अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इशारा किया है कि ईरान पर जल्द हमले खत्म नहीं होंगे. उन्होंने कहा कि नुकसान ज्यादा असरदार होना चाहिए, जिससे भविष्य में किसी भी राष्ट्रपति को दोबारा ऐसे खतरे का सामना न करना पड़े. ट्रंप ने कहा, "हम आज ही वहां से निकल सकते हैं और जो नुकसान हुआ है, उसे ठीक करने में 10 साल लग जाएंगे. लेकिन मुझे लगता है कि हमें इसे थोड़ा और असरदार बनाना होगा, जिससे किसी और राष्ट्रपति को इस दौर से न गुज़रना पड़े."
व्हाइट हाउस में बोलते हुए ट्रंप ने तर्क दिया कि इसका मकसद यह पक्का करना है कि ईरान दोबारा कभी परमाणु खतरा न बने.
उन्होंने कहा, "हम दोबारा कभी ऐसी समस्या नहीं चाहते. खासकर पागलों के साथ तो बिल्कुल नहीं. हम पागलों के हाथों में परमाणु हथियार नहीं होने दे सकते."
ट्रंप ने बताया कि जंग की कोशिशें अच्छी तरह से आगे बढ़ रही हैं. इसके साथ ही, उन्होंने दावा किया कि अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के हमलों ने ईरान की क्षमताओं को काफी कमज़ोर कर दिया है. उन्होंने कहा, "युद्ध बहुत अच्छी तरह से आगे बढ़ रहा है. हमने बहुत अच्छा काम किया है. ईरान को कभी भी परमाणु हथियार बनाने की इजाज़त नहीं दी जानी चाहिए.
इसके साथ ही, उन्होंने यह भी इशारा किया कि युद्ध वॉशिंगटन के पक्ष में जा रहा है. हाल के हमलों से ऐसे नतीजे मिले हैं, जिनके बारे में किसी ने सोचा भी नहीं था कि वे मुमकिन होंगे.
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ट्रंप ने बता दी जंग की डेडलाइन...
ट्रंप ने यह भी तर्क दिया कि अगर पहले अमेरिका ने सैन्य कार्रवाई न की होती, तो ईरान अब तक परमाणु क्षमता हासिल कर चुका होता. उन्होंने कहा, "वे बस दो हफ़्ते ही दूर थे, तब बातचीत की कोई गुंजाइश ही नहीं बचती. वे बहुत खुशी-खुशी इसका इस्तेमाल कर लेते. अपनी आक्रामक बयानबाज़ी के बावजूद, राष्ट्रपति ने सेना की वापसी की समय-सीमा के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी.
नुकसान के बड़े पैमाने के बावजूद, ट्रंप ने साफ़ कर दिया कि वापसी तुरंत नहीं होगी. उन्होंने कहा, "हम अभी जाने के लिए तैयार नहीं हैं, लेकिन बहुत जल्द ही हम चले जाएंगे. हालांकि, उन्होंने कोई साफ़ समय-सीमा नहीं बताई.
एक और मौके पर, उन्होंने इशारा किया कि यह संघर्ष घरेलू प्राथमिकताओं से एक अस्थायी भटकाव था. उन्होंने इसे एक छोटा सा अभियान बताते हुए कहा कि कुछ हफ़्ते की बात है, यह ज़्यादा लंबा नहीं चलेगा.
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NATO से नहीं मिला साथ...
इससे पहले, ट्रंप ने हाल के हमलों के बाद ईरान के नेतृत्व को लेकर बनी अनिश्चितता को भी स्वीकार किया. कई सीनियर ईरानी अधिकारियों की हत्या का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा, "हमें नहीं पता कि किससे बात करें."
राष्ट्रपति ने इस मौके का इस्तेमाल NATO सहयोगियों की आलोचना करने के लिए भी किया, जिन्होंने होर्मुज़ को सुरक्षित करने में मदद के लिए अमेरिका द्वारा की गई गुजारिश को ठुकरा दिया था.
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