नेपाल ने दिया ड्रैगन को झटका, चीनी कंपनी के साथ हाइड्रो प्रोजेक्ट डील की रद्द

चीन की ओर से इस पर कोई टिप्पणी करने को कहा गया तो चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि उन्हें इस बारे में अभी कोई ठोस जानकारी नहीं है, नेपाल और चीन के संबंध काफी अच्छे हैं.

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संकेतात्मक फोटो संकेतात्मक फोटो

मोहित ग्रोवर

  • काठमांडू,
  • 15 नवंबर 2017,
  • अपडेटेड 11:06 AM IST

चीन की नेपाल को अपनी तरफ करने की कोशिशों को एक बड़ा झटका लगा है. नेपाल सरकार ने बुधी गंडाकी नदी पर बनाए जा रहे हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के चीनी कंपनी के साथ कॉन्ट्रैक्ट को रद्द कर दिया है. नेपाल के उपप्रधानमंत्री कमल थापा ने मंगलवार को ट्वीट कर इस बात की जानकारी दी. ऐसी उम्मीद जताई जा रही है कि अब ये कॉन्ट्रैक्ट किसी भारतीय कंपनी को मिल सकता है.  

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कमल थापा ने ट्वीट किया, '' कैबिनेट ने गेचोउबा ग्रुप के साथ बुधी गंडाकी नदी पर बनने वाले हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट को रद्द कर दिया है.'' हालांकि, जब चीन की ओर से इस पर कोई टिप्पणी करने को कहा गया तो चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि उन्हें इस बारे में अभी कोई ठोस जानकारी नहीं है, नेपाल और चीन के संबंध काफी अच्छे हैं.

ये प्रोजेक्ट भारतीय कंपनी NHPC को मिल सकता है. बता दें कि जब नेपाल सरकार ने चीनी कंपनी के साथ इस प्रोजेक्ट को लेकर डील की थी, उसी के बाद ही चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के वन बेल्ट वन रोड के समर्थन की बात कही थी.

आपको बता दें कि पूर्व की के द्वारा यह प्रोजेक्ट चीन की गेचोउबा ग्रुप को दिया था. उस दौरान ऐसा आरोप लगाया गया था कि इस प्रोजेक्ट की बोली की प्रक्रिया सही तरीके से नहीं की गई और ऐसे ही चीनी कंपनी को प्रोजेक्ट सौंप दिया गया. यह प्रोजेक्ट नेपाल की राजधानी काठमांडू से 50 किलोमीटर की दूरी पर है. इससे करीब 1200 मेगावाट की बिजली उत्पन्न होने की उम्मीद है.

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गौरतलब है कि नेपाल का बॉर्डर भारत और चीन की सीमा से लगता है. इस लिहाज से भारत और चीन के बीच नेपाल का रोल काफी अहम हो जाता है. हाल ही में डोकलाम विवाद के दौरान नेपाली पीएम शेरबहादुर देउबा ने भारत का दौरा किया था. जिस पर चीन ने भारत को आंखें दिखाई थीं.

चीन की ओर से कहा गया था कि भारत आर्थिक मदद की बदौलत नेपाल को रिझाने और वहां चीन के प्रभाव को कम करने का सपना न देखे. चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने अपने लेख में भारत को चेतावनी दी है कि अगर चीन भी ऐसा करने लगा तो भारत को मुंह की खानी पड़ेगी.

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