होर्मुज़ पर बढ़ा संकट! आज से होगी ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी, US सेंट्रल कमांड ने किया ऐलान

अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी का ऐलान किया है. भारतीय समयानुसार, सेंट्रल कमांड आज शाम 7:30 बजे से नाकेबंदी लागू करेगा.

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होर्मुज पर आज से अमेरिका की नाकेबंदी (File Photo: AP) होर्मुज पर आज से अमेरिका की नाकेबंदी (File Photo: AP)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 13 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 4:15 AM IST

US सेंट्रल कमांड ने ऐलान किया है कि वह 13 अप्रैल (सोमवार) को सुबह 10 बजे ET यानी भारतीय समयानुसार शाम 7:30 बजे ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी शुरू करेगा. CENTCOM ने कहा कि यह नाकेबंदी ईरानी बंदरगाहों और तटीय इलाकों में आने या जाने वाले सभी देशों के जहाजों के खिलाफ निष्पक्ष रूप से लागू की जाएगी.

सोशल मीडिया पोस्ट में US सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा कि उसकी सेनाएं राष्ट्रपति के ऐलान के मुताबिक, "ईरानी बंदरगाहों में आने और जाने वाले सभी समुद्री यातायात की नाकेबंदी लागू करना शुरू कर देंगी. यह नाकेबंदी ईरानी बंदरगाहों और तटीय इलाकों का उपयोग करने वाले सभी देशों के जहाजों के खिलाफ निष्पक्ष रूप से लागू की जाएगी, जिसमें अरब खाड़ी और ओमान की खाड़ी के किनारे की सुविधाएं भी शामिल हैं."

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CENTCOM ने आगे कहा कि वह होरमुज़ स्ट्रेट से होकर गैर-ईरानी बंदरगाहों की ओर या वहां से आने-जाने वाले जहाजों के लिए नौवहन की स्वतंत्रता में बाधा नहीं डालेगा. कमर्शियल नाविकों को सलाह दी गई कि वे आधिकारिक 'नाविकों के लिए सूचना' प्रसारणों पर नज़र रखें और ओमान की खाड़ी, होरमुज़ स्ट्रेट के आसपास के इलाकों में काम करते वक्त 'ब्रिज-टू-ब्रिज चैनल 16' पर अमेरिकी नौसेना बलों से संपर्क करें.

ट्रंप ने दी थी धमकी

रविवार को 'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका जल्द ही होर्मुज़ स्ट्रेट से गुज़रने वाले जहाज़ों को रोकना शुरू कर देगा. उन्होंने यह भी कहा कि उन जहाज़ों पर मुख्य रूप से ध्यान दिया जाएगा, जो उनके मुताबिक 'अवैध टोल' का भुगतान कर रहे हैं. कुछ घंटों बाद, अमेरिकी सेना ने कहा कि वह सोमवार को भारतीय समयानुसार शाम 7:30 बजे से इस नाकेबंदी को लागू करना शुरू कर देगी.

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यह भी पढ़ें: ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की बड़ी चेतावनी! होर्मुज़ स्ट्रेट के पास आए सैन्य जहाज, तो टूटेगा सीजफायर

अमेरिका का इस ऐलान से ऐसा लग रहा है कि इस कदम का मकसद उस कथित चलन को रोकना है, जिसके तहत इस रणनीतिक खाड़ी मार्ग से गुज़रने वाले कुछ जहाज़ चीनी युआन का उपयोग कर रहे हैं. इस घटनाक्रम को लंबे वक्त से चले आ रहे 'पेट्रोडॉलर' सिस्टम के लिए एक चुनौती और अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने के एक तरीके के रूप में देखा जा रहा है.

वॉशिंगटन ने एक बार फिर चीन और ईरान, दोनों के प्रति अपना रुख कड़ा कर लिया है. यह उन दो देशों के साथ बढ़ते तनाव की तरफ भी इशारा करता है, जिन्होंने अमेरिकी आर्थिक दबाव का मुकाबला करने की अपनी क्षमता को लगातार प्रदर्शित किया है.

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