107 दिन की जंग में ईरान ने बहुत कुछ खोया, लेकिन डील में हासिल कीं ये 7 बड़ी चीजें

107 दिन तक चली जंग में ईरान को बड़ा सैन्य और आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा. कई अहम ठिकाने तबाह हुए, शीर्ष नेतृत्व को भी भारी झटका लगा. लेकिन आखिर में हुई डील ने कहानी पूरी तरह एकतरफा नहीं रहने दी. संघर्ष के बाद हुए समझौते में ईरान ने 7 बड़ी चीजें हासिल की.

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07 दिनों की भीषण जंग के बाद अमेरिका और ईरान के बीच हुआ समझौता. (File Photo) 07 दिनों की भीषण जंग के बाद अमेरिका और ईरान के बीच हुआ समझौता. (File Photo)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 15 जून 2026,
  • अपडेटेड 2:41 PM IST

अमेरिका और ईरान के बीच 107 दिनों तक चला भीषण युद्ध आखिरकार एक ऐतिहासिक शांति समझौते के साथ खत्म हो गया है. 28 फरवरी से शुरू हुई इस जंग में ईरान को सैन्य, आर्थिक और रणनीतिक मोर्चे पर भारी कीमत चुकानी पड़ी. कई बड़े सैन्य ठिकाने तबाह हुए, शीर्ष नेतृत्व को नुकसान हुआ और देश की अर्थव्यवस्था पर भी दबाव बढ़ा. इसके बावजूद अमेरिका के साथ बनी नई सहमति में ईरान को ऐसी 7 बड़ी बातें मिली हैं, जिन्हें वह अपनी बड़ी कूटनीतिक जीत के तौर पर देख रहा है.

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इस संघर्ष के शुरुआती दिनों में ही ईरान को सबसे बड़ा रणनीतिक झटका लगा था. अमेरिकी और इजरायली हमलों में उसके सर्वोच्च नेता खामेनेई सहित कई टॉप सैन्य कमांडरों की जान चली गई, साथ ही देश के कई महत्वपूर्ण परमाणु केंद्रों को भी भारी नुकसान पहुंचा. हालांकि इस युद्ध में अमेरिका को भी अरबों डॉलर के हथियारों की तबाही और भारी आर्थिक मंदी का सामना करना पड़ा. ईरान ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज की नाकेबंदी कर दी थी, जिससे पूरी दुनिया में तेल की सप्लाई रुक गई और वैश्विक बाजार में महंगाई का दबाव बेहद बढ़ गया.

डील में ईरान को मिलीं ये 7 बड़ी राहतें

इतनी भारी तबाही और अपने शीर्ष नेताओं को खोने के बाद भी ईरान कूटनीतिक मोर्चे पर बातचीत के जरिए अमेरिका से ये 7 बड़ी राहतें पाने में सफल रहा.

  • मुख्य बातचीत शुरू होने से ठीक पहले अमेरिका ईरान के जब्त किए गए 24 अरब डॉलर के फंड का आधा हिस्सा तुरंत रिलीज कर देगा.
  • अमेरिकी नौसेना अगले 30 दिनों के भीतर ईरान के समुद्री रास्तों से अपना ब्लॉकेड पूरी तरह हटा लेगी.
  • ईरानी तेल और पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट्स की बिक्री पर लगी तमाम अंतरराष्ट्रीय पाबंदियां जल्द ही सस्पेंड कर दी जाएंगी.
  • ईरान को दोबारा अपने पैरों पर खड़ा करने यानी देश के पुनर्निर्माण के लिए अमेरिका और उसके सहयोगी देश कम से कम 300 अरब डॉलर का फंड मुहैया कराएंगे.
  • पूरी दुनिया के व्यापार के लिए सबसे जरूरी हॉर्मुज को फिर से ईरानी सुरक्षा नियंत्रण के तहत ही खोला जाएगा.
  • अमेरिका ने लिखित प्रतिबद्धता जताई है कि वह इस क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी को अब और नहीं बढ़ाएगा, साथ ही ईरान पर कोई नया प्रतिबंध भी नहीं थोपेगा.
  • अमेरिकी सरकार ने यह पूरी गारंटी दी है कि वह भविष्य में ईरान के अंदरूनी और राजनैतिक मामलों में किसी भी तरह का हस्तक्षेप नहीं करेगी.
     
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