं.

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रूपा के पति शंकर लाल ने कहा कि रूपा ने जो असाधारण परिस्थितियों के बावजूद जो कामयाबी हासिल की है, वो हम सबके लिए प्रेरणा की मिसाल है. एलन संस्थान द्वारा रूपा की मदद का सिलसिला आगे भी जारी रखा जाएगा, उसे एमबीबीएस की पढ़ाई के दौरान चार साल तक मासिक छात्रवृत्ति दी जाएगी.

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