पाकिस्तान से आए आतंकियों द्वारा मुंबई में किये गये सबसे खौफनाक आतंकी हमले 26/11 को आज नौ साल पूरे हो गये हैं. 10 आतंकियों ने 60 घंटे की कार्रवाई में 164 निर्दोष लोगों की जान ले ली थी और सैकड़ों को घायल कर दिया था.
26/11 के इस खौफनाक हमले में भारतीय सेना ने कई आतंकियों को मार गिराया था, जबकि अजमल कसाब को जिंदा पकड़ लिया गया था. मुंबई हमले मामले की सुनवाई के बाद कसाब को 21 नवंबर 2012 को फांसी लगी दी गई.
अजमल कसाब भारत में पहला विदेशी था, जिसे फांसी पर चढ़ाया गया. 26/11 की चौथी बरसी से 5 दिन पहले कसाब को मौते के हवाले कर दिया गया.
कसाब को फांसी पर चढ़ाने का अभियान गोपनीय तरीके से किया गया था. कसाब को मुंबई की आर्थर रोड जेल से पुणे की यरवडा जेल तक सुरक्षापूर्वक पहुंचाने का जिम्मा मुंबई पुलिस के 17 अधिकारियों को सौंपा गया था और उसे बुर्का पहनाकर ले जाया गया था.
उसने मरने से पहले कोई आखिरी इच्छा नहीं जताई थी. फांसी देने से पहले कसाब को नहलाया गया था.
21 नवंबर, 2012 की सुबह कसाब जल्दी उठ गया था, जिसके बाद उसने नमाज अदा की. कसाब को जब फांसी देने के बारे में बताया गया तो उसने फांसी की खबर को अम्मी तक पहुंचाने के लिए कहा था.
कसाब ने फांसी पर लटकने से पहले जेलर की मौजूदगी में अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी मांगी और दोबारा ऐसी गलती न करने की बात कही. सुबह 7.36 बजे यरवडा जेल में कसाब को फांसी दे दी गई. इसके बाद उसका मेडिकल टेस्ट किया गया और डॉक्टरों ने कसाब को मृत घोषित कर दिया.
बता दें कि उसे 80 अपराधों का दोषी पाया गाया, जिनमें हत्या, भारत के खिलाफ जंग छेड़ने, हथियार रखने आदि शामिल थे. जब वो पकड़ा गया तो उसके कब्जे से हथियार, गोला-बारूद, एक सैटेलाइट फोन और शिवाजी टर्मिनल का नक्शा मिला था.
ऑपरेशन 'बुद्धा स्माइल' के तहत अजमल कसाब को फांसी दी गई थी.
कसाब की फांसी की पूरी प्रक्रिया को गुप्त रखने के लिए इसे ऑपरेशन एक्स कोड नाम दिया गया था. इससे संबंधित सभी सूचनाओं को गुप्त रखा गया था.