मेहुल चोकसी की जमानत याचिका खारिज, बेल्जियम की अदालत से नहीं मिली राहत

भगोड़ा हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी को बेल्जियम की अदालत ने जमानत देने से इनकार कर दिया है. तीन न्यायाधीशों की पीठ ने उसकी जमानत याचिका को खारिज किया. भारतीय एजेंसियों को उम्मीद है कि इस फैसले से उनके प्रत्यर्पण की प्रक्रिया में तेजी आएगी.

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पीएनबी बैंक घोटाले का आरोपी मेहुल चोकसी बेल्जियम में हिरासत में लिया गया. (PTI Photo) पीएनबी बैंक घोटाले का आरोपी मेहुल चोकसी बेल्जियम में हिरासत में लिया गया. (PTI Photo)

नलिनी शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 22 अप्रैल 2025,
  • अपडेटेड 11:03 PM IST

पंजाब नेशनल बैंक से 13,000 करोड़ रुपये के लोन धोखाधड़ी मामले में फरार चल रहे हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी को बेल्जियम की एक कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. कोर्ट ने मेहुल के जमानत याचिका को खारिज कर दिया. तीन न्यायाधीशों की पीठ ने जमानत याचिका पर विस्तार से दलीलें सुनीं. 

अदालत में सुनवाई के दौरान क्या हुआ?

मेहुल चोकसी ने अदालत में दलील दी कि उसकी तबियत ठीक नहीं रहती है. इसलिए उसे जमानत दे दिया जाए. मेहुल ने कहा कि वह अपने परिवार के साथ रहना चाहता है. 

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मेहुल ने अदालत में कहा कि वह किसी भी शर्त को मानने को तैयार है. यहां तक GPS ट्रैकिंग वाली एंकलेट पहनने को भी तैयार हूं.

हालांकि, अदालत ने मेहुल की दलीलों को स्वीकार नहीं किया और जमानत याचिका खारिज कर दी.

बेल्जियम में मेहुल चोकसी की गिरफ्तारी

12 अप्रैल (शनिवार), 2025 को बेल्जियम में मेहुल चोकसी की गिरफ्तारी हुई थी. भारत ने बेल्जियम को चोकसी के प्रत्यर्पण के लिए औपचारिक अनुरोध भेज चुका है. चोकसी बेल्जियम से स्विट्जरलैंड में इलाज के बहाने फरार होने की योजना बना रहा था, जब उसकी गिरफ्तारी हुई. 

यह भी पढ़ें: भगोड़े कारोबारी मेहुल चोकसी को भारत लाने के लिए क्या रणनीति? जानिए

मेहुल चोकसी की भारत प्रत्यर्पण में क्या बाधाएं हैं?

सीनियर एडवोकेट संजय हेगड़े ने कहा, 'उसके प्रत्यर्पण की दिशा में शुरुआती कदम उठाए गए हैं, लेकिन यह प्रक्रिया लंबी होगी. मुझे नहीं लगता कि उसे इतनी जल्दी भारत लाया जा सकेगा. बेल्जियम में संबंधित मंत्रालय से प्रशासनिक आदेश की आवश्यकता होगी, जो अदालत के आदेश के अधीन होगा.'

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मेहुल को भारत तभी प्रत्यर्पित किया जा सकेगा, जब मेहुल ने भारत में जो अपराध किया है उस तरह का अपराध बेल्जियम में भी दंडनीय माना जाना चाहिए. 

वहीं, मेहल ने प्रत्यर्पण का विरोध करते हुए दावा किया है कि उसके मामले में  राजनीतिक अपराध अपवाद या छूट का क्लॉज लागू होता है.

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