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ट्रैक्टर परेड हिंसाः आरोपियों के खिलाफ इन संगीन धाराओं में दर्ज हैं मामले, हो सकती है सजा

हिंसा के मामले में दिल्ली पुलिस ने किसान नेताओं के खिलाफ करीब तीन दर्जन मुकदमें दर्ज किए हैं. जिनमें आईपीसी की कई संगीन धाराएं भी लगाई गई हैं. जो किसान नेताओं की परेशानी को बढ़ा सकती हैं. हम आपको बताने जा रहे हैं कि कौन सी हैं वो धाराएं और क्या है उनमें सजा का प्रावधान.

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कई आरोपी किसान नेताओं को पुलिस ने नोटिस भेजा है (फाइल फोटो)
कई आरोपी किसान नेताओं को पुलिस ने नोटिस भेजा है (फाइल फोटो)

26 जनवरी को किसानों की ट्रैक्टर परेड के दौरान आईटीओ समेत कई स्थानों पर भड़की हिंसा के मामले में दिल्ली पुलिस ने किसान नेताओं के खिलाफ करीब तीन दर्जन मुकदमें दर्ज किए हैं. जिनमें आईपीसी की कई संगीन धाराएं भी लगाई गई हैं. जो किसान नेताओं की परेशानी को बढ़ा सकती हैं. हम आपको बताने जा रहे हैं कि कौन सी हैं वो धाराएं और क्या है उनमें सजा का प्रावधान.  

आईपीसी की धारा - 147, 148 
भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 147 और 148 के अनुसार, अगर कोई भीड़ में शामिल होकर हिंसा करता है और वो उपद्रव करने का दोषी है, तो उसे 2 से 3 साल की अवधि के लिए कारावास की सजा का प्रावधान है. जिसे दो वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है. या आर्थिक जुर्माना या फिर दोनों ही लगाया जा सकता है. यह एक जमानती और संज्ञेय अपराध है. जिसे किसी भी मजिस्ट्रेट द्वारा सुना जा सकता है. 

आईपीसी की धारा- 149 
भारतीय दंड संहिता की धारा 149 के अनुसार, अगर कानून के खिलाफ जनसमूह में शामिल कोई व्यक्ति या सदस्य किसी लक्ष्य को पूरा करने के लिए कोई अपराध करता है, या कोई ऐसा अपराध किया जाता है, जिसे उस जनसमूह के सदस्य जानते थे, तो उसमें शामिल हर व्यक्ति उस अपराध का दोषी होगा. इसके लिए एक तय अवधि के लिए कारावास की सजा का प्रावधान है. या आर्थिक जुर्माना या फिर दोनों ही लगाया जा सकता है. 

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आईपीसी की धारा- 152, 186
भारतीय दंड संहिता की धारा 152 के मुताबिक अगर कोई कानून व्यवस्था बनाने, या कानून विरोधी समूह को रोकने या उपद्रव, दंगे को नियत्रिंत करने वाले किसी लोक सेवक पर हमला करेगा या उसे हमले की धमकी देगा. या उसके काम में बाधा डालेगा. या बाधा डालने की कोशिश करेगा. ऐसा करने वाला आरोपी इस धारा के तहत दोषी होगा. उसे किसी एक अवधि के लिए कारावास की सजा हो सकती है. जिसे तीन वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है. उस पर आर्थिक दण्ड, या दोनों ही लगाए जा सकते हैं. यदि कहीं पर धारा 141 के तहत कानून विरोधी जमाव हो, तो अपराधी धारा 145 के अधीन दण्ड का भागीदार होगा. धारा 186 के अनुसार, जो भी कोई किसी लोक सेवक के सार्वजनिक काम में स्वेच्छा पूर्वक बाधा डालेगा, तो उसे किसी एक अवधि के लिए कारावास की सजा का प्रावधान है. जिसे तीन महीने तक बढ़ाया जा सकता है. पांच सौ रुपये तक का आर्थिक दण्ड, या दोनों ही लगाए जा सकते हैं. 

आईपीसी की धारा- 269
अगर किसी पर जनता का विश्वास है और उसके उपेक्षापूर्ण कार्य से किसी को संकटपूर्ण रोग या संक्रमण फैलने की संभावना हो तो ऐसा व्यक्ति भारतीय दंड संहिता की धारा 269 के अनुसार दोषी होगा. ऐसे हालात में उसे 6 महीने का कारावास या आर्थिक जुर्माना. या फिर दोनों हो सकते हैं. 

