'वक्त आ गया है कि...', ईरान जंग के बीच पाकिस्तान में शहबाज-मुनीर के खिलाफ भड़का लोगों का गुस्सा

ईरान पर अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों के खिलाफ पाकिस्तान में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए हैं. प्रदर्शनकारियों ने अमेरिकी और इजरायली दूतावासों के बाहर नारे लगाए और हिंसा भड़क उठी, जिसमें 26 लोग मारे गए. इस बीच पाकिस्तान की हाइब्रिड सरकार पर दबाव बढ़ गया है कि वो डोनाल्ड ट्रंप के बनाए बोर्ड ऑफ पीस से तुरंत अलग हो जाए.

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अमेरिका के खिलाफ पाकिस्तान में विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं (Photo: AP) अमेरिका के खिलाफ पाकिस्तान में विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं (Photo: AP)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 03 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 5:35 PM IST

ईरान में अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों में सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद पड़ोसी पाकिस्तान उबाल पर है. पाकिस्तान में शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर की हाइब्रिड सरकार जहां एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी बने हुए हैं तो वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान के लोग अमेरिका और इजरायल के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं.

खामेनेई की हत्या के विरोध में पाकिस्तान में इजरायल-अमेरिका विरोधी प्रदर्शनों में दर्जनों लोग मारे गए हैं और स्थिति को संभालने के लिए सेना उतारनी पड़ी है. इस बीच पाकिस्तान में यह मांग भी तेज हो रही है कि पाकिस्तान ट्रंप के 'बोर्ड ऑफ पीस' से तुरंत अलग हो जाए.

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बोर्ड ऑफ पीस डोनाल्ड ट्रंप का बनाया हुआ एक बोर्ड है जिसका मकसद गाजा जैसे संघर्षों में शांति की पहल को बढ़ावा देना बताया गया है. पाकिस्तान इस बोर्ड का मेंबर है जिसे लेकर पाकिस्तानी जनता का एक वर्ग काफी नाराज है. ईरान पर अमेरिका के हमले के बाद ये नाराजगी और बढ़ गई है. संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की पूर्व राजदूत मलीहा लोधी ने कहा है कि अब पाकिस्तान के लिए तथाकथित 'बोर्ड ऑफ पीस' छोड़ने का समय आ गया है.

संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की पूर्व राजदूत ने क्या कहा?

संयुक्त राष्ट्र के अलावा अमेरिका और ब्रिटेन में भी पाकिस्तान की राजदूत रह चुकीं मलीहा लोधी ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से अपील की है कि ईरान पर हुए हमलों के बाद अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बनाए गए तथाकथित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ से पाकिस्तान को अलग हो जाना चाहिए.

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उन्होंने एक्स पर लिखा, 'अब समय आ गया है कि पाकिस्तान उस बोर्ड ऑफ पीस को छोड़ दे, जिसमें उसे शुरुआत से ही शामिल नहीं होना चाहिए था. यह एक ऐसे व्यक्ति की तरफ से स्थापित और संचालित है, जिसने सात देशों पर हमले किए हैं. इसे एक ऐसा व्यक्ति चला रहा है जिसकी प्रशासनिक व्यवस्था गाजा में इजरायल के जनसंहार में सहभागी है.'

ईरान पर अमेरिकी-इजरायली हमले के बाद पाकिस्तान में हो रहे विरोध-प्रदर्शन

ईरान के बाद पाकिस्तान दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा शिया मुस्लिम समुदाय वाला देश है. ईरान पर हमलों के खिलाफ फैले विरोध प्रदर्शनों के बाद पाकिस्तान ने सोमवार को देशभर में बड़े सार्वजनिक जमावड़ों पर प्रतिबंध लगा दिया. देशभर में हिंसा में 26 लोगों के मारे जाने की खबर है.

रविवार को प्रदर्शनकारियों ने अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के बाहर 'अमेरिका मुर्दाबाद! इजरायल मुर्दाबाद!' के नारे लगाए. दूतावास में तैनात अमेरिकी अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाईं और आंसू गैस के गोले छोड़े.

पाकिस्तान के शिया समुदाय के नेताओं ने देशव्यापी प्रतिबंध के बावजूद लाहौर और कराची में और प्रदर्शनों का आह्वान किया है. पाकिस्तान में अमेरिकी दूतावास राजधानी इस्लामाबाद में स्थित है, जबकि पेशावर और लाहौर में दो अतिरिक्त वाणिज्य दूतावास हैं.

कराची में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास की ओर जाने वाली सड़कों पर भारी पुलिस बल की तैनाती है और उन्हें बंद कर दिया गया है. लाहौर और इस्लामाबाद स्थित अमेरिकी मिशनों के आसपास भी इसी तरह के सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं.

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