तालिबान ने किया बेनजीर भुट्टो की हत्या का दावा, बताई ये वजह

प्रतिबंधित आतंकी संगठन के मुखिया की लिखी गई एक किताब में दावा किया गया है भुट्टो ने सत्ता में लौटने पर अमेरिका के साथ मिलकर 'मुजाहिद्दीन-ए-इस्लाम' के खिलाफ काम करने की योजना बनाई थी.

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बेनजीर भुट्टो बेनजीर भुट्टो

भारत सिंह

  • इस्लामाबाद,
  • 15 जनवरी 2018,
  • अपडेटेड 6:18 PM IST

ने दावा किया है कि उनके संगठन ने ही पूर्व पाकिस्तानी पीएम बेनजीर भुट्टो की हत्या की थी. इस आतंकी संगठन का दावा है कि भुट्टो ने अमेरिका के साथ मिलकर 'मुजाहिद्दीन-ए-इस्लाम' के खिलाफ एक्शन लेने की तैयारी की थी.

प्रतिबंधित आतंकी संगठन के मुखिया की लिखी गई एक किताब में दावा किया गया है भुट्टो ने सत्ता में लौटने पर अमेरिका के साथ मिलकर 'मुजाहिद्दीन-ए-इस्लाम' के खिलाफ काम करने की योजना बनाई थी.

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डेली टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक बेनजीर भुट्टो की हत्या की जिम्मेदारी आज तक किसी भी आतंकी संगठन ने नहीं ली थी. पहली बार पाकिस्तानी तालिबान के मुखिया की उर्दू में लिखी किताब- 'इंकलाब महसूद दक्षिणी वजीरिस्तान: ब्रिटिश राज से अमेरिकी साम्राज्यवाद तक' में इस हत्या की जिम्मेदारी ली गई है.

इस किताब में दावा किया गया है कि अमेरिका चाहता था कि भुट्टो की सत्ता में वापसी हो. इसके अलावा अमेरिका ने भुट्टो को 'मुजाहिद्दीन-ए-इस्लाम' के खिलाफ एक्शन प्लान भी दिया था.

आपको बता दें कि पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (पीपीपी) प्रमुख बेनजीर भुट्टो की 27 दिसंबर 2007 को एक आत्मघाती हमले में मौत हो गई थी. 54 साल की भुट्टो अपनी मौत के समय रालवपिंडी में एक चुनावी रैली को संबोधित कर निकल रही थीं.

पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति ने तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) पर भुट्टो की हत्या का आरोप लगाया था. हालांकि, इस संगठन ने तब इसमें अपना हाथ होने से इनकार कर दिया था. किताब में दावा किया गया है कि आत्मघाती हमलावर बिलाल उर्फ सईद और इकरामुल्ला ने इस काम को अंजाम दिया था.

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किताब के मुताबिक पहले बिलाल ने भुट्टो पर पिस्टल से गोलियां चलाई थीं, जो भुट्टो की गर्दन में जाकर लगीं. इसके बाद उसने अपने जैकेट में लगे बम में धमाका कर दिया था. इस किताब को टीटीपी के मुखिया अबू मंसूर आसिम मुफ्ती नूर वली ने लिखा है. 588 पन्नों की यह किताब 30 नवंबर 2017 को प्रकाशित हुई है.

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक किताब में कहा गया है कि भुट्टो की हत्या से दो महीने पहले उनके कराची में निकाले गए जुलूस पर भी आत्मघाती हमला किया था. इसमें 140 लोग मारे गए थे, लेकिन भुट्टो बच गई थीं. किताब में कहा गया है कि इस हमले के बावजूद पाक सरकार ने भुट्टो की सुरक्षा नहीं बढ़ाई, इससे भुट्टो को निशाना बनाने में आसानी हुई.

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