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आईपीसी की धारा- 188
अगर किसी की वजह से मानव जीवन, स्वास्थ्य या सुरक्षा को संकट पैदा हो, या ऐसा हो जाने की आशंका हो. या उसकी वजह से उपद्रव या दंगा होने की संभावना हो. या उसका काम ऐसे हालात पैदा करने की क्षमता रखता हो तो ऐसा शख्स दोषी माना जाएगा. उसे किसी एक अवधि के लिए कारावास की सजा का प्रावधान है. जिसे 6 माह तक बढ़ाया जा सकता है. या उस पर एक हजार रुपये का आर्थिक दण्ड या फिर दोनों ही लगाए जा सकते हैं.

आईपीसी की धारा- 279
अगर कोई व्यक्ति किसी वाहन को एक सार्वजनिक मार्ग पर किसी तरह की जल्दबाजी या लापरवाही से चलाता है, जिससे मानव जीवन को कोई खतरा या किसी व्यक्ति को चोट या आघात पहुंचा सकता है. तो वह भारत दंड संहिता की धारा 279 के तहत दोषी होगी. उसे किसी एक अवधि के लिए कारावास की सजा हो सकती है. आर्थिक जुर्माना भी लगाया जा सकता है. या फिर दोनों.

आईपीसी की धारा- 353
भारतीय दंड संहिता की धारा 353 के अनुसार यदि कोई व्यक्ति किसी लोक सेवक पर के दौरान अपने बल का इस्तेमाल करके हमला करने की कोशिश करता है या उसे अपनी ड्यूटी करने से रोकता है. तो ऐसे व्यक्ति को दोषी पाए जाने पर 2 वर्ष कारावास की सजा या जुर्माना हो सकता है. या फिर दोनों से दंडित किया जाता है.

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आईपीसी की धारा- 332 
भारतीय दंड संहिता की धारा 332 के अनुसार, अगर कोई शख्स किसी लोक सेवक को डियूटी करते वक्त या विधिपूर्ण कार्य करते समय डराकर, धमकाकर जान बूझकर गंभीर चोट पहुंचाता है, तो वह इस धारा को तहत दोषी होगा. उसे किसी एक अवधि के लिए कारावास की सजा हो सकती है. जिसे तीन वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है. या आर्थिक दंड भी लगाया जा सकता है. या दोनों ही.

आईपीसी की धारा- 307 
अगर कोई शख्स किसी मकसद से ऐसा हालात पैदा करे, जिससे किसी की मौत हो सकती हो या वो मौत का कारण बन सकती हो, तो वह शख्स हत्या की कोशिश करने का दोषी माना जाएगा. और उसे किसी एक अवधि के लिए कारावास की सजा हो सकती है. जिसे 10 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है. साथ ही वह आर्थिक दंड के लिए भी उत्तरदायी हो सकता है.

आईपीसी की धारा- 308 
अगर कोई इस तरह के इरादे या बोध के साथ ऐसे हालात पैदा करता है या काम करता है, जिससे वह किसी की मृत्यु का कारण बन जाए तो आईपीसी की धारा 308 के तहत वह गैर इरादतन हत्या (जो हत्या की श्रेणी मे नहीं आता) का दोषी माना जाएगा. और उसे किसी एक अवधि के लिए कारावास की सजा हो सकती है. जिसे तीन वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है. उस पर आर्थिक दंड या फिर दोनों ही लगाए जा सकते हैं. 

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आईपीसी की धारा- 395 
भारतीय दंड संहिता की धारा 395 के अनुसार अगर कोई शख्स डकैती करेगा, तो उसे आजीवन कारावास या किसी एक अवधि के लिए कठिन कारावास की सजा का प्रावधान है. जिसे दस वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है. साथ ही दोषी पर आर्थिक दण्ड भी लगाया जा सकता है. या फिर दोनों. 

