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FTII में लगे बाबरी के समर्थन वाले बैनर्स को जलाया गया, कैंपस में तनाव

राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा के मौके पर 22 जनवरी को बताया जा रहा है कि बाबारी मस्जिद की याद में पुणे के फिल्म इंस्टीट्यूट में एक बैनर लगा दिया गया था. हिंदुत्व संदठनों ने इसका विरोध किया और कैंपस में पहुंचकर बैनर में आग लगा दी. फिलहाल पुलिस इस मामले की छानबीन कर रही है.

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FTII कैंपस में विरोध-प्रदर्शन
FTII कैंपस में विरोध-प्रदर्शन

राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा के दिन 22 जनवरी को पुणे के फिल्म इंस्टीट्यूट में बाबरी मस्जिद की याद में एक बैनर लगाया गया था. बैनर पर अंग्रेजी में लिखा था जिसका अनुवाद है, "बाबरी की याद." बैनर फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के स्टूडेंट एसोसिएशन ने लगाया था जिसने बाबरी मस्जिद विध्वंस को बैनर के जरिए "संविधान की मौत" करार दिया है. इस बारे में जब हिंदुत्व संगठनों को जानकारी मिली तो कुछ लोगों ने कैंपस पहुंचकर खूब हंगामा किया और बैनर को उतारकर उसमें आग लगा दी.

कैंपस में भगवा गमछे के साथ कुछ लोगों को देखा जा सकता है जो अपने हाथ में बैनर लिए हुए हैं और विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं. साथ ही वे नारेबाजी कर रहे हैं. बैनर के साथ कुछ लोग "जय श्रीराम, हर-हर महादेव, भारत माता की जय" के नारे लगा रहे हैं और बैनर में आग लगा रहे हैं. माहौल बिगड़ने की खबर मिलते ही बताया जा रहा है कि मौके पर पुलिस की टीम ने पहुंचकर माहौल को शांत किया.

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एफटीआईआई कैंपस माहौर तनावपूर्ण

एफटीआईआई कैंपस में फिलहाल माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है. हिंदुत्व संगठनों की तरफ से फिलहाल कोई एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई है. कहा जा रहा है कि पुलिस मामले की जांच कर रही है. राम मंदिर के प्रतिष्ठा समारोह को लेकर 22 जनवरी को राज्य सरकार ने छुट्टी का ऐलान किया था और कथित रूप से कॉलेज में भी छुट्टी का ऐलान किया गया था. बताया जा रहा है कि स्टूडेंट्स इसके विरोध में थे और यही वजह थी कि उन्होंने कैंपस में बैनर लगा दिया.

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6 दिसंबर को ढहाई गई थी बाबरी

बाबरी मस्जिद को 6 दिसंबर 1992 को विश्व हिंदू परिषद द्वारा आयोजित कार सेवा के दौरान कार सेवकों ने ढहा दिया था. रामजन्मभूमि को लेकर चले दशकों लंबे केस में जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई वाली सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय बेंच ने नवंबर 2019 में फैसला सुनाया था. कोर्ट ने बाबरी मस्जिद साइट को राम का जन्मस्थान माना था और पूरी जमीन हिंदू पक्ष को सौंप दी थी.

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सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मंदिर का निर्माण

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राम मंदिर बनाने के लिए एक ट्रस्ट बनाई गई, जिसकी देखरेख में मंदिर का निर्माण कराया गया. मंदिर में राम की प्रतिमा स्थापित की गई और इसके लिए 22 जनवरी को प्राण प्रतिष्ठा किया गया और फिर मंदिर को सार्वजनिक रूप से खोला गया. इस पूरे कार्यक्रम की अगुवाई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की, जिन्होंने प्रतिष्ठा समारोह से पहले 11 दिनों  लंबा अनुष्ठान भी किया और दक्षिण की कई मंदिरों का दौरा किया.

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