ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामेनेई की अंतिम यात्रा में सोमवार को भारी जनसैलाब उमड़ा. खामेनेई के अंतिम दर्शन के लिए तेहरान में कई किलोमीटर लंबे रूट पर लोगों का जत्था दिखाई दिया. इससे पहले जब आयतुल्ला के ताबूत को जब ग्रैंड मोसल्ला लाया गया तो उनके तीन बेटें मुस्तफा, मैसम और मसूद रोते-बिलखते नजर आए लेकिन मोजतबा खामेनेई की गैरमौजूदगी सबसे ज्यादा चर्चा में रहीं. इस बीच आयतुल्ला के अंतिम दर्शन के लिए पहुंचीं महिलाएं मोजतबा के नहीं आने से मायूस नजर आईं.
अब तक मोजतबा खामेनेई की कोई सार्वजनिक तस्वीर या वीडियो सामने नहीं आया है. बताया जाता है कि अमेरिका और इजरायल के 28 फरवरी के हमले में वह गंभीर रूप से घायल हो गए हैं. इसी हमले में आयतुल्लाह अली खामेनेई और उनके परिवार के अन्य सदस्य मारे गए थे.
रिपोर्ट के मुताबिक, मोजतबा खामेनेई का चेहरा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है और उनके एक या दोनों पैरों में गंभीर चोटें आई हैं. लेकिन आयतुल्ला के अंतिम दर्शन के लिए उमड़ी भीड़ में शामिल एक महिला ने मोजतबा के नहीं आने पर मायूसी जताते हुए कहा कि वह आखिरी क्षण तक नमाज शुरू होने से पहले तक मोजतबा का इंतजार करती रहीं. उन्होंने कहा कि मैं अपने आसपास के लोगों से यही कहती रही कि काश मोजतबा खामेनेई खुद आ जाएं. यही हमारी सबसे बड़ी इच्छा थी. वहीं, एक अन्य महिला ने भी बताया कि हमें उम्मीद थी कि मोजतबा आएंगे और हम उन्हें देख पाएंगे. लेकिन वह नजर नहीं आएं.
बता दें कि आयतुल्ला खामेनेई के पार्थिव शरीर को अब कोम ले जाया जाएगा, जहां मंगलवार को खामेनेई के अंतिम संस्कार संबंधी समारोह होंगे. एक सरकारी अधिकारी के हवाले से ईरानी मीडिया ने बताया कि कोम तक पार्थिव शरीर को विशेष वाहन से सड़क मार्ग द्वारा ले जाया जाएगा. इसके बाद बुधवार को पार्थिव शरीर को विमान से इराक के पवित्र शिया शहर नजफ और कर्बला ले जाया जाएगा. गुरुवार को उसे वापस ईरान लाया जाएगा, जहां मशहद में एक और अंतिम यात्रा निकाली जाएगी. इसके बाद उन्हें मध्यकालीन शिया इमामों में से एक की दरगाह के निकट दफनाया जाएगा.
अली खामेनेई की मौत के लगभग 10 दिन बाद आठ मार्च को मोजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर चुना गया था. 12 मार्च को उन्होंने अपना पहला लिखित संदेश जारी किया था. उनके संदेश को एक टीवी एंकर ने पढ़ा था, जिसमें मोजतबा ने बदला लेने की बात कही थी. इसके बाद से मोजतबा खामेनेई दर्जनों संदेश जारी कर चुके हैं. हालांकि, उनके संदेशों को सरकारी टीवी पर पढ़ा जाता है.
सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं के बावजूद इस बात का कोई पक्का सबूत नहीं है कि 28 फरवरी के उस हमले के बाद मोजतबा खामेनेई जिंदा भी हैं या नहीं? उस हमले में मोजतबा की पत्नी जहरा हद्दाद आदेल और उनके परिवार के दूसरे सदस्य मारे गए थे.
बाद में 11 अप्रैल को न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने तीन करीबी सूत्रों के हवाले से बताया था कि उस हमले में मोजतबा खामेनेई बुरी तरह जख्मी हो गए थे. उनका चेहरा पूरी तरह बिगड़ गया था और शायद उनका एक पैर भी कट गया था.
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