अमेरिका ने वेनेजुएल की राजधानी सहित कई ठिकानों पर हमला कर दिया है. ट्रंप प्रशासन ने इसे नार्को टेरेरिज्म के खिलाफ लड़ाई बताया है. वहीं वेनेजुएला हमेशा से कहता रहा है कि अमेरिका की नजर उसके तेल भंडार पर है. जबकि, अमेरिका के पास खुद दुनिया का सबसे कच्चे तेल का भंडार है. फिर ऐसी क्या वजह है कि उसकी वेनेजुएला के तेल के लिए वो युद्ध छेड़ दे.
वेनेजुएला का तेल दुनिया के कुल तेल भंडार का पांचवां हिस्सा है. वेनेजुएला एक ऐसा देश है जिसके पास इराक से भी ज्यादा तेल का भंडार है. सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) के अनुसार , वेनेजुएला के पास 303 अरब बैरल कच्चे तेल का विशाल भंडार है. यह पृथ्वी पर कच्चे तेल का अब तक का सबसे बड़ा ज्ञात भंडार है.
वेनेजुएला के कच्चे तेल में है ऐसी खासियत
वेनेजुएला एक ऐसा देश है, जो अमेरिका के काफी करीब है. ऐसे में वहां से तेल खरीदना ट्रांसपोर्टेशन के लिहाज से अमेरिका के लिए काफी किफायती है. हालांकि,अमेरिका किसी भी अन्य देश से अधिक तेल का उत्पादन करता है. फिर भी उसे दूसरे देशों से तेल खरीदने की जरूरत होती है. खासकर वेनेजुएला के कच्चे तेल की उसे जरूरत होती है. इसका पीछे एक बड़ी वजह है.
अमेरिका के पास हल्का, मीठा कच्चे तेल का भंडार है. इससे सिर्फ बेहतर गैसोलीन का उत्पादन हो सकता है. इसके अलावा किसी और पेट्रोलियम उत्पाद का निर्माण नहीं हो पाता. वहीं वेनेजुएला के पास भारी और खट्टे कच्चे तेल का भंडार है. इसके परिशोधन के दौरान कई महत्वपूर्ण पेट्रोलियम उत्पाद बनते हैं, इनमें सबसे अहम डीजल है. इसके अलावा कारखानों तथा अन्य भारी उपकरणों के लिए ईंधन भी निकलते हैं.
अमेरिका के लिए सस्ता विकल्प है वेनेजुएला का तेल
दशकों तक, अमेरिका मौजूदा समय की तुलना में वेनेजुएला के तेल पर कहीं अधिक निर्भर था. वेनेजुएला काफी पास है. इसलिए वहां से अमेरिका को सस्ते में तेल मिल जाता है. वेनेजुएला के कच्चे तेल की बनावट ज्यादा चिपचिपी और गाढ़ी है. इसके लिए गहन परिशोधन की जरूरत होती है.
प्राइस फ्यूचर्स ग्रुप के वरिष्ठ बाजार विश्लेषक फिल फ्लिन के मुताबिक, अधिकांश अमेरिकी रिफाइनरियां वेनेजुएला के भारी तेल को रिफाइन करने के लिए बनाई गई थीं. इन रिफाइनरियों में वेनेजुएला के तेल का इस्तेमाल अमेरिकी तेल की तुलना में कहीं अधिक बेहतर होता था. इसलिए अमेरिकी कंपनियों को वेनेजुएला के कच्चे तेल की ज्यादा जरूरत है. क्योंकि उनका पूरा सिस्टम ही उसी पर निर्भर है और इस इंफ्रास्ट्रक्चर को खड़ा करने में अरबों लगा है.
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विशेषज्ञों का मानना है कि यह एक बड़ी वजह है कि जितनी भी अमेरिकी रिफाइनरी कंपनियां हैं, उनका सरकार पर दबाव रहता है. इस वजह से अमेरिका को वेनेजुएला के तेल भंडार पर कंट्रोल चाहिए, जो मौजूदा सरकार की वजह से संभव नहीं है. इस कारण अमेरिका ने वेनेजुएला के तेल उत्पादन पर प्रतिबंध लगा रखा है और आर्थिक प्रतिबंधों की वजह से वेनेजुएला का तेल उत्पादन ठप कर दिया है.