आईपीसी की धारा- 397 
अगर लूट या डकैती की वारदात को अंजाम देते वक्त अपराधी किसी घातक हथियार का इस्तेमाल करके किसी व्यक्ति को गंभीर चोट पहुंचाएगा. या किसी व्यक्ति की मौत के घाट उतारने या उसे गंभीर आघात पहुंचाने की कोशिश करेगा तो वह भारतीय दंड संहिता की धारा 397 के तहत दोषी होगा. जिसे कम से कम सात वर्ष तक के लिए कठोर कारावास की सजा हो सकती है.

आईपीसी की धारा- 427 
अगर कोई भी ऐसी काम करेगा, जिसकी वजह से पचास रुपये या उससे अधिक की हानि या नुकसान हो, तो उसे भारतीय दंड संहिता की धारा 427 के अनुसार दोषी माना जाएगा. उसे किसी एक अवधि के लिए कारावास की सजा हो सकती है. जिसे दो वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है. या आर्थिक दंड या फिर दोनों ही लगाया जा सकता है. यह एक जमानती अपराध है.

आईपीसी की धारा- 120बी और 34
किसी भी अपराध को अंजाम देने के लिए साझा साजिश यानी कॉमन कॉन्सपिरेसी का मामला अपराध की की श्रेणी में आता है. ऐसे मामलों में भारतीय दंड संहिता यानी आईपीसी की धारा 120बी और 34 का प्रावधान है. किसी साजिश में शामिल होना भी कानून की निगाह में गुनाह है. इसके लिए किसी एक अवधि तक कारावास की सजा हो सकती है.

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आर्म्स एक्ट की धारा- 25/27/54/59
पुलिस ऐसे पकड़े गए बदमाशों पर आर्म्स एक्ट की धारा (25 व 27) लगाती है. जिनसे हथियार बरामद होते हैं या उनका सार्वजनिक प्रदर्शन किया जाता है. इसमें अधिकतम सात साल की सजा हो सकती है. जबकि इसी एक्ट की धारा (25-1 क) में आजीवन कारावास का प्रावधान है. इसके संशोधन में प्रतिबंधित हथियार या उसके उपकरण आयात करने, बेचने या खरीदने को अवैध व्यापार की श्रेणी में रखा गया है. इन हथियारों की मार्किंग में छेड़छाड़ करने वाले शस्त्र विक्रेता भी इसके दायरे में आते हैं. दोषी पाए जाने पर 7 साल जेल की सजा का प्रावधान है.

प्रिवेंशन ऑफ डैमेज टू पब्लिक प्रॉपर्टी एक्ट 1984
पब्लिक प्रॉपर्टी को नुकसान पहुंचाने को लेकर यह एक्ट 1984 में कानून बना था. इस एक्ट के तहत पब्लिक प्रॉपर्टी  यानी ऐसी चल या अचल संपत्ति जो केंद्र या राज्य सरकार के अधीन हो या स्थानीय प्रशासन के अधीन आती हो. या फिर केंद्र, प्रोविंशियल या स्टेट एक्ट के तहत स्थापित की गई कोई कॉरपोरेशन हो. या कंपनी एक्ट, 1956 के सेक्शन 617 में परिभाषित की गई कोई कंपनी. या फिर कोई भी संस्थान या अंडरटेकिंग, जिसके बारे में केंद्र सरकार बताए कि उसकी फंडिंग या तो केंद्र सरकार करेगी या राज्य सरकार या दोनों, तो ऐसी संपत्ति को नुकसान से बचाने के लिए प्रावधान हैं. इस कानून में नुकसान को आईपीसी की धारा 425 में स्पष्ट किया गया है. जिसके मुताबिक, किसी संपत्ति को नष्ट करना, उसमें बदलाव करना या इसकी वैल्यू या उपयोगिता कम करना कानूनन जुर्म है. ऐसा करने पर पांच साल तक की सजा या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं.

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प्राचीन स्मारक और पुरातत्व स्थल और अवशेष अधिनियम की धारा 30
The Ancient Mouments and Archaeologicial Sites and Remains Act की धारा 30 के तहत केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुरक्षित कोई स्मारक, जो पूजा का स्थान या पवित्र-स्थान है, अपने स्वरूप से असंगत किसी प्रयोजन के लिए उपयोग में नहीं लाया जाएगा. स्मारक की कोई संरक्षकता से छेड़छाड़ व तोड़फोड़ इसी धारा के तहत दंडनीय अपराध है. 

 

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