उत्तर प्रदेश के हाथरस में भोलेबाब के सत्संग में हुई भगदड़ में 121 लोगों की मौत हो गई है. हादसे में मारे गए इन लोगों में 108 महिलाएं और 7 बच्चे शामिल हैं. पीएम नरेंद्र मोदी ने भी हाथरस हादसे में हुई मौतों पर दुख व्यक्त किया है और प्रत्येक मृतक के परिजनों और घायलों के लिए मुआवजे का ऐलान किया जाएगा. प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (पीएमएनआरएफ) से प्रत्येक मृतक के परिजनों को 2 लाख रुपये और भगदड़ में घायल हुए प्रत्येक व्यक्ति को 50,000 रुपये का मुआवजा दिया जाएगा.
सरकार अक्सर कई हादसों के बाद पीड़ितों और मृतकों के लिए मुआवजे का ऐलान करती है. लेकिन, क्या आप जानते हैं पिछले कुछ सालों में सरकार की ओर पीएमएनआरएफ में कितने रुपये के मुआवजा दिया जा चुका है. तो जानते हैं हर साल सरकार कितने रुपये फंड से दिए जाते हैं और सरकार की ओर दिए गए ये पैसे कैसे दिए जाते हैं और मुआवजे का पैसा लेने का प्रोसेस क्या है?
कितना फंड दिया जा चुका है?
पीएमएनआरएफ से पिछले सालों में मुआवजे में अरबों रुपये दिए जा चुके है. आप नीचे देख सकते हैं कि सरकार की ओर से हर साल कितने रुपये मुआवजे के रुप में दिए जाते हैं. साल 2012-13 से 2021-2022 तक करीब 2379 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जा चुका है. (रुपये करोड़ों रुपये में)
| 2012-2013 | 181.62 करोड़ |
| 2013-2014 | 293.62 करोड़ |
| 2014-2015 | 372.29 करोड़ |
| 2015-2016 | 624.74 करोड़ |
| 2016-2017 | 204.49 करोड़ |
| 2017-2018 | 180.85 करोड़ |
| 2019-2020 | 222.70 करोड़ |
| 2020-2021 | 122.70 करोड़ |
| 2021-2022 | 175.89 करोड़ |
वहीं, साल 2022-23 में सरकार की ओर से 17 हादसों में पीड़ितों को पैसे दिया गया है, जिसमें हैदराबाद आग हादसे, ओडिशा सड़क हादसा, पूर्णिया सड़क हादसा, बिहार बाढ़ आदि हादसे शामिल हैं.
कितना मिला है डोनेशन?
इसके साथ ही ये भी जान लीजिए सरकार को पीएमएनआरएफ में कितने रुपये डोनेशन मिला है. (रुपये करोड़ों रुपये में)
2012-2013 17.59
2013-2014 375.97
2014-2015 608.68
2015-2016 497.47
2016-2017 244.98
2017-2018 236.63
2018-2019 534.22
2019-2020 481.67
2020-2021 321.30
2021-2022 491.87
कैसे मिलता है पैसा?
सरकार की ओर से मिलने वाले मुआवजे को प्राप्त करने के लिए पीड़ित या मृतक के परिवार को किसी भी हादसे के 90 दिन के अंदर इसके लिए अप्लाई करना होता है. इसके बाद राहत पीड़ित या मृतक के परिजनों को दी जाती है. इसके लिए पहले पीड़ित को खुद की पहचान संबंधी कागज देने होते हैं. इसके साथ मृतक परिवारों के परिजनों को मृत्यु प्रमाण पत्र और पीड़ितों को पर्मानेंट डिसेबिलिटी सर्टिफिकेट या घायलों को अस्पताल संबंधी कागज देने होते हैं.
बता दें कि पीएमएनआरएफ में कई हादसों के लिए मुआवजा मिलता है. ऐसे में हर हादसे के अनुसार डॉक्यूमेंट की आवश्यकता होती है, जिसमें बीमारी, मौत आदि का सत्यापन करता है. जैसे एसिड अटैक में कई मानकों पर फंड रिलीज किया जाता है और उसके हिसाब से कागजी कार्रवाई करनी होती है. इसके साथ ही मृतक के उत्तराधिकारी होने के दस्तावेज भी प्रस्तुत करना होता है और डेजिगनेटेड ऑफिसर एप्लीकेशन पर आखिर फैसला लेता है.