'बम, ड्रोन और स्नाइपर से बच्चों पर हमला कर रहा इजरायल', फिलिस्तीन पर UN की रिपोर्ट से मचा हड़कंप

संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र जांच आयोग ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि इजरायली सेना ने फिलिस्तीनी बच्चों को जानबूझकर निशाना बनाया है. ो साल में 20,000 से ज्यादा बच्चे मारे गए और 44,000 से ज्यादा गंभीर रूप से घायल हुए हैं. रिपोर्ट में बताया गया है कि बच्चों को भारी बमबारी और हाई-प्रिसिजन ड्रोन से निशाना बनाया जा रहा है.

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इजरायल पर जानबूझकर बच्चों को निशाना बनाने का आरोप है. (Photo: Pixabay) इजरायल पर जानबूझकर बच्चों को निशाना बनाने का आरोप है. (Photo: Pixabay)

अनीषा माथुर

  • नई दिल्ली,
  • 25 जून 2026,
  • अपडेटेड 7:39 AM IST

फिलिस्तीनी क्षेत्र पर संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच आयोग ने जेनेवा में UNHRC के सामने अपनी एक चौंकाने वाली रिपोर्ट पेश की है. आयोग के अध्यक्ष और ओडिशा हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश एस. मुरलीधर ने खुलासा किया है कि इजरायल जानबूझकर फिलिस्तीनी बच्चों को निशाना बना रहा है. 

इंडिया टूडे के साथ एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में एस. मुरलीधर ने बताया कि इस मामले पर आयोग ने इजरायल से जवाब मांगा था, लेकिन वो जांच में बिल्कुल भी सहयोग नहीं कर रहा है.

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उन्होंने खुलासा किया 7 अक्टूबर 2023 से 7 अक्टूबर 2025 के बीच वेस्ट बैंक और पूर्वी यरुशलम में 20,000 से ज्यादा बच्चे मारे जा चुके हैं. इसके अलावा 44,000 से ज्यादा बच्चे गंभीर रूप से घायल हुए हैं.

भयानक तरीकों से बच्चों को बना रहे निशाना

मूरलीधर ने बताया कि बच्चों को दो सोचे-समझे तरीकों से निशाना बनाया जा रहा है. पहला तरीका ये है कि ज्यादा आबादी वाले इलाकों में भारी क्षमता वाले बमों से कई बार हमले किए जा रहे हैं. दूसरा तरीका और भी खौफनाक है. इसके तहत क्वाडकॉप्टर (ड्रोन) और स्नाइपर राइफलों का इस्तेमाल किया जा रहा है. 

इन ड्रोनों में हाई-प्रिसिजन थर्मल इमेजिंग कैमरे लगे होते हैं. ये कैमरे दूर बैठे ऑपरेटर को बच्चे के शरीर का आकार साफ दिखा देते हैं. कुछ इजरायली सैनिकों ने कैमरे पर कबूल किया है कि दूर बैठकर बच्चों को मारना उनके लिए एक 'खेल' जैसा था.

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सिर में सिंगल-शॉट गोली और भयानक प्रताड़ना

रिपोर्ट के मुताबिक, बच्चों को गंभीर नुकसान पहुंचाने के लिए उनके सिर या गर्दन पर सिंगल-शॉट स्नाइपर से गोलियां मारी जा रही हैं. मां का दूध पी रहे एक महज 10 दिन के बच्चे के सिर में गोली मारी गई, जिससे वो जिंदगीभर के लिए अपंग हो गया. हाथ में सफेद झंडा लेकर खड़े बच्चों, एम्बुलेंसों और रेड क्रॉस की तरफ भागते नागरिक परिवारों को भी निशाना बनाया जा रहा है.

अस्पतालों के डॉक्टरों ने एक नई कैटिगरी बनाई है, जिसे 'WCNSF' (Wounded Child with No Survival Family) नाम दिया गया है. सिर्फ दो महीनों में ऐसे हजारों बच्चे अस्पतालों में लाए गए जिनके पूरे परिवार खत्म हो चुके थे.

अनाथालय, स्कूल और अस्पताल पूरी तरह तबाह

इजरायली सेना गाजा में अनाथालयों, स्कूलों और अस्पतालों को भी निशाना बना रही है. गाजा के 97 प्रतिशत स्कूल और 32 में से 27 से ज्यादा यूनिवर्सिटीज पूरी तरह तबाह हो चुकी हैं. बच्चे पिछले तीन साल से ज्यादा समय से शिक्षा से दूर हैं. 

स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है. डॉक्टरों को बिना एनेस्थीसिया या दर्द निवारक दवाओं के ही बच्चों के हाथ-पैर काटने पड़ रहे हैं. इसकी वजह से कई बच्चे 'म्यूटिज्म' का शिकार हो गए हैं, जहां वो सिर्फ शून्य में घूरते रहते हैं और बोल नहीं पाते. इसके अलावा, 10 से 15 साल के किशोर लड़कों को आतंकवादी बताकर सीधे गोली मारी जा रही है.

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गाजा में हालात इतने बदतर हैं कि 700 लोग एक सिंगल टॉयलेट शेयर कर रहे हैं और बच्चे सीवेज के पानी में खेलने को मजबूर हैं.

अंतरराष्ट्रीय समुदाय से कार्रवाई की मांग

एस. मुरलीधर ने कहा कि ऐसा लगता है कि फिलिस्तीनी लोगों के खिलाफ नरसंहार एक सरकारी नीति बन चुकी है. बच्चों को इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि वो किसी समाज की निरंतरता होते हैं. उन्होंने आगे कहा कि अब सिर्फ निंदा करने का समय खत्म हो चुका है, अब ठोस कार्रवाई की जरूरत है. 

यह भी पढ़ें: सीजफायर के बावजूद गाजा में अटैक, बच्चे और Al Jazeera के कैमरापर्सन की मौत

मुरलीधर ने सुझाव दिया कि जिन देशों के नागरिक इजरायली सेना की तरफ से लड़ रहे हैं, वो देश सार्वभौमिक अधिकार क्षेत्र के तहत अपने नागरिकों के खिलाफ आपराधिक जांच करें. इसके साथ ही, बच्चों पर हो रहे इन हमलों को तुरंत रोकने के लिए इजरायल पर कड़े वित्तीय और व्यापारिक प्रतिबंध लगाए जाने चाहिए.

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