रोहिंग्या मुद्दा: म्यांमार ने खारिज किया UN टीम के दौरे का प्रस्ताव

सरकार ने पहले कहा था कि फरवरी में रोहिंग्या शरणार्थी संकटों का जमीनी स्तर पर जायजा लिया जाएगा. लेकिन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष के द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार म्यांमार सरकार ने फरवरी में जायजा लेने से इनकार किया है.

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बांग्लादेश में रोहिंग्या शरणार्थी (फाइल) बांग्लादेश में रोहिंग्या शरणार्थी (फाइल)

केशवानंद धर दुबे

  • न्यूयॉर्क,
  • 02 फरवरी 2018,
  • अपडेटेड 12:03 PM IST

म्यांमार सरकार ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के रोहिंग्या मामले में दौरे के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है. सरकार ने पहले कहा था कि फरवरी में रोहिंग्या शरणार्थी संकटों का जमीनी स्तर पर जायजा लिया जाएगा. लेकिन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष के द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार म्यांमार सरकार ने फरवरी में जायजा लेने से इनकार किया है और कहा है कि जायजा लेने के लिए फरवरी ‘सही समय नहीं है’.

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इस पर कुवैत के राजदूत मंसूर अल-ओताइबी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि म्यांमार मार्च-अप्रैल में होने वाले दौरे का विरोध नहीं कर रहा है. उन्होंने संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में पत्रकारों से कहा कि म्यांमार को केवल यह लगता है कि यह समय दौरे के लिए सही नहीं है. बता दें कि मंसूर अल-ओताइबी फरवरी में परिषद की अध्यक्षता कर रहे हैं.

बता दें कि अगस्त में शुरू हुई हिंसा के बाद से करीब 7,00,000 रोहिंग्या लोगों ने पड़ोसी देश बांग्लादेश में बने शिविरों में पनाह ली. संयुक्त राष्ट्र ने इस कार्रवाई को जातीय सफाई करार दिया था. परिषद ने रखाइन प्रांत में सैन्य कार्रवाई के कारण विस्थापित हुए लाखों रोहिंग्या मुस्लिमों को वापस लौटने की अनुमति देने की मांग की है.

राजदूत मंसूर ने कहा कि म्यांमार अधिकारी देश में स्थित राजनयिकों के दौरे का आयोजन करने की कोशिश कर रहे हैं और उन्होंने इस बात पर जोर दिया है कि इस समय रखाइन प्रांत में तनाव अधिक है.

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पिछले माह, संयुक्त राष्ट्र महासभा ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस से म्यांमार में विशेष दूत तैनात करने की अपील करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया था लेकिन अभी तक तैनाती नहीं की गई है. बता दें कि चीन (म्यामां के पूर्व सत्ताधारी जुंटा का समर्थक) और रूस ने इस प्रस्ताव के विरोध में वोट दिया था.

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