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CrPC Section 79: अधिकारिता के बाहर पुलिस अधिकारी को निर्दिष्ट वारंट से जुड़ी है धारा 79

सीआरपीसी की धारा 79 अधिकारिता के बाहर निष्पादन के लिए पुलिस अधिकारी को निदिष्ट वारंट के बारे में बताती है. तो चलिए जानते हैं कि सीआरपीसी की धारा 79 इस बारे में क्या कहती है?

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अधिकार क्षेत्र के बाहर पुलिस अधिकारी निदिष्ट वारंट से जुड़ी है सीआरपीसी की धारा 79 अधिकार क्षेत्र के बाहर पुलिस अधिकारी निदिष्ट वारंट से जुड़ी है सीआरपीसी की धारा 79
स्टोरी हाइलाइट्स
  • अधिकार क्षेत्र के बाहर निदिष्ट वारंट से जुड़ी है ये धारा
  • 1974 में लागू की गई थी सीआरपीसी
  • CrPC में कई बार हुए है संशोधन

Code of Criminal Procedure: दंड प्रक्रिया संहिता अदालती कार्यवाही (Court proceedings) और कानूनी प्रक्रियाओं (Legal procedures) के प्रावधान परिभाषित (Defined) करती है. इसी प्रकार से सीआरपीसी (CrPC) की धारा 79 (Section 79) अधिकारिता (Jurisdiction) के बाहर निष्पादन (Execution) के लिए पुलिस अधिकारी (Police Officer) को निर्दिष्ट वारंट (Specified warrant) के बारे में बताती है. तो चलिए जानते हैं कि सीआरपीसी की धारा 79 इस बारे में क्या कहती है?

सीआरपीसी की धारा 79 (CrPC Section 79)
दंड प्रक्रिया संहिता (Code of Criminal Procedure) की धारा 79 (Section 79) के अनुसार-

(1) जब पुलिस अधिकारी (Police officer) को निदिष्ट वारंट (Specified warrant) का निष्पादन (Execution) उसे जारी करने वाले न्यायालय की स्थानीय अधिकारिता (Local jurisdiction) के बाहर किया जाना है तब वह पुलिस अधिकारी उसे पृष्ठांकन (Endorsement) के लिए मामूली तौर पर ऐसे कार्यपालक मजिस्ट्रेट (Executive Magistrate) के पास या पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी (Officer in charge) से अनिम्न पंक्ति के पुलिस अधिकारी के पास जिसकी अधिकारिता की स्थानीय सीमाओं (Local boundaries) के अंदर उस वारंट का निष्पादन (Execution of warrant) किया जाना है, ले जाएगा.

(2) ऐसा मजिस्ट्रेट या पुलिस अधिकारी (Magistrate or police officer) उस पर अपना नाम पृष्ठांकित करेगा और ऐसा पृष्ठांकन (Endorsement) उस पुलिस अधिकारी के लिए, जिसको वह वारंट निदिष्ट किया गया है, उसका निष्पादन (Execution) करने के लिए पर्याप्त प्राधिकार (Adequate authority) होगा और स्थानीय पुलिस (Local police) यदि ऐसी अपेक्षा की जाती है तो ऐसे अधिकारी की ऐसे वारंट का निष्पादन (Execution of warrant) करने में सहायता करेगा.

(3) जब कभी यह विश्वास करने का कारण (Reason to believe) हो कि उस मजिस्ट्रेट या पुलिस अधिकारी (Magistrate or police officer) का जिसकी स्थानीय अधिकारिता (Local jurisdiction) के अंदर वह वारंट निष्पादित किया जाना है, पृष्ठांकन (Endorsement) प्राप्त करने में होने वाले विलंब (Delay) से ऐसा निष्पादन न हो पाएगा, तब वह पुलिस अधिकारी जिसे वह निदिष्ट (Specified) किया गया है उसका निष्पादन उस न्यायालय (Court) की जिसने उसे जारी किया है, स्थानीय अधिकारिता से परे किसी स्थान में ऐसे पृष्ठांकन के बिना कर सकता है.

इसे भी पढ़ें--- CrPC Section 78: अधिकारिता के बाहर भेजे गए वारंट के बारे में बताती है सीआरपीसी 78

क्या है सीआरपीसी (CrPC)
सीआरपीसी (CRPC) अंग्रेजी का शब्द है. जिसकी फुल फॉर्म Code of Criminal Procedure (कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसिजर) होती है. इसे हिंदी में 'दंड प्रक्रिया संहिता' कहा जाता है. CrPC में 37 अध्याय (Chapter) हैं, जिनके अधीन कुल 484 धाराएं (Sections) मौजूद हैं. जब कोई अपराध होता है, तो हमेशा दो प्रक्रियाएं होती हैं, एक तो पुलिस अपराध (Crime) की जांच करने में अपनाती है, जो पीड़ित (Victim) से संबंधित होती है और दूसरी प्रक्रिया आरोपी (Accused) के संबंध में होती है. सीआरपीसी (CrPC) में इन प्रक्रियाओं का ब्योरा दिया गया है.

1974 में लागू हुई थी CrPC
सीआरपीसी के लिए 1973 में कानून (Law) पारित किया गया था. इसके बाद 1 अप्रैल 1974 से दंड प्रक्रिया संहिता यानी सीआरपीसी (CrPC) देश में लागू हो गई थी. तब से अब तक CrPC में कई बार संशोधन (Amendment) भी किए गए है.

 

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